"राज ठाकरे सामने आएं, भ्रम दूर करें", संजय राउत ने ये क्‍यों कहा? क्‍या गठबंधन को लेकर सता रहा खतरा

Maharashtra News: महाराष्ट्र की राजनीति में मराठी अस्मिता और एकजुटता की नई लहर उठी है। 5 जुलाई को 'मराठी विजय रैली' कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पहली बार एक ही मंच पर आए। इस ऐतिहासिक क्षण ने महाराष्‍ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है।

वहीं अब शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने ठाकरे बंधुओं, उद्धव और राज, के बीच संभावित राजनीतिक गठबंधन को महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक "नई दिशा" देने वाला कदम बताया है। उन्होंने मुखपत्र 'सामना' के साप्ताहिक कॉलम 'रोकठोक' में भाजपा पर तीखे आरोप लगाए और कहा कि ठाकरे बंधुओं की एकता से दिल्ली और महाराष्ट्र की सत्ता में बैठे लोग घबरा गए हैं। इसके साथ ही संजय राउत ने लिखा , "ठाकरे भाइयों के एक साथ आने से मराठी समाज में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है, लेकिन इससे जुड़ी राजनीतिक चुनौती अभी बाकी है।

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राजनीतिक गठबंधन अभी अधूरा लेकिन...

संजय राउत ने लिखा, "राज और उद्धव ठाकरे हिंदी भाषा की जबरदस्ती के खिलाफ एक साथ आए हैं, पर अभी तक उनके राजनीतिक गठबंधन अभी अधूरा है इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन अगर यह युति होती है तो महाराष्ट्र को एक नई दिशा मिलेगी।"

अगर ठाकरे भाइयों की एकता और नेतृत्व बरकरार नहीं रहा, तो

राउत के अनुसार, मराठी एकजुटता को देखकर दिल्ली और महाराष्ट्र की सत्ता में खलबली मच गई है, और यह कोशिशें तेज हो गई हैं कि यह युति ना हो पाए। इस‍ीलिए संजय राउत ने चेतावनी भरे अंदाज में लिखा, "अगर ठाकरे भाइयों की एकता और नेतृत्व बरकरार नहीं रहा, तो मुंबई उद्योगपतियों द्वारा निगल ली जाएगी और एक दिन यह महाराष्ट्र का हिस्सा नहीं रहेगी।" उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अप्रैल में मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे से पुराने मतभेदों को 'तुच्छ' बताते हुए एकजुटता की बात कही थी।

यह आवश्यक है कि गठबंधन हो

संजय राउत ने कहा, "5 जुलाई को राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीते 20 सालों में पहली बार एक मंच साझा किया, इसका यह अर्थ नहीं है कि मराठी मानुस की सभी समस्याएं सुलझ गई हैं। मराठी मानूस को जो मुद्दे परेशान कर रहे हैं, वे वैसे ही बने हुए हैं। ठाकरे भाइयों ने हिंदी थोपने के खिलाफ एकजुटता दिखाई, लेकिन दोनों दलों के बीच राजनीतिक गठबंधन की अभी घोषणा नहीं हुई है। यह आवश्यक है कि गठबंधन हो। तभी महाराष्ट्र को नई दिशा मिलेगी।"

"राज ठाकरे सामने आएं, भ्रम दूर करें"

राउत ने कहा मुख्यमंत्री फडणवीस द्वारा राज ठाकरे से मुलाकात करके राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया गया है और इस पर अब मनसे अध्यक्ष खुद ही बोलेंगे और भ्रम दूर करेंगे। राउत ने ये भी कहा कि "मराठी मानुस को सबसे पहले मुंबई और ठाणे के लिए लड़ाई लड़नी चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा कि शिंदे और फडणवीस का राज ठाकरे के घर जाना केवल सियासी स्टंट है, जबकि असली जनभावना ठाकरे भाइयों की एकता के साथ है।

फडणवीस पर भी तीखा वार

उन्‍होंने लिखा, "भाजपा की नीति पहले मुंबई को लूटने की है, फिर मुंबई को केंद्र शासित प्रदेश बनाने और एक अलग विदर्भ के लिए खेल खेलने की है, जिससे महाराष्ट्र के अस्तित्व को समाप्त किया जा सके।"संजय राउत ने देवेंद्र फडणवीस पर भी तीखा प्रहार करते हुए लिखा, " लोग अभी ये नहीं भूले हैं कि महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणीस अतीत में विदर्भ को अलग राज्य बनाने के लिए आंदोलन कर रहे थे, और 'विदर्भ ही मेरा एकमात्र राज्य है' का संदेश देने वाले पोस्टर उठाए थे। आज वे मराठी एकजुटता की बात कर रहे हैं। "राउत ने यह भी आरोप लगाया कि फडणवीस ने ओबीसी और मराठा आंदोलन को जैसे शांत किया, वैसे ही वे मराठी एकता को भी तोड़ने की कोशिश करेंगे।

एकनाथ शिंदे के दिल्‍ली दौरे को लेकर किया ये दावा

संजय राउत ने दावा किया कि एकनाथ शिंदे ने दिल्ली जाकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और कहा, "जो कुछ महाराष्ट्र में हो रहा है, वह रोकिए।" राउत के अनुसार शिंदे ने यह भी प्रस्ताव रखा कि वे अपने गुट समेत भाजपा में विलय को तैयार हैं, बशर्ते उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया जाए।

शिंदे गुट का खुला बयान: हम ठाकरे भाइयों को एक नहीं होने देंगे

बता दें,संजय राउत ने ये दावा एकनाथ शिंदे गुट के मंत्री उदय सामंत और शिरसाट जैसे नेताओं ने खुले मंच से कहा, था, "अमित शाह और एकनाथ शिंदे मिलकर ठाकरे भाइयों की एकता को तोड़ेंगे। हम राज और उद्धव को एक नहीं होने देंगे।" इस पर राउत ने सवाल किया कि क्या ये बयान किसी ठोस योजना का हिस्सा हैं?

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