Dinesh Waghmare: कौन हैं IAS दिनेश वाघमारे? महाराष्ट्र चुनाव आयुक्त के हर फैसले पर क्यों उठ रहे हैं सवाल
Dinesh Waghmare (Maharashtra SEC): महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों के बीच एक नाम अचानक सुर्खियों के केंद्र में आ गया है। यह नाम है महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश टी वाघमारे का। 29 नगर निगमों में हुए मतदान के दौरान सामने आई तकनीकी खामियों, प्रशासनिक फैसलों और विवादों ने राज्य चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने तो सीधे तौर पर दिनेश वाघमारे को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके निलंबन की मांग तक कर दी है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर दिनेश वाघमारे कौन हैं और उनका सफर अब विवादों के घेरे में कैसे आ गया।

▶️ कौन हैं दिनेश टी वाघमारे (Who is Dinesh Waghmare)
दिनेश टी वाघमारे महाराष्ट्र कैडर के 1994 बैच के आईएएस (IAS) अधिकारी हैं। उन्होंने 28 जनवरी 2025 को महाराष्ट्र के सातवें राज्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था। इससे ठीक पहले वह राज्य सरकार में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनका कार्यकाल ऐसे समय शुरू हुआ, जब महाराष्ट्र में अब तक का सबसे बड़ा शहरी चुनावी अभ्यास होना था। इन चुनावों में 29 नगर निगमों में करीब 3.48 करोड़ मतदाताओं ने मतदान किया।
Dinesh Waghmare Education Dgree: शैक्षणिक रूप से वाघमारे का प्रोफाइल काफी मजबूत माना जाता है। उन्होंने नागपुर के विश्वेश्वरैया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में बीटेक किया है। इसके बाद आईआईटी खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस में एमटेक और यूनाइटेड किंगडम की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रैडफोर्ड से डेवलपमेंट प्रोजेक्ट प्लानिंग में एमएससी की डिग्री हासिल की।
▶️ दिनेश वाघमारे का प्रशासनिक करियर और अहम जिम्मेदारियां (Dinesh Waghmare career)
अपने लंबे प्रशासनिक करियर में दिनेश वाघमारे ने महाराष्ट्र सरकार में कई अहम पद संभाले। वह गृह, ऊर्जा और सामाजिक न्याय विभाग के प्रमुख सचिव रह चुके हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर भी रहे।
शहरी प्रशासन में भी उनका अनुभव खासा लंबा रहा है। वह पिंपरी चिंचवड़ और नवी मुंबई के नगर आयुक्त रह चुके हैं। इसके अलावा अमरावती के संभागीय आयुक्त, बुलढाणा के कलेक्टर, कई जिलों में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और नागपुर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन जैसे पदों पर भी काम कर चुके हैं।

▶️ दिनेश वाघमारे पहले भी रह चुके हैं विवादों में (Dinesh Waghmare Controversy)
राज्य चुनाव आयुक्त बनने से पहले भी दिनेश वाघमारे का नाम एक राजनीतिक विवाद में आ चुका है। वर्ष 2017 में जब वह सामाजिक न्याय विभाग के सचिव थे, तब उनके बेटे को सरकारी फंड से मिलने वाली विदेशी छात्रवृत्ति के तहत अमेरिका की पेनसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप मिली थी। यह योजना अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए थी।
विपक्षी दलों ने इसे हितों के टकराव का मामला बताते हुए सवाल उठाए। हालांकि वाघमारे ने सफाई दी थी कि आय सीमा से जुड़ा नियम पहले ही शिथिल किया जा चुका था और दुनिया की टॉप रैंकिंग यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने वाले छात्रों को आय सीमा से छूट दी गई थी। इस मामले में कोई आधिकारिक कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन यह प्रकरण राजनीतिक बहस का विषय जरूर बना।
▶️ नगर निगम चुनाव और नए विवाद
राज्य चुनाव आयुक्त के तौर पर इस बार वाघमारे को कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। विपक्षी दलों और मतदाता संगठनों का आरोप है कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद कई फैसलों ने संदेह पैदा किया।
इनमें उम्मीदवारों के हलफनामे अपलोड करने में देरी, आखिरी 48 घंटों में घर घर जाकर प्रचार की अनुमति, मुंबई में मतगणना के दौरान पीएडीयू यानी प्रिंटिंग ऑक्जिलियरी डिस्प्ले यूनिट मशीनों का इस्तेमाल, चरणबद्ध मतगणना, निर्विरोध जीत और आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों का निपटारा जैसे मुद्दे शामिल हैं।
▶️ मतदान के दिन की अव्यवस्थाएं और स्याही विवाद
मतदान के दिन कई जगह अव्यवस्थाओं की शिकायतें सामने आईं। सबसे बड़ा विवाद अमिट स्याही को लेकर हुआ। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो वायरल हुए, जिनमें दावा किया गया कि मतदान के बाद उंगली पर लगाई गई स्याही आसानी से मिटाई जा सकती है।
दिनेश वाघमारे ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यही स्याही वर्षों से इस्तेमाल की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह स्याही 10 से 12 सेकंड में सूख जाती है और तब तक मतदाता पोलिंग बूथ के अंदर ही रहता है। उनके मुताबिक, सूखने के बाद स्याही हटाई नहीं जा सकती और यही स्याही भारत निर्वाचन आयोग भी इस्तेमाल करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई मतदाता जानबूझकर स्याही मिटाने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है। साथ ही, डबल वोटिंग की स्थिति में संबंधित मतदान अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी। वाघमारे ने सोशल मीडिया पर फैल रही कथित अफवाहों की जांच और गलत जानकारी फैलाने वालों पर कार्रवाई की बात भी कही।
▶️ क्यों बढ़ रहा है दबाव
इन तमाम घटनाओं के बाद दिनेश वाघमारे का कार्यकाल राजनीतिक और प्रशासनिक जांच के दायरे में आ गया है। विपक्ष का कहना है कि इतने बड़े चुनाव में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठना लोकतंत्र के लिए गंभीर संकेत है। वहीं राज्य चुनाव आयोग अपनी प्रक्रियाओं को सही ठहराते हुए आरोपों को सिरे से नकार रहा है।
अब देखना यह होगा कि यह विवाद महज राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है या फिर दिनेश वाघमारे की भूमिका को लेकर कोई ठोस जांच और कार्रवाई होती है। फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में उनका नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है और हर फैसला बारीकी से परखा जा रहा है।
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