Pune elections: कौन हैं पूजा मोरे? जिन्होंने रोते हुए नामांकन लिया वापस, पहलगाम हमले से जुड़ा है मामला
Pune elections: पुणे निकाय चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने वार्ड नंबर 2 से पूजा मोरे को अपना उम्मीदवार घोषित किया था। हालांकि, पार्टी के इस फैसले पर तुरंत तीव्र विरोध और नाराजगी देखने को मिली। पार्टी के कई कार्यकर्ताओं ने खुलकर उनके नामांकन पर आपत्ति जताई थी। जिसके बाद भाजपा प्रदेश सचिव पूजा मोरे ने रोते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया और नामांकन वापस ले लिया है।
जिससे शहर में सियासी हलचल तेज हो गई है। उनका यह कदम ऐसे समय में आया है, जब पुणे नगर निगम चुनाव होने वाले हैं, जो पार्टी के लिए अहम हैं।

पूजा मोरे विरोध का मुख्य कारण पूजा मोरे के कुछ पुराने बयान थे, जिनमें पहलगाम हमले पर उनकी प्रतिक्रिया और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ की गई पिछली टिप्पणियां शामिल थीं। ये बयान सोशल मीडिया पर फिर से सामने आए, जिससे उन्हें काफी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। इसके अलावा पूजा मोरे का इस्तीफा उनके ऊपर चल रहे कई विवादों का नतीजा भी है।
प्रेस कान्फ्रेंस में रो पड़ी पूजा मोरे
पार्टी के भीतर से बढ़ते आंतरिक विरोध के साथ, कार्यकर्ताओं ने उनकी उम्मीदवारी के खिलाफ एक अभियान शुरू कर दिया था। बढ़ते दबाव के चलते आखिरकार पूजा मोरे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इस घोषणा के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वह रोने लगी।
कौन हैं पूजा मोरे?
पूजा मोरे पुणे में भाजपा प्रदेश सचिव का पद संभाल रही थीं। नामांकन वापस लेने के बाद पूजा मोरे ने अपनी बताया कि वह एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं और उन्होंने वर्षों तक संघर्ष का सामना किया है। उन्होंने यह भी साझा किया कि शादी के बाद वह पुणे आईं और किसान आंदोलनों में सक्रिय रूप से शामिल रहीं, जहां उन्हें पुलिस लाठीचार्ज, आपराधिक मामले और अदालत के कई चक्कर लगाने पड़े। मोरे ने यह भी कहा कि कई बार उनके पास कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए आर्थिक साधन नहीं थे, फिर भी वह डटी रहीं। भाजपा का टिकट मिलना उन्होंने अपने जैसे जमीनी कार्यकर्ता के लिए एक दुर्लभ और सौभाग्यपूर्ण अवसर बताया था।
पूजा मोरे के खिलाफ चल रहा 24 एकड़ जमीन का मामला
हालांकि पूजा मोरे का इस्तीफा उनके ऊपर चल रहे कई विवादों का नतीजा है। इनमें नेशनल टेक्सटाइल कॉर्पोरेशन (एनटीसी) की 24 एकड़ जमीन का मामला प्रमुख है। पुणे में खरीदी गई इस जमीन से उनके परिवार के कुछ सदस्यों का नाम जुड़ा है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई लगातार जारी है।
डीएसकेसी केस में जुड़ा है पूजा मोरे के रिश्तेदार का नाम
दूसरा बड़ा विवाद डीएस कुलकर्णी कंस्ट्रक्शन (डीएसकेसी) से जुड़ा है। इस मामले में पूजा मोरे के रिश्तेदार हेमंत रासने पर धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं। पुणे में दर्ज एक एफआईआर में डीएस कुलकर्णी से धोखाधड़ी के आरोपों में हेमंत रासने का भी नाम था, जिससे मोरे परिवार पर गंभीर सवाल उठे। इन्हीं लगातार विवादों के चलते, पूजा मोरे ने पार्टी की चुनावी संभावनाओं और प्रतिष्ठा को बचाने के लिए पद छोड़ने का निर्णय लिया। भाजपा नेतृत्व ने उनका इस्तीफा तत्काल स्वीकार कर लिया है।
पूजा मोरे ने पहलगाम हमले वाले बयान पर दी सफाई
प्रेस मीट के दौरान, मोरे ने कहा, "उनकी अतीत की एक छोटी सी गलती को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया और उसे उनके खिलाफ एक साजिश में बदल दिया गया।" उन्होंने स्पष्ट किया कि पहलगाम हमले पर उनकी शुरुआती प्रतिक्रिया तुरंत दी गई थी, लेकिन पीड़ितों और स्थानीय लोगों से मिलने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि यह हमला धर्म के आधार पर लोगों को निशाना बनाकर किया गया था।
राहुल गांधी के साथ फोटो पर भी दी सफाई
उन्होंने यह भी बताया कि राहुल गांधी के साथ उनकी तस्वीर तब ली गई थी जब वह किसानों के मुद्दों पर एक ज्ञापन सौंपने के लिए 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान उनसे मिली थीं। अपने संकल्प को दोहराते हुए, मोरे ने कहा कि वह एक जुझारू कार्यकर्ता हैं, भाजपा की सदस्य बनी रहेंगी और हिंदुत्व के लिए काम करने को प्रतिबद्ध हैं।












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