'परभणी में हुई हिंसा महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार की बड़ी नाकामी', सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने घेरा
Parbhani Violence: महाराष्ट्र के परभणी शहर में बाबा साहेब अंबेडकर की मूर्ति के पास संविधान की प्रति के साथ छेड़छाड़ कर नुकसान पहुंचाया गया। संविधान का अपमान के बाद लोगों का गुस्सा बढ़ गया और हिंसा भड़क उठी। लोगों ने दुकानों में आग लगा दी और गाड़ियों में तोड़फोड़ की। और पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
इस हिंसा की घटना के बाद महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार विपक्षी पार्टियों के निशाने पर आ गई है। शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने परभणी में हुई हिंसा के लिए नई महायुति सरकार में गृह मंत्री की अनुपस्थिति के कारण बिगड़ी कानून व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार की इसे नाकामी बताते हुए कड़ी आलोचना की है।

एएनआई से बात करते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने परभणी में हुई हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे सरकार की लापरवाही और गलत प्राथमिकताओं का प्रत्यक्ष प्रतिबिंब बताया। इसके साथ ही चतुर्वेदी ने वर्तमान प्रशासन पर महाराष्ट्र के निवासियों के कल्याण पर सत्ता पर अपनी पकड़ को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।
संजय राउत बोले- महायुति सरकार में बढ़ी हैं ऐसी हिंसा
वहीं शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने भी भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति सरकार के इस घटना से निपटने के तरीके पर सवाल उठाया। राउत ने दावा किया कि महाराष्ट्र में महायुति सरकार के सत्ता में आने के बाद से इस तरह की हिंसक घटनाओं में वृद्धि हुई है।
कांग्रेस ने क्या कहा?
महाराष्ट्र कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता अतुल लोंधे पाटिलपाटिल ने सुझाव दिया कि मरकटवाड़ी और अन्य क्षेत्रों में हिंसा राज्य को अस्थिर करने की एक बड़ी योजना का हिस्सा हो सकती है।
हिंसा के बाद निशाने पर आई सरकार
बता दें परभणी शहर में भारतीय संविधान की प्रति के साथ कथित रूप से छेड़छाड़ के बाद भड़की हिंसा की व्यापक निंदा हो रही है। वहीं जिला मजिस्ट्रेट रघुनाथ खांडू गावड़े ने अराजकता के बीच शांति बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि अतिरिक्त बलों की तैनाती के कारण पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में कर लिया है।
गौरतलब है कि महायुति गठबंधन, जिसमें भाजपा, शिवसेना और एनसीपी शामिल हैं, ने हाल ही में महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में महत्वपूर्ण जीत हासिल की है। इस चुनावी सफलता ने गठबंधन को शासन करने के लिए एक मजबूत जनादेश दिया है, फिर भी परभणी में हाल ही में हुई हिंसा ने राज्य में शांति सुनिश्चित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की उनकी क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।












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