'हमारा पैसा वापस करो!' बंगाल में अब मदन मित्रा पर बरसे अंडे, TMC नेताओं को देखते ही क्यों भड़क रहे लोग?
TMC Madan Mitra convoy attacked: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। साल 2026 के विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद से नेताओं के खिलाफ जनता का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला कमरहाटी विधानसभा क्षेत्र से सामने आया है, जहां शनिवार (06 जून) की रात टीएमसी के कद्दावर विधायक मदन मित्रा के काफिले को स्थानीय लोगों के भारी विरोध और गुस्से का सामना करना पड़ा।
मदन मित्रा की गाड़ी पर हमला: आखिर शनिवार रात क्या हुआ?
यह पूरी घटना कमरहाटी के आरियादहा इलाके की है। क्षेत्र में तनाव की खबरें मिलने के बाद विधायक मदन मित्रा वहां के हालात का जायजा लेने पहुंचे थे। लेकिन जैसे ही उनकी गाड़ी वहां पहुंची, स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते गुस्साई भीड़ ने मदन मित्रा के वाहन पर अंडों की बौछार कर दी।

हालात इतने बिगड़ गए कि उनके काफिले को तुरंत वहां से निकलना पड़ा। हालांकि, बाद में मदन मित्रा ने दावा किया कि जब यह हमला हुआ, तब वे गाड़ी के भीतर मौजूद नहीं थे। दूसरी ओर, ग्राउंड से ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि इस हंगामे के दौरान उनके ड्राइवर के साथ मारपीट की गई। मदन मित्रा ने इस पूरी घटना का ठीकरा बीजेपी पर फोड़ते हुए कहा कि यह विरोध प्रदर्शन भगवा पार्टी के कार्यकर्ताओं की एक सोची-समझी साजिश थी।
'कट मनी' का पुराना हिसाब और ऑटो ड्राइवरों का गुस्सा
भले ही नेताजी इसे विपक्ष की साजिश बता रहे हों, लेकिन स्थानीय लोगों की कहानी कुछ और ही बयां करती है। असल में इस बवाल की शुरुआत कमरहाटी के वार्ड नंबर 14 के एक काउंसिलर के घर के बाहर से हुई थी। वहां भारी संख्या में ऑटो और ई-रिक्शा चलाने वाले लोग इकट्ठा हुए थे। इन ड्राइवरों का सीधा आरोप है कि टीएमसी के स्थानीय नेताओं ने बीते कई सालों से उनसे जबरन 'कट मनी' (अवैध कमीशन) वसूला है। राज्य में सत्ता परिवर्तन होते ही इन ड्राइवरों का सब्र टूट गया और वे अब अपने हक का पैसा वापस मांग रहे हैं।
TMC के खिलाफ 'अंडा' बना विरोध का नया हथियार
पश्चिम बंगाल में इन दिनों भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के आरोपों से घिरे टीएमसी नेताओं के खिलाफ 'अंडा' विरोध प्रदर्शन का एक बड़ा सिंबल बन चुका है। यह मदन मित्रा के साथ हुई कोई पहली इकलौती घटना नहीं है, बल्कि पिछले कुछ हफ्तों से पूरी स्टेट में ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है।
अभिषेक बनर्जी का विरोध: पिछले हफ्ते टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी जब सोनारपुर में एक दिवंगत पार्टी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने पहुंचे थे, तो उन्हें भी भारी विरोध का सामना करना पड़ा। वहां मौजूद भीड़ ने उनके खिलाफ नारेबाजी की और पत्थरों के साथ-साथ अंडे भी फेंके, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला।
अदालतों के बाहर प्रदर्शन: भ्रष्टाचार, रंगदारी और घोटालों के आरोप में फंसे टीएमसी नेताओं और पार्षदों की जब कोर्ट में पेशी हो रही है, तब भी लोग हाथों में अंडे लेकर पहुंच रहे हैं। हाल ही में गिरफ्तार टीएमसी नेता जय प्रकाश मजूमदार और पूर्व मंत्री स्वरूप बिस्वास की कोर्ट में पेशी के दौरान भी जनता ने अंडे दिखाकर अपना आक्रोश जाहिर किया था।
चुनावी हार के बाद टीएमसी के लिए क्यों बढ़ी मुश्किलें?
2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजों ने पश्चिम बंगाल के जमीनी समीकरण बदल दिए हैं। सत्ता हाथ से जाते ही आम जनता के मन में स्थानीय टीएमसी नेताओं के खिलाफ बरसों से दबा गुस्सा अब सड़कों पर खुलकर बाहर आ रहा है।
पुलिस थानों और अदालतों के बाहर हो रहे ये प्रदर्शन इस बात का साफ संकेत हैं कि आने वाले दिन टीएमसी नेतृत्व के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। 'कट मनी' और जबरन वसूली के आरोपों ने पार्टी की छवि को जो नुकसान पहुंचाया है, उसी का नतीजा आज मदन मित्रा जैसे वरिष्ठ नेताओं को भुगतना पड़ रहा है।














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