Navneet Rana: नवनीत राणा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, कास्ट सर्टिफिकेट ठहराया सही, बॉम्बे HC का फैसला पलटा
Navneet Rana Caste Certificate Case: अमरावती से मौजूदा सांसद और भाजपा उम्मीदवार नवनीत राणा को जाति प्रमाण पत्र (कास्ट सर्टिफिकेट) मामले पर सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनके कास्ट सर्टिफिकेट को सही ठहराया है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में नवनीत राणा के इस मामले पर फैसला सुरक्षित रखा था। सांसद नवनीत राणा ने सुप्रीम कोर्ट में बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमे उनके कास्ट सर्टिफिकेट को फर्जी करार दिया गया था। जिसके बाद अब शीर्ष अदलात ने बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला पलट दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के जाति प्रमाण पत्र को बरकरार रखने फैसले के बाद सांसद नवनीत राणा ने कहा, "जिन्होंने मेरे जन्म पर सवाल उठाए थे, उन्हें आज जवाब मिल गया। मैं सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देती हूं। सच्चाई की हमेशा जीत होती है। यह बाबा साहेब अम्बेडकर और छत्रपति शिवाजी महाराज के दिखाए रास्ते पर चलने वालों की जीत है।"
सुप्रीम कोर्ट में फैसला सुरक्षित
इससे पहले जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस संजय करोल की बेंच ने नवनीत राणा की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। नवनीत महाराष्ट्र के अमरावती सीट से सांसद हैं, जो कि अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित थी।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने बताया था फर्जी
बता दें कि 8 जून, 2021 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा था कि नवनीत राणा ने 'मोची' जाति का सर्टिफिकेट फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके धोखाधड़ी से प्राप्त किया गया था। इसी के साथ अमरावती सांसद पर अदालत ने 2 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था। साथ ही कहा गया था कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि वह 'सिख-चमार' जाति से थीं।
बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को नवनीत राणा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने 20 जून 2021 को हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी।
बता दें कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) समर्थित नवनीत राणा ने साल 2019 में अमरावती से जीत हासिल की और दावा किया कि वह 'मोची' जाति से हैं।
शिवसेना नेता ने की थी शिकायत
बता दें कि शिवसेना नेता आनंदराव अडसुल ने मुंबई जिला जाति प्रमाणपत्र जांच समिति में शिकायत दर्ज की थी, जिसने राणा के पक्ष में फैसला सुनाया और प्रमाणपत्र को मान्य किया। इसके बाद उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
जहां उन्होंने दलील दी थी कि राणा ने जाली और मनगढ़ंत दस्तावेजों का इस्तेमाल करके प्रमाणपत्र प्राप्त किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नवनीत राणा के पति रवि राणा, जो महाराष्ट्र विधान सभा के सदस्य थे, उनके प्रभाव का इस्तेमाल करके प्राप्त किया गया था।












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