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शिवाजी की मूर्ति टूटने के विरोध में आज सड़क पर उतरेगा MVA , देवेंद्र फडणवीस ने गिनाई नेहरू-इंदिरा की गलती

महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले के राजकोट किले में छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति ढहने के बाद महा विकास अघाड़ी आ सड़क पर उतरने जा रही है। एमवीए के इस प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन की ओर से व्यापक तैयारी की गई और सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया गया है। बता दें कि आठ महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिवाजी की मूर्ति का अनावरण किया था।

जिसके ढहने से प्रदेश में सियासत गर्मा गई है। एमवीए ने सत्तारूढ़ महायुति सरकार पर प्रतिमा के निर्माण और रखरखाव में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे, एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार और महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख नाना पटोले ने सरकार के इस दावे की आलोचना की कि तेज हवाओं के कारण प्रतिमा ढह गई। ठाकरे ने मुंबई में हुतात्मा चौक से गेटवे ऑफ इंडिया तक मार्च निकालने की घोषणा की।

shivaji maharaj

भाजपा ने एमवीए के विरोध को राजनीति से प्रेरित बताया है। एमवीए ने कहा कि विधानसभा चुनावों के करीब आने के की वजह से ये लोग सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए सड़क पर उतर रहे हैं। वहीं महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि आज आंदोलन हो रहा है, यह पूरी तरह से राजनितिक आंदोलन है।

इन लोगों ने कभी भी छत्रपति शिवाजी महाराज का सम्मान नहीं किया। मुझे पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी का एक भी भाषण बताइए जिसमे इन्होंने लाल किले से छत्रपति शिवाजी का जिक्र किया हो। पंडित नेहरू ने अपनी किताब स्टोरी ऑफ इंडिया में शिवाजी का अपमान किया। क्या उसकी माफी कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी मागेगी।

मध्य प्रदेश में कमलनाथ जी ने मुख्यमंत्री के तौर पर छत्रपति शिवाजी का पुतला बुल्डोजर से हटाया, उसे तोड़ दिया, क्या उसकी माफी कांग्रेस मांगेगी। कर्नाटक में छत्रपति शिवाजी का पुतला तोड़ दिया, क्या उसकी माफी ये लोग मांगेगी।

आजादी के इतने सालों बाद भी इसी कांग्रेस ने हमें पढ़ाया कि छत्रपति जी ने सूरत को लूटा, लेकिन उन्होंने कभी भी सूरत को नहीं लूटा था। सूरत के लोगों ने छत्रपति जी का पुतला वहां लगाया। इतना सम्मान उनका यहां पर था, लेकिन इसके बाद भी इन लोगों ने हमें गलत पढ़ाया।

इस घटना के विरोध में, अजीत पवार की अगुवाई वाली एनसीपी ने गुरुवार को पूरे महाराष्ट्र में मौन विरोध प्रदर्शन किया था। शरद पवार ने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को विरोध करने का अधिकार है और मूर्ति के ढहने के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही की मांग की।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना के लिए माफ़ी मांगी है, लेकिन विपक् लगातार हमलावर है। कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा कि माफ़ी मांगना पर्याप्त नहीं है क्योंकि इससे "महाराष्ट्र के गौरव को ठेस पहुंची है।" उनका कहना है कि प्रतिमा का अनावरण करने से पहले उचित जांच की जानी चाहिए थी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने भी महायुति सरकार की आलोचना की और इस घटना को राज्य पर एक दाग बताया। उन्होंने प्रदेश सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र को "पूर्ण दिवालियापन" की ओर धकेला जा रहा है तथा मोदी की माफ़ी को "शर्तों पर आधारित" और "राजनीतिक" बताया।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एमवीए के नियोजित विरोध की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए राजनीति से प्रेरित है। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए दावा किया कि शिवाजी महाराज के प्रति विपक्ष का लगाव सतही है।

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