Maharashtra Politics: भाजपा-शिवसेना के सीट शेयरिंग फॉर्मूले से क्यों खुश होंगे उद्धव ठाकरे ?

महाराष्ट्र में पिछले दिनों सीटों के तालमेल को लेकर सत्ताधारी खेमे में मतभेद उभरता दिखा है। हालांकि, इसपर तुरंत दोनों ओर से डैमेज कंट्रोल किया गया है। लेकिन, उद्धव खेमे के लिए इसमें तत्कालिक खुशी की बात है।

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महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ताधारी बीजेपी-शिवसेना गठबंधन में सबकुछ सामान्य नहीं चल रहा है। वहां जो पिछले विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक हालात बने हैं, उसके बाद बीजेपी आगे के लिए अपनी नई रणनीति तैयार कर रही है। वह चाहती है कि उसे इतनी सीटें अपने दम पर ही मिल जाए कि किसी के भरोसे न रहना पड़े। शायद, इसी वजह से दोनों सत्ताधारी दलों में थोड़ा सा मतभेद भी देखने को मिल गया है। लेकिन, शिवसेना के विरोधी उद्धव ठाकरे गुट के लिए इससे बेहतर बात नहीं हो सकती। क्योंकि, बीजेपी और शिवसेना के बीच हाल में सीटों पर तालमेल को लेकर जो मुद्दा उठा है, उसमें उद्धव गुट को अपनी भलाई दिख रही होगी।

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बीजेपी-शिवसेना में क्यों शुरू हुआ मतभेद ?
महाराष्ट्र में अभी भाजपा और शिवसेना गठबंधन की सरकार को एक साल भी नहीं हुए हैं, लेकिन अगले साल होने वाले चुनावों को लेकर मतभेद देखने को मिल गए हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार फिलहाल पटरी पर है, लेकिन उनके दलों के बीच में चुनावों के लिए सीट शेयरिंग फॉर्मूले को लेकर जरूर विवाद पैदा हुआ है। पिछले हफ्ते प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले का एक बयान आया कि उनकी पार्टी 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में अकेले 240 सीटों पर लड़ेगी। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी की एक आंतरिक बैठक में उन्होंने कहा था, 'हम 248-250 सीटों पर लड़ेंगे। शिंदे खेमे के पास 48 या 50 से अधिक एमएलए नहीं हैं, जो चुनाव लड़ें।'

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शिवसेना ने तत्काल नाराजगी जताई
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बावनकुले का यह बयान सोशल मीडिया पर तुरंत चलने लगा। इस वजह से शिवसेना विधायक संजय शिरसाट ने तत्काल प्रतिक्रिया दी कि 'क्या बकवास है, क्या हम बेवकूफ हैं कि इतनी कम सीटों पर मानेंगे?' पार्टी के एक और विधायक संजय गायकवाड़ ने तो साफ ऐलान कर दिया कि पार्टी इतनी कम सीटों पर कभी राजी नहीं होगी। उन्होंने कहा, 'शिवसेना 130 से 135 सीटों से कम पर तैयार नहीं होगी। बीजेपी को याद रखना चाहिए कि उनका गठबंधन बाल ठाकरे द्वारा गठित असली शिवसेना के साथ है।'

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    क्यों खुश होंगे उद्धव ठाकरे ?
    2019 के विधानसभा चुनावों के बाद उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली तत्कालीन शिवसेना ने जब भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन तोड़ा तो उनकी ओर से यही आरोप लगाए गए थे कि वह उनकी पार्टी को खत्म करना चाहती है। अब बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष की ओर से जो बयान निकला है, उससे पार्टी समर्थकों तक उनके लिए यह बात पहुंचाना आसान होगा कि उन्होंने बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़कर कुछ भी गलत नहीं किया था। क्योंकि, वह तो बाल ठाकरे की शिवसेना को खत्म करना चाहती है। क्योंकि, 2019 के विधानसभा चुनावों में भाजपा और शिवसेना के बीच जो सीटों का समझौता हुआ था, उसमें बीजेपी 164 और शिवसेना 126 सीटों पर लड़ी थी। यही वजह है कि शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना अभी भी लगभग उतनी ही सीटों पर दावा कर रही है।

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    फिलहाल दोनों ओर से हुआ है डैमेज कंट्रोल
    हालांकि, बीजेपी और शिवेसना दोनों खेमों को अभी से इस तरह के मतभेद उभरने के परिणाम का अंदाजा हो चुका है। इसलिए दोनों ओर से तत्काल ही डैमेज कंट्रोल की भी कोशिश शुरू कर दी गई। बावनकुले ने बिना देर किए कहा कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया है और बीजेपी-शिवसेना के बीच अभी तक सीटों का कोई फॉर्मूला तय नहीं हुआ है। शिवसेना ने भी इसे ज्यादा तूल नहीं दिया और पार्टी के प्रवक्ता नरेश म्हस्के ने कहा कि 'हमारे बीच कोई लड़ाई नहीं है।' ऐसे में सवाल है कि बावनकुले जैसे मंजे हुए नेता क्या गलती से इस तरह का बयान दे सकते हैं, इसके बारे में बीजेपी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि 'बीजेपी ने शिवसेना को समर्थन दिया है, इसका मतलब ये नहीं है कि वह अपने संगठन का विस्तार नहीं करेगी। पार्टी कार्यकर्ताओं को चुनावी मोड में तैयार रखने के लिए ऐसा संदेश देना जरूरी था कि पार्टी अपने दम पर बहुमत लाने के लिए तैयार रहे।'

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    उद्धव को भी करना होगा सच का सामना!
    वैसे बीजेपी नेता का कथित बयान भले ही उद्धव ठाकरे खेमे का जोश बढ़ाने वाला रहा हो, लेकिन तथ्य ये है कि महा विकास अघाड़ी में शिवसेना (उद्धव बाल ठाकरे) के लिए भी मामला इतना आसान नहीं होने वाला है। पिछले चुनाव में राज्य में कांग्रेस 147 और एनसीपी 121 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। ऐसे में उद्धव के लिए एमवीए के सामने 126 सीटों पर दावा ठोकना भी बहुत मुश्किल होने वाला है। जबकि, उनके 56 विधायकों में से ज्यादातर विधायक असली शिवसेना के साथ रह गए हैं।

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