कौन हैं बाहुबली धनंजय सिंह? महाराष्ट्र में महायुति को जिताने में बड़ी भूमिका, 3 शादी करने वाले नेता की कहानी
Bahubali Dhananjay Singh: महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव 2026 के नतीजों के बीच एक नाम अचानक चर्चा में आ गया-उत्तर प्रदेश के जौनपुर से ताल्लुक रखने वाले बाहुबली नेता धनंजय सिंह।
बृहन्मुंबई नगर निगम समेत राज्य की 29 नगर महापालिकाओं में हुए चुनावों के बीच वसई-विरार महानगरपालिका के नतीजों (Vasai-Virar Election Result) ने सबको चौंका दिया। यहां जिस प्रभाग में धनंजय सिंह ने महायुति प्रत्याशियों के लिए रोड शो किया, वहां महायुति ने क्लीन स्वीप कर इतिहास रच दिया।

वसई-विरार में क्यों खास रही धनंजय सिंह की मौजूदगी
चुनावी नतीजों में वसई-विरार महानगरपालिका के प्रभाग क्रमांक 18 में बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी की महायुति ने चारों सीटों पर जीत दर्ज की। यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान यूपी से आए धनंजय सिंह ने यहां ताबड़तोड़ रोड शो किए थे। स्थानीय नेताओं का मानना है कि पूर्वांचली मतदाताओं पर उनकी पकड़ और प्रभाव ने चुनावी समीकरण बदल दिए।
महाराष्ट्र में पूर्वांचली वोट और धनंजय फैक्टर
मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में पूर्वांचल से आए मतदाता रहते हैं। इन्हीं वोटरों को साधने के लिए महायुति उम्मीदवारों ने धनंजय सिंह को मैदान में उतारा। उनकी अपील और भाषणों का असर मतदान केंद्रों पर साफ नजर आया। जीत के बाद महायुति कार्यकर्ताओं के साथ-साथ धनंजय समर्थकों में भी जबरदस्त उत्साह दिखा।

कौन हैं यूपी के बाहुबली धनंजय सिंह (Who is dhananjay singh)
धनंजय सिंह पूर्वांचल की राजनीति का जाना-पहचाना नाम हैं। वे दो बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके हैं। 2002 और 2007 में निर्दलीय विधायक चुने गए, जबकि एक बार जेडीयू के टिकट पर विधानसभा पहुंचे। 2009 में वे बसपा के टिकट पर जौनपुर से लोकसभा सांसद बने। फिलहाल वे जेडीयू में हैं, जो एनडीए का हिस्सा है। जौनपुर के बनसफा गांव में उनका विशाल आवास है, जहां वे अभी रहते हैं।
छात्र राजनीति से अपराध और सत्ता तक का सफर
धनंजय सिंह ने राजनीति की शुरुआत जौनपुर के टीडी कॉलेज और फिर लखनऊ विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से की। मंडल आयोग के विरोध से उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। छात्र राजनीति के दौरान उनकी मुलाकात बाहुबली छात्र नेता अभय सिंह से हुई और यहीं से उनका कद तेजी से बढ़ा। 1990 के दशक में उनके खिलाफ हत्या, वसूली और टेंडर से जुड़े कई मामले दर्ज हुए। 1998 तक वे 5,000 रुपये के इनामी बदमाश घोषित कर दिए गए थे।
एक समय तो पुलिस मुठभेड़ में उन्हें मृत तक घोषित कर दिया गया, लेकिन बाद में यह खबर झूठी निकली और वे जिंदा सामने आए। इसके बाद उन्होंने राजनीति में औपचारिक एंट्री की और 2002 में पहली बार विधायक बने।

जेल, विवाद और लगातार सुर्खियां
धनंजय सिंह का नाम समय-समय पर बड़े विवादों से जुड़ता रहा है। हाल ही में 300 करोड़ रुपये की सीवर लाइन परियोजना में घटिया सामग्री की सप्लाई के दबाव के मामले में उन्हें जेल की सजा हुई थी। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी वे जेल में थे। उस समय उनकी पत्नी श्रीकला सिंह को बसपा ने जौनपुर से टिकट दिया था।
रिहाई के बाद उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी कृपाशंकर सिंह को समर्थन दिया। हालांकि वह चुनाव बीजेपी हार गई। फिलहाल कफ सिरप की अवैध खरीद-फरोख्त से जुड़े मामले में भी उनका नाम चर्चा में है।
धनंजय सिंह की तीन शादियां और निजी जिंदगी के विवाद
धनंजय सिंह की निजी जिंदगी भी कम विवादित नहीं रही। उन्होंने तीन शादियां की हैं। पहली पत्नी ने शादी के कुछ महीनों बाद आत्महत्या कर ली थी। दूसरी पत्नी डॉक्टर जागृति सिंह घरेलू नौकरानी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार हुई थीं, इस मामले में धनंजय सिंह भी आरोपी बनाए गए थे। बाद में दोनों का तलाक हो गया। 2017 में उन्होंने व्यवसायिक परिवार से आने वाली श्रीकला रेड्डी से पेरिस में तीसरी शादी की।
धनंजय सिंह को लेकर अब यूपी की राजनीति में क्यों है हलचल?
यह पहला मौका है जब धनंजय सिंह मुंबई में बीजेपी और शिंदे गुट के प्रत्याशियों के प्रचार के लिए खुले तौर पर मैदान में उतरे। भले ही वे जेडीयू नेता हों, लेकिन महाराष्ट्र में वे पूरी तरह भगवा रंग में नजर आए। उनके गले में बीजेपी का पट्टा भी दिखा। इससे यूपी की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है।
महाराष्ट्र चुनाव में सक्रिय भूमिका के बाद यूपी के सियासी गलियारों में चर्चा है कि धनंजय सिंह 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी के और करीब आ सकते हैं। हालांकि उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले बीजेपी में औपचारिक एंट्री की राह में सबसे बड़ी अड़चन माने जा रहे हैं।
महाराष्ट्र चुनाव ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि राजनीति में सीमाएं अब राज्यों तक सीमित नहीं रहीं। यूपी का एक बाहुबली नेता मुंबई की सियासत में गेमचेंजर बन सकता है-और धनंजय सिंह इसका ताजा उदाहरण बनकर उभरे हैं।












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