रैली और कुंभ पर सुप्रीम कोर्ट समय रहते करता हस्तक्षेप, तो लोगों के तड़पकर मरने की नौबत ना आती: शिवसेना
मुंबई, 24 अप्रैल। शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' संपादकीय में कहा कि देश में कोरोना वायरस महामारी को लेकर स्थिति इतनी खराब नहीं हुई होती अगर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चुनावी रैलियों और हरिद्वार में कुंभ मेले पर समय से संज्ञान लिया होता। महाराष्ट्र में सत्तारुढ़ पार्टी की यह प्रतिक्रिया सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद आई है जिसमें न्यायालय ने केंद्र से ऑक्सीजन आपूर्ति एवं टीकाकरण संबंधी राष्ट्रीय योजना के बारे में जानकारी मांगी थी। गौरतलब है कि देशभर में कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने तांडव मचाया हुआ है।

शिवसेना ने 'सामना' में कहा, यह अच्छी बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच हस्तेक्षेप किया है। अगर समय रहते पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और अन्य नेताओं की चुनावी रैलियों और रोडशो के अलावा हरिद्वार में धार्मिक सभाओं पर हस्तक्षेप किया गया होता, तो लोगों इस तरह महामारी से तड़पकर मरने की नौबत नहीं आती।
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'भारत कोविड-19 का नरक बन गया है'
शिवसेना ने दिल्ली में एक अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के कारण कोरोना मरीजों की मौत का हवाला देते हुए शिवसेना ने पूछा कि वर्तमान स्थिति के लिए अगर केंद्र को नहीं तो किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए? शिवसेना ने कहा, राजधानी में यह स्थिति है, अगर केंद्र सरकार नहीं तो इस स्थिति के लिए कौन जिम्मेदार है? पार्टी ने अपने मुखपत्र में ब्रिटेन के उस समाचार पत्र के शीर्षक का भी जिक्र किया जिसमें कहा गया था कि 'भारत कोविड-19 का नरक बन गया है'। पार्टी ने आगे कहा, अगर केंद्र ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुदुचेरी में विधानसभा चुनावों के बजाय कोरोना वायरस की दूसरी लहर से निपटने पर ध्यान केंद्रित किया होता तो स्थिति इतनी भयावह नहीं होती। शिवसेना ने भंडारा, मुंबई, विरार और नासिक के अस्पतालों में हुई त्रासदियों में लोगों की मौत पर शोक व्यक्त किया।












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