Eknath Shinde कौन हैं ? कभी ऑटो चलाते थे, अब मिला शिवसेना से महाराष्ट्र के चौथे CM बनने का मौका
मुंबई, 30 जून: एकनाथ शिंदे को महाराष्ट्र की राजनीति में शून्य से सत्ता के शिखर तक पहुंचने का मौका मिला है। वह शिवसेना के सबसे ज्यादा जनाधार वाले नेताओं में से रहे हैं और राजनीतिक जानकारों के मुताबिक मुंबई से बाहर महाराष्ट्र में पार्टी की जो भी पकड़ है, वह एकनाथ शिंदे जैसे नेताओं और कार्यकर्ताओं की बदौलत ही बनी है। यही वजह है कि आज से नहीं उद्धव ठाकरे के पिता बाल ठाकरे के जमाने से भी शिंदे ने पार्टी में अपनी खास पकड़ बनाई थी और उन्हें हमेशा मातोश्री का आशीर्वाद भी मिला। प्रदेश की राजनीति में शिवसेना जैसी पार्टी के लिए दूसरे दलों के सहयोग से ऐसा चौथा मौका मिला है, जब कोई शिवसैनिक मुख्यमंत्री की गद्दी तक पहुंचा है। इससे पहले मनोहर जोशी और नारायण राणे, बाल ठाकरे के जमाने में ही भाजपा के सहयोग से मुख्यमंत्री रह चुके थे। सिर्फ उद्धव ठाकरे ने ही बीजेपी को चुनाव के बाद दूर करके एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार बनाई थी। लेकिन, एकनाथ शिंदे को एकबार फिर से भाजपा का ही साथ मिला है।

शिवसेना के जनाधार वाले नेता हैं एकनाथ शिंदे
58 साल के एकनाथ शिंदे उद्धव ठाकरे से बगावत करने के पहले तक शिवसेना के वरिष्ठतम और बड़े जनाधार वाले नेताओं में शामिल रहे हैं। वह महा विकास अघाड़ी सरकार में शहरी मामलों के कैबिनेट मंत्री रहे। इससे पहले वे शहरी विका और लोक कार्य (पब्लिक अंडरटेकिंग्स) विभाग के भी मंत्री थे। इनके बेटे श्रीकांत शिंदे लोकसभा के सांसद हैं, जबकि भाई प्रकाश शिंदे काउंसिलर हैं। शिंदे की अगुवाई में ही शिवसेना के 37 से ज्यादा विधायकों ने उद्धव ठाके के नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह किया, जिसके बाद एकनाथ शिंदे के लिए 30 जून, 2022 यानी गुरुवार को मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला।

बहुत ही सामान्य परिवार में हुआ था जन्म
1964 में जन्मे एकनाथ शिंदे मराठा समाज से आते हैं और उनकी परवरिश बहुत ही सामान्य परिवार में हुई है। कहा जाता है कि तंगी की वजह से उन्हें अपनी शिक्षा बीच में ही छोड़ देनी पड़ी थी। लेकिन, जब 2014 में उन्हें देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली बीजेपी-शिवसेना सरकार में मंत्री बनने का मौका मिला तो उन्होंने अपनी पढ़ाई फिर से शुरू की। शिक्षा के प्रति उनकी इसी भावना का परिणाम है कि उन्होंने महाराष्ट्र के यशवंत राव चव्हाण ओपन यूनिवर्सिटी से अपनी ग्रैजुएशन पूरी की।

1980 के दशक से शिवसेना की राजनीति की है
1980 के दशक की बात है एकनाथ शिंदे ठाणे जिले के शिवसेना प्रमुख आनंद दिघे के संपर्क में आए और फिर उनकी पहुंच शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे तक हुई। वह अपने जीवन में शिवसेना संस्थापक से बहुत ही ज्यादा प्रभावित रहे हैं। लेकिन, चुनावी राजनीति में उनकी एंट्री 1997 में हुई। तब वह पहली बार ठाणे नगर निगम में कॉर्पोरेटर चुने गए। 2001 में वे ठाणे नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष बन गए और 2002 में निगम के लिए लगातार दूसरी बार चुने गए।

शिवेसना में लगातार बढ़ता गया कद
उन्हें ज्यादा समय तक इंतजार नहीं करना पड़ा और 2004 में ही वे पहली बार ठाणे की कोपरी पाचपाखाडी सीट से विधानसभा चुनाव जीते। तब से वह लगातार चार बार एमएलए का चुनाव जीत चुके हैं। तब शिवसेना प्रमुख के आशीर्वाद से उन्हें 2005 में पार्टी का ठाणे जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया। वह पार्टी के लिए इस प्रतिष्ठत पद पर बिठाए जाने वाले पहले एमएलए थे। इस तरह से शिवसेना में उनका पॉलिटिकल ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ता गया।

2014 से शिवसेना विधायक दल के नेता रहे
2014 में जब महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन की सरकार बनी तो पार्टी ने उन्हें विधानसभा में विधायक दल का नेता नियुक्त किया। 2019 में महा विकास अघाड़ी और उद्धव ठाकरे की सरकार बनने के बाद भी वह इस पद पर रहे। क्योंकि, उद्धव ठाकरे तो विधान परिषद के सदस्य थे, जिससे बुधवार को उन्होंने इस्तीफा दिया है। लेकिन, जब शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के विधायकों ने पहले सूरत और फिर गुवाहाटी में डेरा डाला तो उद्धव ठाकरे गुट ने 21 जून को उन्हें शिवसेना विधायक दल के नेता पद से हटा दिया था। इस मामले की सुनवाई अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

राजनीति में आने से पहले ऑटो चलाते थे एकनाथ शिंदे
जब 29 जून, 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने यह तय कर दिया कि महाराष्ट्र के गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी के निर्देश के मुताबिक विधानसभा में फ्लोर टेस्ट 30 जून को ही होगा, तो उद्धव ठाकरे ने बहुमत-परीक्षण का सामना करने से पहले ही इस्तीफा दे देने में ही भलाई समझी। लेकिन, सीएम की कुर्सी छोड़ते-छोड़ते उन्होंने बिना नाम लिए एकनाथ शिंदे पर निजी भड़ास निकालने की कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा, 'जो ऑटो-रिक्शा चलाथे थे, ठेले चलाते थे, हमने उन्हें एमपी और एमएलए बनाया। जिन्हें मैंने सबकुछ दिया, उन्होंने ये किया है।' दरअसल, राजनीति में आने से पहले एकनाथ शिंदे ऑटो-रिक्शा और टेंपो चलाते थे। लेकिन, अपने संघर्ष के दम पर वह बहुत ही सामान्य परिवार से उठकर भी महाराष्ट्र के सत्ता के केंद्र बिंदू बन गए हैं।












Click it and Unblock the Notifications