Sharad Pawar resigns: अजित पवार कहीं न बन जाएं NCP का 'अतीत', राज ठाकरे वाली हिस्ट्री हो सकती है रिपीट!
शरद पवार ने एनसीपी अध्यक्ष पद से अचानक इस्तीफा देकर सबको हैरान कर दिया है। पवार के बाद अध्यक्ष पद की कुर्सी उनकी सांसद बेटी संभालती है तो अजित पवार का क्या होगा?

शरद पवार ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष पद से इस्तीफे का ऐलान करके सबको हैरान कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने भविष्य में किसी भी तरह का चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया है। महाराष्ट्र और केंद्र की राजनीति के धुरंधर नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार ने अचानक अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने से महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है।

एनसीपी प्रमुख शरद पवार अपना इस्तीफा वापस ले ये मांग करते हुए एनसीपी विधायक और कार्यकर्ता रो पड़े। वहीं शरद पवार के इस्तीफा देते ही उनका उत्तराधिकारी उनकी सांसद बेटी सुप्रिया सूले होंगी या अजीत पवार होंगे ? इसको लेकर सवाल उठने लगे हैं।
शरद पवार ने इस्तीफा देकर खेला है मास्टर स्ट्रोक
हालांकि शरद पवार ने इस्तीफा जिस चौंकाने वाले अंदाज में दिया वो अपने ऐसे ही तेवर के लिए जाने जाते हैं। पवार का ये इस्तीफा उनका मास्टर स्ट्रोक हो सकता है क्योंकि इन्होंने उस समय इस्तीफा दिया है जब उनके भतीजे अजित पवार की एनसीपी से बगावत करने की अटकलें तेज चल रही थीं। खबर थी कि अजित पवार को एनसीपी के 40 विधायकों को एनसीपी से तोड़कर भाजपा के साथ हाथ मिलाने वाले हैं।
अजित पवार की बढ़ा दी है चिंता
इसके साथ ही ये भी खबरें थीं कि एनसीपी में शरद पवार का पावर कम हो रहा है और अजित पवार का पावर बढ़ रहा है। ऐसे में राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले शरद पवार ने अपना इस्तीफा देकर मास्टर स्ट्रोक चला है। उन्होंने इस्तीफे देकर पार्टी को जहां टूटने से बचाते हुए अपने कद को और ऊंचा कर लिया है वहीं भतीजे अजित पवार को उनकी जगह क्या है ये बता दी है। इसके साथ ही शरद पवार ने अपने उत्तारधिकारी की घोषणा किए बगैर ही इस्तीफा देकर अजित पवार की चिंता भी बढ़ा दी है।
बगावती तेवर के बाद अजित पवार पर क्या पार्टी कर पाएगी विश्वास
हालांकि अजित पवार ने भाजपा के साथ हाथ मिलाने के कयासों को गलत बताया था और ये तक कहा था कि वो मरते दम तक एनसीपी नहीं छोड़ेगे, लेकिन 2019 में विधानसभा चुनाव के बाद अजित पवार ने देवेंद्र फडणवीस के साथ मिलकर रातों-रात सरकार बनाने का ऐलान करते हुए खुद उप मुख्यमंत्री बन गए थे लेकिन चाचा शरद पवार के मनाने के बाद लौट आए थे। ऐसे में अजित पवार की बात पर विश्वास करना मुश्किल है।
अजित पवार ने इसी कारण की थी बगावत
अजित पवार ने पहले जब एनसीपी से बगावत की थी तब भी उनको एनसीपी में शरद पवार द्वारा खास तव्वजों ना मिलने और उत्तराधिकारी ना बनाए जाने का खतरा सता रहा था। इसलिए वो चाचा शरद पवार से बगावत कर एनसीपी में सेंध लगाने का प्रयास करने की कोशिश की थी! हालांकि तब भी राजनीति के धुरंधर उनके चाचा शरद पवार ने उन्हें घर वापसी के लिए मजबूर कर दिया था। वहीं अगर इस बार भी अजित पवार ने सच में बगावत करने की प्लानिंग की थी तो ये बात तो तय है कि शरद पवार और पार्टी उन पर शायद ही अब उन पर विश्वास करेगी।
कहीं एनसीपी का अतीत ना बन जाए अजित
ऐसे में शरद पवार के अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद उनकी सांसद बेटी सुप्रिया फुले ही अध्यक्ष पद की कुर्सी पर बैठकर एनसीपी की बागडोर संभालेंगी। अगर ऐसा होगा तो ऐसा ना हो अजित पवार अपने बगावती तेवर के कारण एनसीपी का अतीत ना बन जाए और उनकी स्थिति राज ठाकरे के जैसी हो जाए।
ऐसे ही दौर से गुजर चुकी है बाला साहेब की शिवसेना
गौरतलब है कि एनसीपी में उत्तराधिकारी को लेकर अभी जो हो रहा है ऐसी ही स्थिति वर्षों पहले शिवसेना संस्थापक बाला साहेब ठाकरे के समय में आई थी जब शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे ने अपने भतीजे राज ठाकरे को साइड लाइन करके अपने फोटोग्राफर बेटे उद्धव ठाकरे को उत्तारधिकारी बना दिया था।
बाल ठाकरे ने राज ठाकरे को बगावत पर कर दिया था ऐसे ही मजबूर
जबकि उनके भतीजे राज ठाकरे बाला साहेब के राजनीति में बांऐ हाथ माने जाते थे और माना जा रहा था कि राज ठाकरे ही बाल ठाकरे की राजनीतिक विरासत संभालेंगे, लेकिन बाल ठाकरे ने जब पुत्र मोह में गैर अनुभवी बेटे उद्धव ठाकरे को अपना उत्तराधिकारी बना दिया था। चाचा बाल ठाकरे के इस फैसले से नाराज होकर राज ठाकरे ने शिवसेना छोड़कर अपनी पार्टी बना ली थी।












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