Ghosi By-Election: 'बसपा के वोटर दबाएंगे नोटा?', BSP की चाल से भाजपा और सपा प्रत्याशियों की बढ़ी मुश्किलें
Ghosi By-Election: घोसी उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। रविवार को चुनाव प्रचार का अंतिम दिन समाप्त हो जाने के बाद अब राजनीतिक दलों की निगाह मतदान पर टिकी हुई है, इसी बीच बसपा ने ऐसा सियासी दांव चला है जिससे सपा और भाजपा दोनों प्रत्याशियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
बसपा के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा कहा गया कि बसपा के मतदाता या तो घर बैठेंगे या फिर मतदान करने जाएंगे तो नोटा बटन दबाकर वापस लौटेंगे। उपचुनाव में बहुजन समाज पार्टी द्वारा अपनी पार्टी से प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा गया था। ऐसे में बसपा द्वारा मतदान के ठीक पहले बसपाईयों से इस तरह की अपील करने से चुनावी समीकरण में उलटफेर संभव नजर आ रहा है।

बीते चुनाव पर यदि ध्यान दिया जाए तो पता चलता है कि साल 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां से बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी वसीम इकबाल को 54248 मत मिले थे। इसी तरह साल 2019 में भी उपचुनाव हुआ था और उस उपचुनाव में बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी अब्दुल कयूम अंसारी को 50 हजार से अधिक वोट मिले थे।
जानकारों का कहना है कि घोसी विधानसभा सीट में करीब 90 हजार से अधिक दलित वोटर हैं। ऐसे में यदि बहुजन समाज पार्टी के कोर वोटर यदि मतदान करने नहीं जाते हैं या फिर मतदान करते समय नोटा बटन दबाते हैं तो इसका नुकसान भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को होगा।
चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक पार्टियों द्वारा जनसभा में दलित और पिछड़े वोटरों को अपने पक्ष में साधने का पूरा प्रयास किया जा रहा था। राजनीतिक जानकारों द्वारा यह भी कहा गया कि घोसी उपचुनाव में बसपा का प्रत्याशी चुनाव मैदान में ना होने के चलते दलित होटल निर्णायक की भूमिका में रहेंगे। हालांकि चुनाव से पहले बसपा के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा ऐसा फरमान सुनाए जाने के बाद घोसी का सियासी माहौल गर्म हो गया है।
दोनों पार्टियों के लिए प्रतिष्ठा बना उपचुनाव
घोसी उपचुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि आगामी समय में लोकसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में मौजूदा हालात में इंडिया गठबंधन घोसी विधानसभा में हो रहे उपचुनाव को हर हाल में जीतना चाहता है। इस सीट पर जीत हासिल करने के बाद इसका प्रचार भी नेशनल स्तर पर इंडिया गठबंधन द्वारा किए जाने की बात चल रही है रही है।
यही कारण है कि इस सीट पर कांग्रेस द्वारा कोई प्रत्याशी नहीं उतारा गया और समाजवादी पार्टी का समर्थन किया गया। इसके अलावा राष्ट्रीय लोकदल और इंडिया गठबंधन से जुड़ी अन्य पार्टियों द्वारा भी घोसी उपचुनाव में अपने प्रत्याशी नहीं उतारे गए और समाजवादी पार्टी के पक्ष में प्रचार प्रसार और मतदान करने की अपील की गई।
इसी तरह भारतीय जनता पार्टी के लिए भी यह उपचुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है। भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी दारा सिंह चौहान हाल ही में समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दे दिए थे उसके बाद भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता लिए थे। जिसके चलते यह सीट खाली हो गई थी और अब उपचुनाव हो रहा है।
इसके अलावा सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर में भी समाजवादी गठबंधन से अपना नाता तोड़ लिया था और भी भी इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी से गठबंधन कर भाजपा प्रत्याशी दारा सिंह चौहान को जिताने में जुटे हुए हैं। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के साथ ही दारा सिंह चौहान और ओमप्रकाश राजभर के लिए भी यह उपचुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है।
फिलहाल अब मतदान के दिन देखना होगा कि बहुजन समाज पार्टी के वोटर मतदान करने के लिए पहुंचे या नहीं और यदि मतदान करने के लिए पहुंचे तो क्या उन्होंने नोटा बटन दबाया या फिर किसी प्रत्याशी को वोट देकर लौटे हैं। कुल मिलाकर बसपा द्वारा ऐसा फैसला सुनाए जाने के बाद राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इससे भारतीय जनता पार्टी को काफी नुकसान होगा।












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