Mumbai Weather: मुंबई में अगले 48 घंटों में होगी झमाझम बारिश, IMD ने जारी किया अलर्ट
Mumbai Weather: मुुंबई और महाराष्ट के लोगों को उमस भरी बारिश से राहत मिलने वाली है। महाराष्ट्र में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सुस्त पड़ती चाल को एक बार फिर स्पीड मिलने की उम्मीद है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, अगले 48 घंटों के भीतर मानसून मुंबई में दस्तक दे सकता है।
मौसम विभाग ने बताया एक दिन पहले सोमवार को मुंबई में हुई बारिश मानसूनी नहीं बल्कि प्री-मानसून बौछारें थीं, जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी से थोड़ी राहत मिली है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले सप्ताह मानसून की रफ्तार लगभग थम सी गई थी, लेकिन अब अरब सागर की ओर से परिस्थितियां अनुकूल बनी हैं जो इसके आगे बढ़ने में मदद कर रही हैं। इसके प्रभाव से पश्चिमी तट पर मानसून धीरे-धीरे आगे की तरफ बढ़ रहा है। 22 जून को मानसून ने मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कई हिस्सों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है।
मुंबई में मानसून के आगमन की राह और सुस्ती की वजह
मुंबई में आमतौर पर मानसून का आगमन 11 जून के आसपास हो जाता है, जिसका लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस साल यह केरल में अपने निर्धारित समय से चार दिन पहले, यानी 4 जून को ही पहुंच गया था। इसके बाद 8 जून को इसने महाराष्ट्र की सीमा के कुछ हिस्सों में प्रवेश किया, लेकिन बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में कोई मजबूत स्थानीय मौसमी दबाव का क्षेत्र सक्रिय नहीं हो पाया, जिससे इसकी गति थम गई थी।
मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि मुंबई में मानसून के देरी से पहुंचने का असर पूरे महाराष्ट्र के जल स्तर और कृषि गतिविधियों पर पड़ा है। हालांकि, परिस्थितियों में आए ताजा सुधारों को देखते हुए मौसम विभाग को पूरा भरोसा है कि अगले 48 घंटों के दौरान मुंबई सहित महाराष्ट्र के बचे हुए हिस्सों, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और बिहार के शेष क्षेत्रों में मानसून के कदम मजबूती से आगे बढ़ जाएंगे।
देशभर में बारिश की भारी किल्लत और क्षेत्रीय आंकड़े
जून के महीने में कमजोर मानसून की वजह से देश के अधिकांश राज्यों में फसलों की बुवाई और जल भंडारों पर नकारात्मक प्रभाव देखा जा रहा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 22 जून तक पूरे देश में सामान्य रूप से 106 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जानी चाहिए थी, लेकिन वास्तव में केवल 60.6 मिलीमीटर बारिश ही रिकॉर्ड की गई है। यह आंकड़ा मानसूनी बारिश के सामान्य औसत से लगभग 43 प्रतिशत कम है।
देश के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में मानसूनी बारिश की औसत कमी और जल संसाधनों की स्थिति को समझने के लिए भारतीय मौसम विभाग (IMD) की ओर से जारी किए गए क्षेत्रीय आंकड़ों की विस्तृत जानकारी इस तालिका में देखी जा सकती है:
बंगाल की खाड़ी में मौसमी सिस्टम की कमी और उत्तर भारत का हाल
आईएमडी के वरिष्ठ वैज्ञानिक और जलवायु निगरानी समूह के प्रमुख डॉक्टर ओ.पी. श्रीजीत ने बताया कि पश्चिमी तट पर मानसून में थोड़ा सुधार जरूर देखा गया है, जैसी कि हमने पहले ही भविष्यवाणी की थी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर अब भी कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) नहीं बना है। यह मौसमी सिस्टम जून के अंत में ही बन पाएगा, जिसके बाद मानसून की गति में वास्तविक सुधार होगा।
निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने भी इस स्थिति पर अपनी राय साझा की है। उनका कहना है कि पश्चिमी तट पर मानसून का दोबारा सक्रिय होना अच्छी खबर है, लेकिन यह सुधार अभी शुरुआती चरणों में ही है। बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र 29 जून के आसपास विकसित होने की संभावना नजर आ रही है, जिससे आने वाले दिनों में देश के पूर्वी हिस्सों में बारिश तेज होगी।












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