गूगल मैप्स पर भरोसा करना पड़ा भारी, नवी मुंबई में महिला की ऑडी कार खाई में गिरी, मरीन गार्ड्स ने रेस्क्यू किया
Navi Mumbai google maps ditch: नवी मुंबई के बेलापुर इलाके में एक महिला को गूगल मैप्स की बात मानना महंगा पड़ गया। बेलापुर से उल्वे की ओर जा रही महिला ने जैसे ही अपने मोबाइल स्क्रीन पर दिखाए जा रहे नेविगेशन निर्देशों का पालन किया, वह अनजाने में एक खतरनाक मोड़ पर पहुँच गई।
गूगल मैप्स ने उसे ब्रिज के बजाय ब्रिज के नीचे बने रास्ते पर मोड़ दिया - और कुछ ही मिनटों में उसकी ऑडी कार एक गहरे गड्ढे (खाई) में जा गिरी। ये हादसा शुक्रवार देर रात करीब 1 बजे हुआ।

महिला कार में अकेली थी और राहत की बात ये रही कि आसपास मौजूद मरीन सिक्योरिटी गार्ड्स ने फुर्ती से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और कुछ ही मिनटों में महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। स्थानीय पुलिस के मुताबिक, महिला गूगल मैप्स के निर्देशों के चलते उल्टा रूट पकड़ बैठी और गड्ढे में फंस गई।
कैसे हुआ हादसा?
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, यह घटना 25 जुलाई की देर रात लगभग 1 बजे की है। महिला अपनी ऑडी कार से बेलापुर से उल्वे की ओर जा रही थी। उसे बेलापुर के बे ब्रिज से होकर गुजरना था, लेकिन गूगल मैप्स ने उसे पुल के नीचे स्थित एक रास्ते की ओर मोड़ दिया, जो ध्रुवतारा जेटी की ओर जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला जैसे ही गूगल मैप्स के निर्देशों पर चलती हुई उस रास्ते पर आगे बढ़ी, कुछ ही मिनटों में उसकी कार एक खाई में गिर गई। महिला उस समय कार में अकेली थी।
#WATCH | Navi Mumbai, Maharashtra: A car following the navigation of Google Maps fell into a ditch in Belapur. pic.twitter.com/JUmxobSIY1
— ANI (@ANI) July 26, 2025
मरीन गार्ड्स ने निभाई अहम भूमिका
जैसे ही घटना की जानकारी मिली, मरीन सुरक्षा गार्ड्स की टीम और बेलापुर पुलिस की स्थानीय टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची। बेलापुर के सहायक पुलिस निरीक्षक नारायण पालमपल्ली ने बताया कि मरीन सुरक्षा दल की एक नाव की मदद से महिला को सुरक्षित रूप से खाई से बाहर निकाला गया।
राहत की बात यह रही कि महिला को कोई गंभीर चोट नहीं आई और पूरी रेस्क्यू प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो गई।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
यह पहली बार नहीं है जब गूगल मैप्स की गलती से लोगों की जान खतरे में पड़ी हो। पिछले साल एक ऐसी ही घटना में तीन लोगों की मौत हो गई थी जब उनकी कार एक अधूरी बनी पुल से नीचे गिर गई थी। हादसे में कार करीब 50 फीट की ऊंचाई से नदी में जा गिरी थी।
उस समय भी गूगल मैप्स ने यह नहीं दिखाया था कि पुल का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त है। इसी साल जनवरी में दो फ्रेंच पर्यटक भी गूगल मैप्स द्वारा सुझाए गए एक शॉर्टकट रास्ते पर चलते हुए उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक वीरान इलाके में फंस गए थे। वे दिल्ली से नेपाल की राजधानी काठमांडू जा रहे थे।
तकनीक पर आंख मूंदकर भरोसा कितना सही?
इन घटनाओं ने एक बार फिर डिजिटल नेविगेशन सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गूगल मैप्स जैसे एप्स आज हमारी यात्रा का अहम हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल करते समय सतर्कता और मानवीय विवेक का इस्तेमाल बेहद जरूरी है।
अगर समय रहते मरीन सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस मौके पर न पहुंचती, तो यह हादसा एक बड़ी त्रासदी में बदल सकता था। इस घटना ने यह भी दर्शाया कि तकनीक हमारी मदद तो कर सकती है, लेकिन आंख मूंदकर उस पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है।












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