बिजली संकट: 'सिर्फ 1.5 दिन का कोयला बचा है...' क्या महाराष्ट्र में मचने वाला है हाहाकार ?
नागपुर, 15 अप्रैल: पंजाब के बाद महाराष्ट्र भी बड़े बिजली संकट की चपेट में आ सकता है। राज्य के ऊर्जा मंत्री नितिन राउत की मानें तो कुछ विद्युत उत्पादन प्लांट में चंद दिनों का ही कोयला बच गया है। जबकि, राज्य में बिजली की डिमांड रिकॉर्ड 28,000 मेगा वॉट स्तर तक पहुंचने की रिपोर्ट आ रही है। उधर राज्य सरकार ने केंद्र से पूर्ण सहयोग नहीं मिलने का आरोप लगाने के साथ ही, जल विद्युत के विकल्पों के लिए जल संसाधन विभाग को तैयारी शुरू करने के लिए भी कह दिया है। राज्य ने 20 लाख मीट्रिक टन कोयले की आयात की भी तैयारी की है, लेकिन इसमें अभी देरी है और इसके चलते बिजली कटौती की वजह से लोगों की मुसीबतें शुरू हो चुकी हैं।

कुछ प्लांट में सिर्फ 1.5 दिन का कोयला बचा है-ऊर्जा मंत्री
महाराष्ट्र के ऊर्जा मंत्री नितिन राउत ने शुक्रवार को दावा किया है कि राज्य कोयला और बिजली संकट से जूझ रहा है। उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा है, 'महाराष्ट्र के कुछ प्लांट में सिर्फ 1.5 दिन का कोयला ही बचा है, कुछ में 3 दिन और कुछ में 6 दिनों का कोयला बचा हुआ है। राज्य सरकार इस संकट से निपटने के लिए काम कर रही है। जल संसाधन मंत्री से कहा गया है कि हाइड्रोइलेक्ट्रिसिटी पैदा करने के लिए पानी की सप्लाई करें।' उन्होंने कहा है कि महाराष्ट्र को लोड-शेडिंग से निजात दिलाने के लिए कोयला, पानी और गैस की सप्लाई बरकार रखने की जरूरत है।

केंद्र पर आरोप लगाने के साथ जल विद्युत उत्पादन की तैयारी
उन्होंने जो हाइड्रोइलेक्ट्रिसिटी की बात की है, उसके बारे में थोड़ा ज्यादा विस्तार से बताते हुए कहा है, 'कोयना डैम में 17 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (टीएमसी) पानी बचा है। हर दिन बिजली पैदा करने के लिए एक टीएमसी की जरूरत है। यदि लोड-शेडिंग की समस्या दूर करनी है तो कोयला, जल और गैस की जरूरत पड़ेगी। केंद्र के साथ करार के हिसाब से उन्हें राज्य सरकार को एपीएम गैस उपलब्ध करवाना है।' उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने राज्य को आवश्यक एपीएम गैस उपलब्ध नहीं करवाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि 'महाराष्ट्र सरकार को केंद्र को 2200 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने हैं। केंद्र सरकार ने हमसे कहा है कि पहले पैसे दीजिए और तभी वे हमें कोयला उपलब्ध करवाएंगे।'

बिजली संकट के चलते कटौती शुरू
इससे पहले हिंदुस्तान टाइम्स ने एक रिपोर्ट दी थी कि महाराष्ट्र में मई के मध्य से तक तब बिजली आपूर्ति में सुधार होगी, जब महाराष्ट्र स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड (महाजेनको) 20 लाख मीट्रिक टन कोयले का आयात करेगा। इस समय महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एमएसईडीसीएल) को 2,500 मेगा वॉट से 3,000 मेगा वॉट बिजली कम पड़ रही है, जिसके चलते बिजली की कटौती शुरू हो गई है। कुछ रिपोर्ट तो ये हैं कि महाराष्ट्र में बिजली की मांग रिकॉर्ड 28,000 मेगा वॉट तक पहुंच गई है, जबकि एमएसईडीसीएल करीब 24,800 मेगा वॉट के आसपास ही जुटा पा रहा है।

बिजली प्लांट में कोयले की सप्लाई में 24.5% इजाफा-रिपोर्ट
पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार ने कहा है कि बिजली बनाने वाले प्लांट के लिए कोयले की सप्लाई में पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 2021-22 में 24.5 फीसदी का इजाफा हुआ है और यह 677.67 मिलिटन टन तक पहुंच गया है। लेकिन, आंकड़ों के आधार पर बताया जा रहा है कि वित्त वर्ष 2021 में बिजली केंद्रों को 544.07 मीट्रिक टन कोयले की सप्लाई की गई, जो कि वित्त वर्ष 2020 के 567.25 मीट्रिक टन के मुकाबले कम है।(तस्वीरें- प्रतीकात्मक और फाइल)












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