महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की दहाड़- वक्फ बोर्ड हो या कोई मंदिर की संपत्ति, मैं किसी को छूने नहीं दूंगा
Maharashtra Assembly Election 2024: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को बड़ा बयान दिया है। महाराष्ट्र के पूर्व सीएम ठाकरे ने एक साथ हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के वोटरों को साधा है। इसके साथ ही विधानसभा चुनाव में महा विकास अघाड़ी की ओर से मुख्यमंत्री उम्मीदवार का चेहरा कौन होगा, इसको लेकर अपना रुख साफ कर दिया है।
उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को एक प्रेस कान्फ्रेंस की और कहा मैं ये ऐलान करता हूं कि चाहे वक्फ बोर्ड हो या कोई अन्य मंदिर या अन्य धर्म की धार्मिक संपत्ति, मैं मैं किसी को भी उन संपत्तियों को किसी भी कीमत पर छूने नहीं दूंगा। यह मेरा वादा है।

उद्धव ठाकरे ने कहा "कहां ये सिर्फ वक्फ बोर्ड का सवाल नहीं है। ये हमारे मंदिरों का भी मामला है, क्योंकि शंकराचार्य कहते हैं कि केदारनाथ से 200 किलो सोना चोरी हुआ था।"
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने आगामी राज्य चुनावों में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के लिए मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में कांग्रेस और एनसीपी (एसपी) द्वारा प्रस्तावित किसी भी उम्मीदवार का समर्थन करने की बात करते हुए इस बात पर उन्होंने जोर दिया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव राज्य के स्वाभिमान को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा, "महा विकास अघाड़ी का सीएम चेहरा तय हो, मैं इसका समर्थन करूंगा। कांग्रेस, एनसीपी-एससीपी अपना सीएम चेहरा सुझाएं, मैं इसका समर्थन करूंगा क्योंकि हमें महाराष्ट्र की बेहतरी के लिए काम करना है और मैं इन '50 खोखाओं' और 'गद्दारों' को जवाब देना चाहता हूं कि लोग हमें चाहते हैं, आपको नहीं।"
भाजपा के साथ गठबंधन बनाने के अपने पिछले अनुभव से सीख लेते हुए, उद्धव ने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार पहले ही तय कर लिया जाना चाहिए। उन्होंने उस सिद्धांत का पालन करने के खिलाफ तर्क दिया, जिसमें सबसे अधिक सीटें पाने वाली पार्टी को मुख्यमंत्री पद मिलता है।
उन्होंने कहा "भाजपा के साथ गठबंधन के हमारे अनुभव के बाद, हमारा विचार है कि हमें गठबंधन में सबसे अधिक विधायकों वाली पार्टी को मुख्यमंत्री पद देने की नीति का पालन नहीं करना चाहिए।"
उद्धव ठाकरे ने कहा "बीते कई चुनावों में, बीजेपी के साथ गठबंधन में, हमने अनुभव किया है कि ज़्यादा से ज़्यादा विधायक बनाने के लिए, पार्टियाँ खुद ही अपने दूसरे सहयोगियों के उम्मीदवारों को हराने की कोशिश करती हैं। इसलिए मैं इस बात के पक्ष में नहीं हूं कि सबसे ज़्यादा विधायक वाली पार्टी को सीएम पद मिलना चाहिए।"












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