Pune GBS Cases: 1 की मौत-111 केस, GBS का इलाज संभव है? कितना खर्च आएगा? IVIG इंजेक्शन क्या है? जानें सबकुछ
Pune GBS Cases: पुणे में दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल बीमारी गुइलेन बैरे सिंड्रोम (GBS) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अब तक 111 मरीज सामने आ चुके हैं। गंभीर बात यह है कि सोलापुर निवासी 40 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो चुकी है। यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय बन गई है। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में GBS के मरीजों की संख्या अधिक है।
डॉक्टरों का कहना है कि GBS से पीड़ित 80% मरीज 6 महीने के अंदर सामान्य जीवन जीने लगते हैं। हालांकि कुछ मामलों में पूरी तरह ठीक होने में 1 साल या उससे ज्यादा समय लग सकता है। आइए, जानते हैं इस बीमारी का इलाज क्या संभव है? GBS के इलाज में कितना खर्च? IVIG इंजेक्शन क्या है?

What is Guillain-Barre Syndrome: गुइलेन बैरे सिंड्रोम (GBS) क्या है?
GBS एक दुर्लभ और गंभीर ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) गलती से तंत्रिका तंत्र पर हमला करती है। इसका असर मांसपेशियों की ताकत, संतुलन और शरीर की सामान्य गतिविधियों पर पड़ता है। गंभीर मामलों में यह बीमारी सांस लेने में तकलीफ और पक्षाघात (paralysis) का कारण भी बन सकती है।
Guillain-Barre Syndrome Symptoms: GBS के लक्षण क्या?
- मांसपेशियों में अचानक कमजोरी।
- हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नता।
- चलने या संतुलन बनाए रखने में परेशानी।
- सांस लेने में दिक्कत।
- दिल की धड़कन का तेज होना और ब्लड प्रेशर में बदलाव।
GBS के लक्षण तेजी से बढ़ सकते हैं, इसलिए इनका समय पर इलाज बेहद जरूरी है।
Guillain-Barre Syndrome Symptoms Causes: GBS के कारण क्या?
इस बीमारी का सटीक कारण अभी तक ज्ञात नहीं है, लेकिन यह अक्सर वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के बाद विकसित होती है।
- डेंगू, फ्लू, या गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण के बाद GBS के मामले ज्यादा देखे जाते हैं।
- पुणे में, मरीजों के जैविक नमूनों में कैम्पिलोबैक्टर जेजुनी नामक बैक्टीरिया पाया गया है, जो इस बीमारी का मुख्य कारण हो सकता है।
Guillain-Barre Syndrome Treatment: GBS का इलाज संभव है?
1. इम्युनोग्लोबुलिन थेरेपी (IVIG):
- इस थेरेपी से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित किया जाता है।
- एक IVIG इंजेक्शन की कीमत लगभग ₹20,000 है।
2. प्लाज्मा फेरेसिस:
- इसमें मरीज के खून से हानिकारक एंटीबॉडी को हटाया जाता है।
3. स्वच्छता और सतर्कता:
- संक्रमण से बचने के लिए स्वच्छता पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
4. समय पर डॉक्टर से परामर्श:
- मांसपेशियों में कमजोरी या झुनझुनी महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

Guillain-Barre Syndrome Treatment Cost: इलाज पर कितना खर्च आता है?
GBS का इलाज महंगा है। एक मरीज को IVIG इंजेक्शन (IVIG Injections) का कोर्स करने में 3-5 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 16 जनवरी को अस्पताल में भर्ती कराई गई 68 वर्षीय महिला के एक रिश्तेदार ने कहा कि उनके इलाज में कुल 13 इंजेक्शन का इस्तेमाल किया गया था।
Guillain-Barre Syndrome Treatment Free in Pune: कहां होगा पुणे में GBS का मुफ्त इलाज?
पुणे में GBS के बढ़ते मामलों को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। पुणे नगर निगम (PMC) और पिंपरी-चिंचवाड़ के मरीजों का इलाज कमला नेहरू अस्पताल में मुफ्त किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को ससून अस्पताल में इलाज मिलेगा। डिप्टी सीएम अजीत पवार ने IVIG इंजेक्शन और इलाज को मुफ्त उपलब्ध कराने की घोषणा की है।
GBS outbreak in Pune:पुणे में GBS का प्रकोप
- कुल मरीज: 111
- मृत्यु: 1
- पुरुष- 73
- महिलाएं- 37
- वेंटिलेटर मरीज- 17
- ग्रामीण क्षेत्र के मरीज: 62
- कुल घरों का सर्वेक्षण- 35,068
- पुणे नगर निगम (पीएमसी) के अंतर्गत- 23,017 घर
- ग्रामीण क्षेत्र- 7610 घर
- NIV को नमूने भेजे गए - 44 मल
- नोरोवायरस के लिए सकारात्मक - 14
अधिकारियों ने उन इलाकों में पानी के सैंपल इकट्ठा करना शुरू कर दिया है, जहां मरीजों की संख्या ज्यादा है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पानी और अन्य संसाधन संक्रमित न हों।

40 वर्षीय व्यक्ति की मौत
सोलापुर सरकारी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजीव ठाकुर ने बताया कि सांस लेने में तकलीफ, निचले अंगों में कमजोरी और दस्त जैसी समस्याओं से पीड़ित मरीज को 18 जनवरी को एक निजी अस्पताल (सोलापुर में) में भर्ती कराया गया था, जहां उसे बार-बार वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। 26 जनवरी को उसकी मौत हो गई।
गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) कितना घातक है?
गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) एक दुर्लभ ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली नसों पर हमला करती है, जिससे मांसपेशियों में कमजोरी, सुन्नता, और कभी-कभी पक्षाघात हो सकता है। गंभीर मामलों में, यह सांस लेने में कठिनाई पैदा कर सकता है, जिसके लिए वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता हो सकती है। हालांकि, समय पर चिकित्सा देखभाल से अधिकांश मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में दीर्घकालिक जटिलताएं या मृत्यु भी हो सकती है।
गुइलेन-बैरे सिंड्रोम की कोरोना वायरस से तुलना?
GBS और COVID-19 दोनों ही स्वास्थ्य के लिए गंभीर हो सकते हैं, लेकिन उनकी प्रकृति और प्रभाव अलग हैं। COVID-19 एक संक्रामक वायरस है जो मुख्यतः श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है, जबकि GBS एक ऑटोइम्यून विकार है जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। फ्रंटियर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, COVID-19 संक्रमण के बाद कुछ मामलों में GBS के विकसित होने की रिपोर्टें मिली हैं, लेकिन यह दुर्लभ है।
क्या है GBS की मृत्यु दर? उम्र के हिसाब से कैसे कर रहा अटैक?
राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुरू से किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि 110 मरीजों में से 19 9 वर्ष से कम उम्र के हैं, 15 10-19 आयु वर्ग के हैं, 20 20-29 आयु वर्ग के हैं, 13 30-39 आयु वर्ग के हैं, 12 40-49 आयु वर्ग के हैं, 13 50-59 आयु वर्ग के हैं, 8 60-69 आयु वर्ग के हैं, और एक 70-80 आयु वर्ग का है। इस बीच, रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) और पुणे नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित सिंहगढ़ रोड इलाकों में निगरानी जारी रखी। जीबीएस की मृत्यु दर विश्व स्तर पर 3 प्रतिशत से 13 प्रतिशत तक है, भारत में यह दर 8.9 प्रतिशत है (इसका अर्थ है कि 10 में से 1 रोगी की मृत्यु हो सकती है)।
पेरू से हुई थी सिंड्रोम की शुरुआत?
जीबीएस का आखिरी बड़ा प्रकोप जिसने दुनिया भर का ध्यान खींचा था, वह जून 2023 में पेरू में हुआ था, जब देश ने 28 सप्ताह में 231 मामलों के साथ महामारी संबंधी चेतावनी जारी की थी - जो कि चिंताजनक रूप से पुणे में हम जो देख रहे हैं उससे बहुत कम दर है। हालांकि, पेरू में कोविड महामारी से पहले 2019 में भी कहीं ज़्यादा गंभीर प्रकोप हुआ था और तब कैम्पिलोबैक्टर जेजुनी के कारण लगभग 700 मामले सामने आए थे। 2023 के प्रकोप में भी कैम्पिलोबैक्टर संक्रमण का प्रतिशत बहुत ज़्यादा था।
पुणे और महाराष्ट्र की आबादी कितनी है?
2011 की जनगणना के अनुसार, पुणे जिले की जनसंख्या 94,26,959 थी। हालांकि, वर्तमान में यह संख्या बढ़कर लगभग 1 करोड़ से अधिक हो सकती है। वहीं, महाराष्ट्र की जनसंख्या 11,23,74,972 थी। 2023 में, यह अनुमानित जनसंख्या बढ़कर लगभग 13.6 करोड़ हो गई है।
Guillain-Barre Syndrome Precautions: GBS से बचाव के लिए क्या बरतें सावधानियां ?
- किसी भी संक्रमण के बाद शरीर में आए बदलावों को नजरअंदाज न करें।
- साफ-सफाई का ध्यान रखें।
- मांसपेशियों में कमजोरी, सुन्नता या झुनझुनी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें।












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