अजित पवार की मौत पर भावुक सुप्रिया सुले ने लिखा ये शब्द, क्या इसी बहन के कारण चाचा शरद पवार से दूर हुए थे?
Ajit Pawar plane crash death: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की 28 जनवरी को भीषण विमान दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई है। एनसीपी के मुखिया अजित पवार छोटे से प्लेन पर सवार होकर बारामती के लिए बुधवार की सुबह ही निकले थे और नौ बजे से पहले बारामती में लैंडिंग के समय प्लेन क्रैश हो गया और देखते ही देखते आग के गोले में तब्दील हो गया।
इस हादसे में डिप्टी सीएम अजित पवार का शव बुरी तरह झुलस गया। दिवंगत नेता का अंतिम संस्कार गुरुवार को शहर के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में संपन्न होगा। अजित पवार की मौत की खबर पर उनकी सांसद पत्नी सुनेत्रा दोनों बेटों समेत पूरा पवार परिवार गहरे सदमें में हैं।अजित पवार की मौत की खबर सुनकर उनकी चचेरी बहन और एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले स्तब्ध हैं।

सुले ने अजित पवार के निधन पर गहरा दुख और पीड़ा व्यक्त करते हुए जो पोस्ट में जो शब्द लिखे हैं, उससे उनके मन की व्यथा साफ पता चल रही है। बहन सुप्रिया सुले ने अपने ने व्हाट्सएप पर केवल एक शब्द "स्तब्ध" (Devastated) लिखकर अपनी भावनाओं को व्यक्त किया।
भाई अजित पवार का शव देख रोने लगी बहन सुप्रिया सुले
इस हृदय विदारक घटना के कुछ घंटों बाद, अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार और सुप्रिया सुले बारामती अस्पताल पहुंचीं। दोनों को वहां रोते हुए देखा गया। उनके बेटे पार्थ पवार भी घटनास्थल पर मौजूद थे। शरद पवार भी उसी शहर पहुंचे जहां अजित पवार का पार्थिव शरीर रखा गया है।

सुप्रिया सुले और अजित पवार की बॉन्डिंग कैसी थी?
सुप्रिया सुले और अजित पवार चचेरे भाई-बहन हैं और लंबे समय तक दोनों के रिश्ते सामान्य और सौहार्दपूर्ण रहे। लेकिन 2019 के घटनाक्रम ने इस रिश्ते पर भी असर डाला। अजित पवार के कदम के बाद सुप्रिया सुले ने खुलकर कहा कि पार्टी ही नहीं, परिवार भी दो हिस्सों में बंट गया है। उन्होंने सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप स्टेटस के ज़रिए अपना दर्द जाहिर किया। हालांकि सुप्रिया सुले यह भी कहती रहीं कि निजी रिश्ते अपनी जगह हैं और राजनीति अपनी, और भाई के लिए सम्मान हमेशा बना रहेगा। हाल ही में सुप्रिया सुले ने अजित पवार के बेटे की शादी में शिरकत की थी और दूरियां होने के बावजूद रक्षाबंधन पर अजित पवार को राखी बांधती थीं।
अजित पवार ने 2019 में NCP में क्यों की थी बगावत?
2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की राजनीति पूरी तरह उलझ गई थी। सरकार बनाने को लेकर जब असमंजस बढ़ा, तभी एनसीपी के कद्दावर नेता अजित पवार ने अचानक बड़ा कदम उठा लिया। उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर बीजेपी-शिवसेना के साथ हाथ मिला लिया और खुद उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। यह फैसला एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले की रणनीति से बिल्कुल उलट था। पार्टी नेतृत्व को विश्वास में लिए बिना उठाए गए इस कदम को ही एनसीपी के अंदर "बगावत" के तौर पर देखा गया।
क्या बहन सुप्रिया सुले के कारण चाचा शरद पवार से दूर हुए थे?
महाराष्ट्र में अक्सर यह चर्चा होती है कि शरद पवार का मजबूत बाजू बनकर एनसीपी की कमान संभानले वाले अजित पवार, बहन सुप्रिया सुले को पार्टी की कमान दिए जाने से नाराज़ थे और अपने लिए बेहतर राजनीतिक अवसर तलाश रहे थे। हालांकि 2019 का विवाद किसी आधिकारिक नेतृत्व परिवर्तन से के बाद नहीं हुआ, असल टकराव सरकार बनाने और राजनीतिक गठबंधन को लेकर था। अजित पवार का मानना था कि सत्ता में जाने का मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहिए, जबकि शरद पवार और सुप्रिया सुले बीजेपी से दूरी बनाए रखने के पक्ष में थे।
अजित पवार की बगावत पर परिवार का क्या था रिएक्शन?
शरद पवार ने साफ कहा कि अजित पवार का फैसला उनका निजी निर्णय था, पार्टी का नहीं। उन्होंने इस कदम से खुद को और एनसीपी को अलग रखा। सुप्रिया सुले ने भावुक प्रतिक्रिया देते हुए परिवार में टूटन की बात कही। बाद के दिनों में एनसीपी भी साफ तौर पर दो गुटों में बंटी नजर आई - एक गुट शरद पवार-सुप्रिया सुले के साथ रहा, जबकि दूसरा अजित पवार के नेतृत्व में अलग राजनीतिक राह पर निकल पड़ा।
राजनीति ने रिश्तों पर डाला असर
2019 की यह सियासी उठापटक सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं थी, बल्कि इसने महाराश्ष्ट्र के सबसे कद्दावर राजनीतिक पवार परिवार के अंदरूनी रिश्तों को भी प्रभावित किया। सत्ता, गठबंधन और नेतृत्व को लेकर लिए गए फैसलों ने यह दिखा दिया कि जब राजनीति हावी होती है, तो पारिवारिक रिश्तों में तनाव आना लगभग तय हो जाता है।
निकाय चुनाव में चाचा-भतीजे की पार्टी ने साथ लड़ा था चुनाव
हालांकि हाल ही में संपन्न हुए निकाय चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने पुणे और पिंपरी चिंचवड़ में हुए नगर निगम चुनावों में अपने चाचा शरद पवार की NCP (SP) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। अजित पवार आज हादसे पहले 5 फरवरी को होने वाले जिला परिषद चुनावों के प्रचार अभियान के तहत मुंबई से बारामती जा रहे थे।
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