पेट काटकर जोड़ी थी पाई-पाई..., मुंबई के इस बैंक पर RBI ने लगाया बैन, पैसे नहीं निकले तो रो पड़े लोग
New India Co operative Bank: महाराष्ट्र में न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लेन-देन पर रोक लगा दी है। जिसके बाद इस बैंक के ग्राहकों को तगड़ा सदमा लगा है। इस बैंक के खातों में ग्राहकों के जीवन भर की जमा-पूंजी है, वहीं कई लोगों के सैलरी अकाउंट इसमें हैं। बैंक पर बैन लगाए जाने पर कस्टर्स अपनी खून-पसीने की कमाई का एक भी रुपया नहीं निकाल पा रहे हैं।
बैंक पर बैन लगाए जाने की खबर सुनते ही कस्टमर्स मुंबई और अन्य जिलों में इस सहकारी बैंक की ब्रांच में पहुंचे, तो उन्हें तब और झटका लगा जब उन्हें ये बताया गया कि वो बैंक के लॉकर तक को भी ऑपरेट नहीं कर सकते हैं और ना ही जो उन्होंने अपना पेट काट-काट कर जीवन भर पैसे जमा किए थे, उसे निकालने पर बैन लगाए जाने के बाद कस्टमर्स घबराए हुए हैं।

बता दें वित्तीय अस्थिरता और निगरानी संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए RBI ने बैंक की नए ऋण जारी करने, रुपयों के जमा करने और निकासी पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस निर्णय ने बैंक के ग्राहकों को हिला कर दिया है। ग्राहकों की इस बैंक में 40 लाख रुपये से अधिक के फिक्स डिपॉजिट है।
आरबीआई के प्रतिबंधों की घोषणा के बाद बैंक की शाखाओं के बाहर, खासकर मुंबई और ठाणे में, अफरा-तफरी मच गई, जहां परेशान कस्टमर्स की बड़ी भीड़ जमा हो गई। खाताधारक चिल्लाते हुए अपने पैसे की मांग कर रहे थे।
आजतक को दिए इंटरव्यू में एक महिला ने बताा कि वो अपनी बेटी की शादी के लिए बचत कर रही थी लेकिन अब वो पैस नहीं निकाल पा रही है। वहीं एक दूसरी महिला ने बताया उसके परिवार के एक सदस्य की मौत हो गई हैं, उसके अंतिम संस्कार के लिए उसे पैसे की जरूरत थी लेकिन वाे नहीं निकाल पा रही है। ।
हालांकि, RBI ने आश्वासन दिया है कि पात्र खाताधारकों को जमा बीमा योजना के तहत 5 लाख रुपये तक की सुरक्षा दी जाएगी। इस बीमा कवर का लाभ उठाने के लिए, प्रभावित ग्राहकों को बैंक के पास दावा दायर करना होगा। मार्च 2024 तक, बैंक में कुल जमा राशि 2,436 करोड़ रुपये थी, यह आंकड़ा RBI के निर्देशों के प्रभाव के पैमाने को उजागर करता है।
आरबीआई ने आगे कहा है कि बैंक को अपनी किसी भी संपत्ति को बेचने या स्थानांतरित करने पर प्रतिबंध है, यह आदेश 13 फरवरी, 2025 को प्रभावी होगा। इस उपाय का उद्देश्य बैंक के परिचालन को स्थिर करना और इसके जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करना है।
बता दें भारत में सहकारी बैंकों के खिलाफ़ विनियामक कार्रवाई का कोई ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले, पंजाब और महाराष्ट्र सहकारी बैंक (पीएमसी बैंक) को वित्तीय कुप्रबंधन और अनियमितताओं के उजागर होने के बाद 2019 में इसी तरह के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा था। आरबीआई के मार्गदर्शन में पीएमसी बैंक के संचालन को अंततः सेंट्रम फाइनेंशियल सर्विसेज ने अपने नियंत्रण में ले लिया था।












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