कौन है सैयद इकबाल ख्वाजा? शिवसेना यूबीटी ने बनाया मेयर तो भाजपा बोली- उद्धवसेना अब जनाबसेना
Who Syed Iqbal: महाराष्ट्र की राजनीति ने हाल के वर्षों में लगातार हैरतअंगेज मोड़ दिखाए हैं, हर बदलाव ने जनता को चौंकाया है। सत्ता के लिए कुछ भी करेंगे वाली तर्ज पर चलना तो मानो उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी की पहचान बन चुका है। परभणी में शिवसेना (UBT) द्वारा मुस्लिम पार्षद सैयद इकबाल को अपनी पार्टी का मेयर बनाकर फिर ये सिद्ध कर दिया है।
हिंदूवादी ठाकरे की शिवसेना यूबीटी के इस फैसले से राज्य की सियासत गरमा गई। भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) ने उद्धवसेना पर निशाना साधते हुए उसे 'जनाबसेना' करार दिया है। जानिए आखिर कौन हैं इकबाल सैयद ख्वाजा जिनको उद्धव की शिवसेना ने परभणी का मेय बनाया है?

भाजपा को हराकर इकबाल सैयद ख्वाजा बने मेयर
दरअसल, गुरुवार को हुए परभणी में हुए महापौर चुनाव में कांग्रेस-शिवसेना (यूबीटी) गठबंधन विजयी रहा। शिवसेना यूबीटी के सैय्यद इकबाल सैयद ख्वाजा को 39 जबकि भाजपा की तिरुमला खिल्लारे को 26 वोट मिले।अक्षय देशमुख व निर्दलीय पार्षद रजिया बेगम ने भी उनके पक्ष में मतदान किया। जीत के बाद यूबीटी कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया। उद्धव ठाकरे की पार्टी की स्थापना के बाद पहली बार परभणी को मेयर मिला है।
भाजपा ने कसा तंज- उद्धव ठाकरे की अब शिवसेना नहीं जनाबसेना है
मुस्लिम महापौर के निर्वाचन पर भाजपा ने तीखी टिप्पणी की। भाजपा धार्मिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष आचार्य तुषार भोंसले ने कहा, "जनाब उद्धव ठाकरे की अब शिवसेना नहीं बल्कि जनाबसेना है। उन्होंने कहा कि जनाब उद्धव ठाकरे का मुसलमानों से कितना लगाव है, वह आज सिद्ध हो गया। जो मुंबई में संभव नहीं हुआ, वो परभणी में मुस्लिम को महापौर बनाकर उन्होंने सि्दध कर दिया कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में अब शिवसेना नहीं, बल्कि जनाबसेना बन चुकी है।"
क्या बोलीं शिंदे शिवसेना?
एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने भी यूबीटी पर तंज कसते हुए कहा कि जो काम वे मुंबई में नहीं कर पाए, वो परभणी में कर दिखाया। उपमहापौर पद चुनाव में कांग्रेस के गणेश देशमुख ने 38 मत हासिल कर जीत दर्ज की।
कौन हैं सैयद इकबाल?
सैयद इकबाल पहली बार पार्षद के रूप में राजनीति में उतरे हैं और उन्हें स्थानीय स्तर पर सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर जाना जाता है। वे सैयद अब्दुल खादर के छोटे भाई हैं, जो बिजनेस में सक्रिय हैं और परभणी के मुस्लिम इलाकों में उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है। पहले AIMIM से जुड़े रहे खादर का राजनीतिक अनुभव अब उनके परिवार के लिए भी सहारा बन रहा है। सैयद इकबाल को शिवसेना (UBT) के सांसद संजय जाधव का निकट सहयोगी माना जाता है, और इसी समर्थन के दम पर उन्होंने मेयर का पद हासिल किया।
परभणी शहर का राजनीतिक और सामाजिक समीकरण
परभणी, मराठवाड़ा का एक अहम शहर, सामाजिक रूप से मिश्रित आबादी वाला इलाका है। शहर की कुल जनसंख्या में मुस्लिम समुदाय का हिस्सा लगभग 20-25% है। अन्य समुदाय की बात करें तो मराठा, ओबीसी, दलित और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की मजबूत उपस्थिति के कारण यहां की राजनीति हमेशा संतुलन और गठबंधन पर निर्भर रही है।
राजनीतिक इतिहास
नगर निगम चुनावों में परभणी ने समय-समय पर कांग्रेस और शिवसेना-बीजेपी जैसे अलग-अलग राजनीतिक प्रयोग देखे हैं। सैयद इकबाल के मेयर चुने जाने के बाद बहस मुख्य रूप से प्रशासनिक योग्यता से ज्यादा पहचान और समुदाय आधारित राजनीति पर केंद्रित रही।
बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट ने इसे मराठी मानुष की राजनीति और हिंदुत्व से समझौते के तौर पर पेश किया शिवसेना (UBT) और कांग्रेस ने इसे संविधान, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और समावेशी राजनीति के नजरिए से देखा।
"खान बनाम बाण"
1980 के दशक में शिवसेना के राजनीतिक उभार के दौरान "खान बनाम बाण" का नारा चर्चित था। 'खान' - मुस्लिम पहचान का प्रतीक 'बाण' - शिवसेना और हिंदुत्व का प्रतीक उस समय की राजनीति हिंदुत्व और मराठी अस्मिता के इर्द-गिर्द केंद्रित थी। आज बीजेपी और शिंदे गुट इस इतिहास का हवाला देते हुए सवाल उठा रहे हैं कि वही पार्टी अब मुस्लिम मेयर का समर्थन क्यों कर रही है।












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