Maratha Aarakshan पर क्या लगी मुहर? जरांगे की जीत या महाराष्ट्र सरकार का मास्टरस्ट्रोक? CM फडणवीस ने किया साफ

Maratha Aarakshan Manoj Jarange Patil: मुंबई के आजाद मैदान में मराठा आरक्षण की गूंज ने पूरे महाराष्ट्र को हिला दिया। मनोज जरांगे पाटिल की अगुवाई में लाखों मराठाओं का आंदोलन आखिरकार रंग लाया। 2 सितंबर 2025 को महाराष्ट्र सरकार ने 'हैदराबाद गजट' को लागू करने का ऐलान किया, जिसके तहत मराठवाड़ा के मराठाओं को कुणबी जाति का दर्जा मिलेगा।

इससे मराठा समुदाय को OBC कोटे में आरक्षण का रास्ता साफ हो गया। लेकिन सवाल ये है-क्या ये जरांगे की ऐतिहासिक जीत है, या CM देवेंद्र फडणवीस का सियासी मास्टरस्ट्रोक? आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं, जिसमें जरांगे की जिद, सरकार की रणनीति, और मराठा आरक्षण की पूरी कहानी छिपी है....

Manoj Jarange Patil

हैदराबाद गजट की जीत: मराठा आरक्षण का नया अध्याय

2 सितंबर 2025 को मुंबई के आजाद मैदान में मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल ने पांचवें दिन अपना आमरण अनशन तोड़ा। महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट उप-समिति, जिसके प्रमुख मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटिल हैं, ने जरांगे की छह मांगों को स्वीकार कर लिया। सबसे बड़ी मांग थी-'हैदराबाद गजट' को लागू करना, जिसके तहत मराठवाड़ा के मराठाओं को कुणबी जाति का प्रमाणपत्र मिलेगा। कुणबी पहले से ही OBC श्रेणी में शामिल है, और इस फैसले ने मराठा समुदाय के लिए शिक्षा और नौकरियों में 10% आरक्षण का रास्ता खोल दिया।

जरांगे ने मंच से ऐलान किया, 'हमारी लड़ाई जीत गई! सरकार ने हमारी मांगें मानीं। रात 9 बजे तक हम मुंबई खाली कर देंगे।' उनके समर्थकों ने गुलाल उड़ाकर और नारों के साथ इस जीत का जश्न मनाया। लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी-3 सितंबर की सुबह तक आजाद मैदान खाली करने की-ने भी जरांगे को तेजी से फैसला लेने पर मजबूर किया।

CM फडणवीस का बयान: संवैधानिक दायरे में समाधान

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मसले पर स्पष्टता लाते हुए कहा, 'मराठा आरक्षण को लेकर हमारी सरकार हमेशा सकारात्मक रही है। हैदराबाद गजट को लागू करने में हमें कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन आरक्षण समूह को नहीं, बल्कि व्यक्ति को मिलता है। इसके लिए ऐतिहासिक दस्तावेज और खून के रिश्तों के सबूत चाहिए। हैदराबाद गजट के आधार पर जिनके पूर्वजों का नाम कुणबी के तौर पर दर्ज है, उन्हें OBC प्रमाणपत्र मिलेगा। ये फैसला कोर्ट में टिकने वाला होगा, क्योंकि हमने संवैधानिक दायरे में काम किया है।'

फडणवीस ने ये भी जोड़ा, 'मराठवाड़ा के मराठा समुदाय को सबूत मिलने में दिक्कत थी। अब गजट के आधार पर उनके लिए रास्ता आसान होगा।' उन्होंने डिप्टी CM एकनाथ शिंदे और अजित पवार की भूमिका की तारीफ की और कहा कि सरकार ने विवाद को बढ़ने नहीं दिया। विपक्ष के तंज पर फडणवीस ने चुटकी ली, 'राजनीति में कभी गाली मिलती है, कभी माला। हमने सिर्फ अपना कर्तव्य निभाया।'

What Is Hyderabad Gazette-हैदराबाद गजट: क्या है ये?

'हैदराबाद गजट' मराठा आरक्षण आंदोलन का सबसे बड़ा हथियार रहा है। ये 1948 से पहले हैदराबाद रियासत (जो अब मराठवाड़ा का हिस्सा है) की एक सरकारी अधिसूचना है, जिसमें कुणबी जाति को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा माना गया था। मराठा आंदोलनकारी दावा करते हैं कि मराठा और कुणबी एक ही हैं, इसलिए मराठाओं को OBC श्रेणी में शामिल किया जाए। इस गजट के साथ-साथ सातारा और बंबई गजट भी मराठा समुदाय के लिए ऐतिहासिक सबूत के तौर पर पेश किए जाते हैं।

फडणवीस सरकार ने इस गजट को लागू करने का वादा किया, जिसके तहत मराठवाड़ा के मराठाओं को उनके पूर्वजों के रिकॉर्ड के आधार पर कुणबी प्रमाणपत्र जारी होंगे। ये प्रमाणपत्र उन्हें OBC कोटे के तहत आरक्षण का हकदार बनाएंगे।

Manoj Jarange Patil Demands- जरांगे की पांच प्रमुख मांगें और सरकार का जवाब

मनोज जरांगे ने सरकार के सामने पांच अहम मांगें रखी थीं, जिन्हें 2 सितंबर को स्वीकार कर लिया गया:-

  • मराठा समुदाय को OBC श्रेणी में आरक्षण: हैदराबाद गजट के आधार पर कुणबी प्रमाणपत्र जारी होंगे।
  • सगेसोयरे (सगे-संबंधी) नोटिफिकेशन लागू करना: खून के रिश्तों के आधार पर प्रमाणपत्र देने की प्रक्रिया शुरू।
  • प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले वापस लेना: सरकार ने आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज केस वापस लेने का वादा किया।
  • शिंदे समिति का विस्तार: मराठा आरक्षण के लिए बनी समिति को पूरे महाराष्ट्र में रिकॉर्ड खोजने का जिम्मा।
  • हैदराबाद गजट लागू करना: इसकी अधिसूचना जारी, मराठवाड़ा के मराठाओं को फायदा।

जरांगे ने ये भी मांग की थी कि आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई करने वालों पर कार्रवाई हो और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। सरकार ने इन मांगों पर भी सहमति जताई।

Maratha Aarakshan Roots-मराठा आरक्षण की जड़: क्यों उठा ये आंदोलन?

महाराष्ट्र में मराठा समुदाय की आबादी करीब 33% यानी 4 करोड़ है। इनमें से 90-95% भूमिहीन किसान हैं, और किसानों की आत्महत्याओं में 90% मराठा समुदाय से हैं। 1997 में मराठा संघ ने पहली बार सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग उठाई थी। उनका तर्क है कि मराठा मूल रूप से कुणबी (किसान) समुदाय से हैं, जो OBC श्रेणी में आता है। 2014 में कोपर्डी कांड ने इस मांग को और हवा दी, और मनोज जरांगे इस आंदोलन के चेहरा बन गए।

2021 में सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण को रद्द कर दिया, जिसके बाद जरांगे ने जालना के पिंपलगांव में 90 दिनों तक आंदोलन किया। 2023 में अंतरवाली-सारथी में उनकी भूख हड़ताल और पुलिस लाठीचार्ज ने आंदोलन को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया। 2024 में जालना से मुंबई तक विशाल मार्च और 2025 में आजाद मैदान में अनशन ने सरकार को झुकने पर मजबूर किया।

जरांगे की जीत या फडणवीस का दांव?

मनोज जरांगे की जीत निस्संदेह ऐतिहासिक है। उनके पांच साल के अथक संघर्ष, नौ भूख हड़तालों, और लाखों समर्थकों के दम पर मराठा समुदाय को कुणबी दर्जा मिला। लेकिन फडणवीस सरकार का ये फैसला भी सियासी मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। फडणवीस ने संवैधानिक दायरे में रहकर मांगें मानीं, जिससे कोर्ट में फैसला टिक सके। साथ ही, उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए साबित किया कि उनकी सरकार मराठा समुदाय के साथ है।

हालांकि, OBC नेताओं जैसे छगन भुजबल और चंद्रशेखर बावनकुले ने चेतावनी दी कि OBC कोटे से मराठाओं को आरक्षण देना 353 अन्य जातियों के लिए अन्याय होगा। इससे भविष्य में तनाव की आशंका बनी हुई है।

Maratha Reservation Formula-महाराष्ट्र में आरक्षण का गणित

महाराष्ट्र में आरक्षण का बंटवारा इस प्रकार है: -

  • - OBC: 19%
  • - SC/SC-बौद्ध: 13%
  • - EWS: 10%
  • - SEBC: 10%
  • - ST: 7%
  • - NT-C: 3.5%
  • - VJNT-A: 3%
  • - NT-D: 2%

जनरल कैटेगरी को कोई आरक्षण नहीं मिलता। मराठा समुदाय अब OBC कोटे के तहत 10% आरक्षण की मांग कर रहा है, जो मौजूदा व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

जरांगे का संघर्ष: एक योद्धा की कहानी

43 साल के मनोज जरांगे पाटिल ने अपनी सादगी और जिद से मराठा समुदाय को एकजुट किया। 2023 में अंतरवाली-सारथी में पुलिस लाठीचार्ज के बाद उनकी लोकप्रियता आसमान छूने लगी। 2024 में मुंबई मार्च और 2025 में आजाद मैदान में उनकी भूख हड़ताल ने सरकार को घुटनों पर ला दिया। उन्होंने कहा, 'मैं मर जाऊंगा, लेकिन बिना आरक्षण मुंबई नहीं छोड़ूंगा।' उनकी इस जिद ने उन्हें मराठा समुदाय का 'शिवाजी' बना दिया।

मनोज जरांगे पाटिल की जिद और फडणवीस की रणनीति ने मराठा आरक्षण को एक नया मोड़ दिया है। ये जीत मराठा समुदाय के लिए सामाजिक न्याय की दिशा में एक कदम है, लेकिन क्या ये स्थायी समाधान है, या सियासी दांव? इसका जवाब वक्त देगा। फिलहाल, आजाद मैदान से उठी मराठा हुंकार ने इतिहास रच दिया है।

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