एकनाथ शिंदे क्‍यों नहीं मान रहे? महाराष्‍ट्र में सरकार बनाने के लिए BJP क्‍यों कर रही शिंदे की मान-मनौव्वल?

Maharashtra government: महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में महायुति गठबंधन ने बंपर जीत हासिल की लेकिन 10 दिन के बावजूद महाराष्‍ट्र सरकार का गठन नहीं हो सका है। भाजपा के नेतृत्‍व वाला महायुति मुख्‍यमंत्री के नाम की औप‍चारिक घोषणा भी नहीं की पाया है। जबकि शपथ ग्रहण की तारीख 5 दिसंबर निधार्रित कर दी है।

हालांकि शपथ ग्रहण में अब जब डेढ़ दिन से भी कम का समय बचा है लेकिन अभी तक भाजपा के नेतृत्‍व वाले महायुति गठबंधन ने राज्‍यपाल के पास सरकार बनाने का दावा पेश किया है और ना ही राज्‍यपाल की ओर से महायुति को सरकार बनाने का आमंत्रण भेजा गया है।

Eknath Shinde

सरकार गठन और सीएम पद को लेकर अस्‍पष्‍ठता की वजह एकनाथ शिंदे की जिद बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर क्‍या वो वजह है जो एकनाथ शिंदे मान नहीं रहे हैं और जब भाजपा बिना एकनाथ शिंदे की शिवसेना के सहयोग के आसानी से सरकार बना सकती है तो वो शिंदे को मनाने में क्‍यों जुटी हुई है?

भाजपा शिंदे के बिना ऐसे बना सकती है सरकार

बता दें महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव में राज्‍य की 288 सीटों में से भाजपा ने 123 सीटों पर जीत हासिल की है। वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 57 और अजित पवार गुट की एनसीपी में 41सीटों पर जीत हासिल की है। महाराष्‍ट्र में बहुमत की सरकार बनाने के लिए महज 145 सीटों पर जीत की आवश्‍यकता है और ये संख्‍या भाजपा महायुति की दूसरे सहयोगी अजित पवार की एनसीपी के साथ मिलकर आसानी से पूरी कर सरकार का गठन कर सकती है।

क्‍यों गृह मंत्रालय की मांग कर रहे एकनाथ शिंदे?

ये बात एकनाथ शिंदे को अच्‍छे से पता है बावजूद एकनाथ शिंदे मुख्‍यमंत्री पद छोड़ने की एवज में डिप्‍टी सीएम पद के साथ गृह मंत्रालय जैसा अहम मंत्रालय की डिमांड कर रहे है। इसकी वजह है कि गृह मंत्रालय जैसा शक्तिशाली विभाग एकनाथ शिंदे शिवसेना को दिलाने की बार-बार कोशिश की लेकिन हर बार वो नाकाम रहे। उद्धव ठाकरे के नेतृत्‍व वाल पिछली एवीए सरकार में भी गृह मंत्रालय एनसीपी को मिल गया था। इसके बाद महायुति सरकार में मुख्‍यमंत्री पद होने के बावजूद गृह मंत्री शिवसेना नहीं बल्कि भाजपा के उपमुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास था।

एकनाथ शिंदे क्‍यों नहीं मान रहे?

वहीं इस बार भी भाजपा गृह मंत्रालय अपने पास रखना चाहती है लेकिन शिंदे इसके लिए तैयार नहीं है।इसकी वजह है कि जब पिछली सरकार में एकनाथ शिंदे मुख्‍यमंत्री थे तो वो अपनी शिवसेना के विधायकों को ताकत देने में स्‍वयं सक्षम थे लेकिन अब जब सीएम पद उनके पास नहीं रहेगा तो वो हर हाल में गृह मंत्रालय समेत अन्‍य अहम विभाग शिवसेना को दिलवाना चाहते हैं।

BJP क्‍यों कर रही शिंदे की मान-मनौव्वल?

वहीं अब बात करते हैं कि भाजपा क्‍यों नहीं एकनाथ शिंदे की मांगों को दरकिनार कर सरकार का गठन क्‍यों नहीं कर ले रही है? जबकि वो एनसीपी के सहयोग से आसानी से सरकार बना सकती है और देवेंद्र फडण्‍वीस को मुख्‍यमंत्री। इसकी बड़ी वजह शिंदे का मराठी समुदाय पर प्रभाव है। शिंदे ही थे जिन्‍होंने चुनाव से पहले आरक्षण की मांग कर रहे मराठियों को शांत करवाया और महायुति को मराठाओं का वोट दिलवाया। अगर भाजपा शिंदे से नाता तोड़ती है तो महाराष्‍ट्र के बीच गलत संदेश जाएगा। याद रहे महाराष्‍ट्र के अब तक के 18 मुख्‍यंत्रियों में 8 मराठा समुदाय से ही रहे हैं।

देंवेंद्र फडणवीस बनाम एकनाथ शिंदे

वहीं फडणवीस अनुभवी और काबिज और भाजपा के प्रभावशाली और दिग्गज नेता हैं लेकिन उनकी जाति ब्राह्मण होने के कारण भाजपा का एक वर्ग चितिंत है। प्रभावशाली मराठा समाज और ओबीसी समाज को खुश करने के लिए इसलिए भाजपा फडणवीस को सीएम और एकनाथ शिंदे और अतिज पवार को डिप्‍टी सीएम बनाकर सबको खुश करना चाहती है।

बीएमसी चुनाव

इसके अलावा अब जल्‍द ही नगर निगम के चुनाव होने वाले हैं और भाजपा विपक्षी उद्वव ठाकरे की शिवसेना को टक्‍कर देने के लिए ये आगामी चुनाव एकनाथ शिंदे के चेहरे पर लड़ना चाहती है। बता दें बीएमसी चुनाव पर पिछले 3 दशकों से ठाकरे की शिवसेना यूबीटी पर कब्जा है। ऐसे में भाजपा इस चुनाव से पहले शिंदे को किसी भी हाल में किनारा या नाराज नहीं करना चाहती है। भाजपा की इस कमजाेर नब्ज को एकनाथशिंदे भी भाप चुके हैं ये ही वजह है कि सीएम पद की लालसा नहीं कह कर भी सीएम पद और गृह मंत्रालय जैसे अहम विभागों को लेकर बार्गेनिंग कर रहे हैं।

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