टीपू सुल्तान जयंती पर पुणे में जुलूस की मिली अनुमति, मुंबई हाईकोर्ट ने पुलिस को दी कानून व्यवस्था की नसीहत
Maharashtra News: पुणे में 18वीं सदी के मैसूर शासक टीपू सुल्तान की जयंती मनाने के लिए 24 दिसंबर को एक जुलूस निकालने की अनुमति दी गई है। यह जानकारी मंगलवार को बंबई उच्च न्यायालय को दी गई। अदालत की खंडपीठ जिसमें न्यायमूर्ति रवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति पृथ्वीराज चव्हाण शामिल थे। उन्होंने सार्वजनिक आयोजनों के अधिकार को स्वीकार करते हुए कहा कि सभी कानूनी शर्तें पूरी की जानी चाहिए।
पुलिस पर कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक आयोजनों के दौरान व्यवस्था बनाए रखना कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जिम्मेदारी है। न्यायालय ने पुलिस को बार-बार कानून और व्यवस्था का हवाला देकर आयोजनों की अनुमति से इनकार करने से बचने की सलाह दी।

यह सुनवाई ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के पुणे इकाई अध्यक्ष फैयाज शेख की याचिका पर हो रही थी। शेख ने टीपू सुल्तान, स्वतंत्रता सेनानी मौलाना अबुल कलाम आजाद और संविधान दिवस की जयंती के अवसर पर रैली आयोजित करने की अनुमति मांगी थी।
पुलिस ने दी सशर्त अनुमति
प्रारंभ में पुणे ग्रामीण पुलिस ने कानून और व्यवस्था के संभावित मुद्दों का हवाला देते हुए रैली की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बजाय पुलिस ने निजी समारोहों का सुझाव दिया था। हालांकि अदालत के निर्देश के बाद पुलिस ने पुनर्विचार किया और आयोजन के लिए एक निर्दिष्ट मार्ग के साथ अनुमति प्रदान की। हालांकि याचिकाकर्ता ने अदालत को सूचित किया कि जुलूस के दौरान बैनर और मेहराब लगाने के लिए एनओसी अब भी लंबित है।
पुलिस की चिंताओं और अदालत के निर्देश
सार्वजनिक अभियोजक हितेन वेनेगांवकर ने जुलूस के कारण संभावित अशांति पर चिंता व्यक्त की। जिसके चलते पुलिस ने आयोजन को एक विशेष मार्ग तक सीमित कर दिया। याचिकाकर्ता द्वारा पूरे शहर में बैनर लगाने की अनुमति का अनुरोध अभी समीक्षा के अधीन है।
खंडपीठ ने पुलिस को बैनर और मेहराब के संबंध में 24 घंटों के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि जुलूस के दौरान कानून और व्यवस्था बनाए रखने की पूरी जिम्मेदारी पुलिस की होगी।
अदालत का स्पष्ट संदेश
अदालत ने यह भी दोहराया कि जुलूसों के लिए सभी कानूनी आदेशों का पालन अनिवार्य है। याचिकाकर्ता के रैली आयोजित करने के अधिकार को स्वीकार करते हुए खंडपीठ ने बैनर और मेहराब के संबंध में अंतिम निर्णय पुलिस पर छोड़ दिया।
न्यायालय ने अपने अवलोकन में पुलिस को यह सलाह दी कि कानून और व्यवस्था की आड़ में सार्वजनिक आयोजनों की अनुमति से इनकार करना उचित नहीं है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि जन सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस बल का प्राथमिक कर्तव्य है।
अदालत ने की याचिका पर कार्यवाही समाप्त
जुलूस के लिए अनुमति मिलने के साथ अदालत ने याचिका पर अपनी कार्यवाही समाप्त कर दी। यह मामला आयोजन की अनुमति के अधिकार और कानून व्यवस्था बनाए रखने के पुलिस के कर्तव्य के बीच संतुलन बनाने का एक उदाहरण है।












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