Shiv Sena (UBT) MPs Split: 'अपना सपना मनी मनी' 6 सांसदों की बगावत के बीच किस ओर इशारा दे रहे हैं संजय राउत?

Shiv Sena (UBT) MPs Split News: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बहुत बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के लोकसभा सांसदों में एक बार फिर फूट की खबरें हैं। इस बीच, पार्टी के सीनियर नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने अपना सपना मनी मनी वाला दावा लगाकर देश की राजनीति में सनसनी फैला दी है।

संजय राउत का आरोप है कि उद्धव ठाकरे के सांसदों को पाला बदलने के लिए भारी-भरकम पैसे का लालच दिया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि हर एक सांसद को 50 करोड़ रुपये देने का वादा किया गया है, जिसमें से 15 करोड़ रुपये एडवांस के तौर पर दिए जा रहे हैं।

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"अपना सपना मनी मनी..." संजय राउत ने क्या कहा?

संजय राउत ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई, जिसमें उनके साथ पार्टी के वफादार सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे भी मौजूद थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय राउत ने कहा-"मुझे एक बहुत जरूरी और बड़े व्यक्ति का फोन आया था। उसने मुझे बताया कि महाराष्ट्र में सांसदों को खरीदने की कोशिश हो रही है। उन्हें 50 करोड़ रुपये का ऑफर है और 15 करोड़ रुपये तो एडवांस (पेशगी) के तौर पर दिए जा रहे हैं।"

राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर भी लिखा- "हैरान करने वाली जानकारी मिली है कि महाराष्ट्र के सांसदों को आज रात ही 15-15 करोड़ रुपये एडवांस दिए जा रहे हैं। अपना सपना मनी मनी।" राउत ने चेतावनी दी कि जो सांसद पार्टी के चुनाव चिह्न (मशाल) पर जीतकर आए हैं, उन्हें गद्दारी करने का कोई हक नहीं है। इस बार जनता इन्हें माफ नहीं करेगी और इसका कड़ा विरोध होगा।

सभी 9 सांसदों को बैठक में बुलाया गया

पार्टी में टूट की खबरों के बीच शिवसेना (UBT) के लोकसभा दल के नेता अरविंद सावंत ने सभी 9 सांसदों को गुरुवार सुबह 11 बजे होने वाली बैठक में शामिल होने का निर्देश दिया है। संजय राउत ने कहा कि जो सांसद पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीतकर संसद पहुंचे हैं, उन्हें पार्टी के साथ विश्वासघात करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई ऐसा कदम उठाता है तो जनता इसकी प्रतिक्रिया देगी।

क्या है Operation Tiger?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विरोधी खेमा (एकनाथ शिंदे गुट) उद्धव ठाकरे की पार्टी के सांसदों को अपने पाले में लाने के लिए एक खास मिशन चला रहा है, जिसे 'ऑपरेशन टाइगर' नाम दिया गया है। यह चर्चा तब और तेज हो गई जब दो दिन पहले उद्धव ठाकरे ने मुंबई में अपने घर पर सभी 9 लोकसभा सांसदों की एक मीटिंग बुलाई थी, लेकिन उसमें सिर्फ 4 सांसद ही पहुंचे थे। तभी से कयास लगाए जा रहे हैं कि बाकी के सांसद पार्टी से नाराज हैं और वो पाला बदल सकते हैं।

समझिए क्या कहता है एंटी-डिफेक्शन लॉ का गणित: क्यों अहम हैं 6 सांसद?

इस दल बदल को समझने के लिए आपको सबसे पहले एंटी-डिफेक्शन लॉ को समझना होगा। संविधान के मुताबिक, अगर कोई सांसद अकेले या छोटे गुट में पार्टी छोड़ता है, तो उसकी संसद सदस्यता रद्द हो सकती है। लेकिन इस कानून में एक तोड़ है:

2/3 (दो-तिहाई) का नियम: अगर किसी पार्टी के कुल सांसदों में से दो-तिहाई (2/3) सांसद एक साथ टूटकर अलग गुट बनाते हैं, तो उनकी सदस्यता बची रहती है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के पास लोकसभा में कुल 9 सांसद हैं। 9 का दो-तिहाई 6 होता है। यानी अगर 6 सांसद एक साथ अलग होते हैं, तो दलबदल कानून के तहत उन पर कोई आंच नहीं आएगी।

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गौरतलब है कि साल 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना में बड़ी बगावत हुई थी। उस बगावत के बाद उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली महाविकास अघाड़ी सरकार गिर गई थी और महाराष्ट्र की राजनीति पूरी तरह बदल गई थी।

इन 6 सांसदों के बगावत करने की है चर्चा:

खबरों के अनुसार, जो 6 सांसद अलग गुट बनाकर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी सौंप सकते हैं, उनके नाम इस प्रकार हैं:

  • संजय जाधव (परभणी)
  • भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी)
  • संजय देशमुख (यवतमाल)
  • नागेश पाटिल आष्टीकर (हिंगोली)
  • ओमराजे निंबालकर (धाराशिव)
  • संजय पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व)

सूत्रों के मुताबिक, इनमें से तीन सांसद (संजय जाधव, संजय देशमुख और भाऊसाहेब वाकचौरे) मंगलवार को ही दिल्ली पहुंच चुके हैं और अपनी पार्टी के नेताओं का फोन भी नहीं उठा रहे हैं।

सिर्फ सांसद नहीं, 16-17 विधायकों पर भी नजर...

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक- शिंदे गुट (शिवसेना) में बगावत का यह खेल सिर्फ लोकसभा सांसदों तक सीमित नहीं है बल्कि 20 विधायकों में से भी कई विधायक एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं। अगर यह बगावत सच साबित होती है, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए साल 2022 के बाद दूसरा सबसे बड़ा झटका होगा, जब एकनाथ शिंदे ने बगावत करके महाविकास अघाड़ी (MVA) की सरकार गिरा दी थी।

दूसरी तरफ, शिंदे गुट के प्रवक्ता नरेश म्हस्के ने पैसे देने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हम किसी को जबरदस्ती नहीं बुला रहे हैं, लेकिन उद्धव गुट में बहुत से लोग नाराज हैं और जो भी हमारे साथ आना चाहेगा, हम उसका स्वागत करेंगे।

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