NCP संभालने के बाद सुनेत्रा पवार का बड़ा एक्शन, प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, भुजबल समेत दिग्गज नेता यहां से आउट
NCP internal conflict: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार पार्टी की कमान संभलने के बाद बड़ा एक्शन लिया है। एनसीपी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को एक पत्र भेजा है। जिसमें NCP के अहम पद संभाल रहे वरिष्ठ नेताओं दिग्गज का नाम शामिल नहीं किया है।
दरअसल, अजित पवार के निधन के बाद सर्वसम्मति से अध्यक्ष बनीं सुनेत्रा पवार ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को 14 पदाधिकारियों की सूची भेजी, लेकिन इसमें प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल जैसे दिग्गजों का कोई स्पष्ट जिक्र नहीं था। इससे पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असमंजस और मतभेद सामने आए हैं।

अजित पवार के बाद बदला समीकरण
2023 के विभाजन के बाद अजित पवार पार्टी प्रमुख बने थे, लेकिन 28 जनवरी को एक विमान हादसे में उनके निधन के बाद नेतृत्व का संतुलन पूरी तरह बदल गया। 26 फरवरी को सुनेत्रा पवार को कमान सौंपी गई, मगर उनके नेतृत्व को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।
ECI को पत्र बना विवाद की जड़
सुनेत्रा पवार ने अपने पत्र में यह भी निर्देश दिया कि 28 जनवरी से 26 फरवरी के बीच पार्टी की ओर से भेजे गए किसी भी संचार को मान्य न माना जाए। इस कदम को पार्टी के अंदरूनी सत्ता संघर्ष और नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
'कमज़ोर नेतृत्व' की धारणा
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के कई अहम फैसले अब भी प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे नेताओं के हाथ में हैं। वहीं, सुनेत्रा पवार की सीमित सार्वजनिक सक्रियता-न प्रेस कॉन्फ्रेंस, न बयान-उनकी 'लो-प्रोफाइल' छवि को और मजबूत कर रही है।
NDA नेताओं से मुलाकात के संकेत
दिल्ली पहुंचीं सुनेत्रा पवार की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) नेताओं से संभावित मुलाकात ने सियासी हलचल तेज कर दी है। इसे भविष्य की रणनीति और गठबंधन राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
विलय पर बदला तटकरे का रुख
इस बीच, सुनील तटकरे ने बड़ा खुलासा करते हुए माना कि अजित पवार के जीवित रहते NCP के दोनों गुटों के बीच विलय पर बातचीत चल रही थी। उनके इस बयान ने पहले के इनकार पर सवाल खड़े कर दिए हैं और सियासी चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है।
शरद पवार गुट पर हमला
तटकरे ने शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अजित पवार के निधन के बाद जल्दबाजी में विलय की बात उठाई गई और सुनेत्रा पवार को समर्थन नहीं दिया गया।
शिंदे की प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विलय की चर्चा पहले से चल रही थी और अब तटकरे को पूरी सच्चाई सामने रखनी चाहिए।
अंदरूनी कलह या शक्ति प्रदर्शन?
ECI को भेजा गया पत्र सुनेत्रा पवार के लिए 'बोल्ड स्टेप' माना जा रहा है, लेकिन यह भी साफ है कि NCP के भीतर सत्ता का संघर्ष अभी खत्मनहीं हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी एकजुट होती है या दरारें और गहरी होती हैं।












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