कौन हैं आरती साठे? भाजपा की पूर्व प्रवक्ता को बॉम्बे हाई कोर्ट जज नियुक्त किए जाने पर मचा बवाल
Aarti Sathe Bombay High Court Judge: बॉम्बे हाई कोर्ट में आरती साठे की न्यायाधीस पद नियुक्ति को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में घमासान मच गया है। साठे पर महाराष्ट्र बीजेपी की आधिकारिक प्रवक्ता होने के आरोप लगने के बाद यह विवाद और गहरा गया है। विपक्ष ने इस नियुक्ति पर नाराजगी जताते हुए उनकी निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उन्हें पद से हटाने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा बॉम्बे हाई कोर्ट में न्यायाधीश पद के लिए अधिवक्ता आरती अरुण साठे के नाम की सिफारिश करने पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने इस सिफारिश का कड़ा विरोध किया है और उन्होंने इस नियुक्ति को लोकतंत्र पर बड़ा आघात बताया।

कांग्रेस बोलीं- 'न्यायिक अखंडता के लिए मौत'
कांग्रेस की सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की अध्यक्ष सुप्रिया श्रीनेत ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए इसे "न्यायिक अखंडता के लिए मौत" करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि आरती अरुण साठे महाराष्ट्र बीजेपी इकाई की आधिकारिक प्रवक्ता रही हैं।
TMC बोलीं- तो न्यायिक अखंडता का क्या होगा।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने कहा, "जब जज का पद कानूनी कौशल के बजाय पार्टी के प्रति निष्ठा का पुरस्कार बन जाए, तो न्यायिक अखंडता का क्या होगा। उन्होंने इसे ऐसा चलन बताया, जहाँ संविधान के प्रति निष्ठा से ज़्यादा बीजेपी के प्रति निष्ठा को महत्व दिया जा रहा है।"
NCP (SP) बोलीं- न्यायपालिका राजनीतिक अखाड़े में नहीं बदल जाएगी?
वहीं रोहित पवार ने कहा, सार्वजनिक मंच से सत्तारूढ़ दल का पक्ष रखने वाले व्यक्ति की हाई कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा आघात है। ये भारतीय न्यायिक प्रणाली की निष्पक्षता पर दूरगामी परिणाम डालेगा।" रोहित पवार ने कहा "क्या केवल जज बनने की योग्यता रखने और राजनीतिक रूप से संबद्ध व्यक्तियों को सीधे न्यायाधीश नियुक्त करने से न्यायपालिका राजनीतिक अखाड़े में नहीं बदल जाएगी? उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर जोर देते हुए इस सिफारिश पर पुनर्विचार करने की मांग की।
SC ने आरती साठे समेत तीन अधिवक्ताओं के नाम प्रस्तावित किए थे
बता दें, 28 जुलाई को, मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट के तीन-सदस्यीय कॉलेजियम ने बॉम्बे हाई कोर्ट सहित छह विभिन्न हाई कोर्टों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कई अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों के नाम प्रस्तावित किए थे। बॉम्बे हाई कोर्ट के लिए, कॉलेजियम ने तीन अधिवक्ताओं के नाम शामिल थे जिसमें आरती अरुण साठे, अजीत भगवानराव कडेथांकर, और सुशील मनोहर घोडेश्वर-के नाम की सिफारिश की थी।
यह संविधान को नष्ट करने का प्रयास नहीं है?
आरती अरुण साठे की नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए रोहित पवार ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर महाराष्ट्र भाजपा के लेटरहेड पर आरती साठे की महाराष्ट्र भाजपा प्रवक्ता के रूप में नियुक्ति का एक स्क्रीनशॉट पोस्ट किया। पवार ने कहा, "शक्तियों के पृथक्करण का सिद्धांत संविधान में निहित है ताकि सत्ता का केंद्रीकरण न हो और नियंत्रण व संतुलन बना रहे। रोहित पवार ने सवाल किया यदि किसी हाई कोर्ट जज की राजनीतिक पृष्ठभूमि हो, तो न्याय प्रक्रिया के राजनीतिक पूर्वाग्रह से मुक्त रहने की गारंटी कौन दे सकता है?
आरती साठे की नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की मांग की
रोहित पवार ने कहा कि उन्हें नियुक्त व्यक्ति की योग्यता पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन ऐसी नियुक्ति आम नागरिकों की इस भावना पर चोट पहुंचाती है कि 'न्याय बिना किसी पक्षपात' के किया जाता है। उन्होंने सरकार से आरती साठे की बॉम्बे हाईकोर्ट की जज के रूप में नियुक्ति पर पुनर्विचार करने और चीफ जस्टिस से मार्गदर्शन करने का आग्रह किया।
कौन हैं आरती साठे?
आरती अरुण साठे बॉम्बे हाई कोर्ट में एक जानी-मानी अधिवक्ता हैं। वह पहले मुंबई भाजपा विधि प्रकोष्ठ की प्रमुख थीं और फरवरी 2023 में उन्हें महाराष्ट्र भाजपा का प्रवक्ता नियुक्त किया गया था। हालांकि, उन्होंने जनवरी 2024 में व्यक्तिगत और व्यावसायिक कारणों का हवाला देते हुए इस पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद, 6 जनवरी, 2024 को उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और मुंबई भाजपा विधि प्रकोष्ठ के प्रमुख पद से भी त्यागपत्र दे दिया।
आरती साठ के RSS से है गहरा नाता
साठे के पास 20 से अधिक वर्षों का वकालत का अनुभव है, और वह मुख्य रूप से प्रत्यक्ष कर मामलों, सेबी, प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (एसएटी), और सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (सीईएसटीएटी) से संबंधित मामलों में विशेषज्ञ हैं। उनके पिता, अरुण साठे भी एक प्रसिद्ध वकील हैं और उनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) तथा भाजपा से गहरा जुड़ाव रहा है। वह भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी रह चुके हैं।
भाजपा ने क्या कहा?
महाराष्ट्र भाजपा ने इन आरोपों को निराधार बताया है। राज्य भाजपा मीडिया प्रकोष्ठ के प्रभारी नवनाथ बान ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में बताया, "आरती साठे कुछ साल पहले ही भाजपा प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे चुकी थीं। उनका पार्टी से अब कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में उनकी योग्यता पर सवाल उठाने का कोई कारण नहीं है।" भाजपा का कहना है कि यह सिफारिश पूरी तरह से निर्धारित प्रक्रिया के तहत योग्यता के आधार पर की गई है।
-
Madhya Pradesh: इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ सिंधिया का फ्री मेगा मेडिकल कैंप, गांवों में फ्री इलाज -
Gold Rate Today: सोने में भारी गिरावट, रिकॉर्ड हाई से 50,000 सस्ती! अब आपके शहर में ये है 22k और 18K कीमत -
PM Modi Meeting: 'Lockdown की अफवाहों पर लगाम', PM की मुख्यमंत्रियों संग ढाई घंटे चली बैठक, दिए 8 मैसेज-List -
'Monalisa झूठी है', महाकुंभ वायरल गर्ल की मां का बड़ा दावा, पिता जय सिंह ने सबके सामने रखा बेटी का ऐसा सच -
Gold Silver Price Today: सोना चांदी धड़ाम, सिल्वर 15,000 और गोल्ड 4000 रुपये सस्ता, अब इतनी रह गई कीमत -
Khamenei Last Photo: मौत से चंद मिनट पहले क्या कर रहे थे खामनेई? मिसाइल अटैक से पहले की तस्वीर आई सामने -
38 साल की फेमस एक्ट्रेस को नहीं मिल रहा काम, बेच रहीं 'ऐसी' Photos-Videos, Ex-विधायक की बेटी का हुआ ऐसा हाल -
Monalisa Caste: मुस्लिम मर्द से शादी करने वाली मोनालिसा की क्या है जाति? क्या कर लिया धर्म परिवर्तन? -
IPL 2026 की ओपनिंग सेरेमनी रद्द, BCCI ने अचानक ले लिया बड़ा फैसला, मैच पर भी मंडराए संकट के बादल? -
Iran US War: ईरान ने खाक किए अमेरिकी बेस, बताया अब किसकी बारी? खौफनाक दावे से मचा हड़कंप -
Petrol Diesel Price Hike: पेट्रोल ₹5.30 और डीजल ₹3 महंगा, ईरान जंग के बीच इस कंपनी ने बढ़ाई कीमतें, ये है रेट -
Energy Lockdown: एनर्जी लॉकडाउन क्या है? कब लगाया जाता है? आम पब्लिक पर कितना असर? हर सवाल का जवाब












Click it and Unblock the Notifications