महाराष्ट्र सरकार के एक आदेश से मुंबई के बस-टैक्सी वाले परेशान, बोले-असंभव
मुंबई, 30 नवंबर: महाराष्ट्र सरकार के एक आदेश को लेकर मुंबई में बेस्ट की बसों और काली-पीली टैक्सी चलाने वाले लोग परेशान हैं। सरकार ने आदेश दिया है कि उन्हें सिर्फ ऐसी ही सवारी बिठानी है, जो कोरोना वायरस की दोनों वैक्सीन लगवा चुके हों। लेकिन, बस और टैक्सी ड्राइवरों और कंडक्टरों की शिकायत है कि अगर वह ऐसा करने लगेंगे तो उनका काम करना असंभव हो जाएगा। यही नहीं बेस्ट के स्टाफ कह रहे हैं कि इससे डिपो में और बस स्टॉप पर भारी भीड़ जुट जाएगी और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी नहीं हो पाएगा। हालांकि, अब बेस्ट के अधिकारियों ने कहा है कि वह इस समस्या का समाधान ढूंढ़ने में लग गए हैं।

मुंबई के बस-टैक्सी वाले परेशान
बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (बीईएसटी-बेस्ट) ने अपने 27 बस डिपो से कहा है कि वह महानगर के बसों में यात्रियों का वैक्सिनेशन सर्टिफिकेट की जांच के बाद ही उन्हें बैठने दें। लेकिन, यात्री और बस वाले इस आदेश की तामील को लेकर संदेह जता रहे हैं। उन्हें यह भी चिंता है कि इसका मतलब होगा बस डिपो और बस स्टॉप पर ज्यादा भीड़ जुटना, यात्रियों की लंबी कतारें लगना और बस संचालन में देरी होना। दरअसल, महाराष्ट्र सरकार की उद्धव ठाकरे सरकार ने पिछले शनिवार को आदेश जारी किया है कि केवल उन्हीं यात्रियों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सवारी करने दी जाएगी, जो कोविड वैक्सीन की दोनों खुराक ले चुके होंगे।

'सभी यात्रियों का सर्टिफिकेट चेक करना असंभव'
बस ऑपरेटरों और काली-पीली टैक्सी वालों को इस आदेश की तामील को लेकर संदेह तो हो ही रहा है, उनका यह भी कहना है कि वह पहले ही लॉकडाउन की वजह से काफी भुगत चुके हैं और वह सिर्फ वैक्सिनेटेड यात्रियों को ही चढ़ाने लगेंगे तो और झमेले में पड़ जाएंगे। बेस्ट के एक कंडक्टर ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि 'हमें इस तरह के आदेश के बारे में अबतक तो नहीं पता है, लेकिन सभी यात्रियों की जांच करना लगभग असंभव है। जांच करके ही यात्रियों को बैठने देने का मतलब है कि बस स्टॉप पर लंबी लाइन लग जाएगी, खासकर के दफ्तर के समय पर। '

'तामील कराना व्यवहारिक नहीं हो पाएगा'
वहीं यात्रियों का कहना है कि सिर्फ कोविड का टीका लगाने वालों को ही बसों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सवारी करने देने का कदम वैसे तो अच्छा है, लेकिन इसे लागू कर पाना मुश्किल है। एक ऐसे ही मुंबईकर ने कहा, 'तामील कराना व्यवहारिक नहीं हो पाएगा, व्यस्त समय में यात्रियों की संख्या की वजह से।' वहीं मुंबई ग्राहक पंची के चेयरमैन शिरीष देशपांडे का कहना है कि सरकार का कदम तो सराहनीय है, लेकिन पैसेंजर को अपने रिस्क पर यात्रा करने देना चाहिए। उनके मुताबिक, 'सरकार कड़े कदम उठा सकती है और फाइन भी लगा सकती है, लेकिन कुछ पाबंदियां अनुचित हो सकती हैं। बस स्टॉप के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग में भी तो दिक्कत हो सकती है।'

सर्टिफिकेट जांचने की व्यवस्था करेंगे- बेस्ट
हालांकि, बेस्ट के अधिकारियों ने कहा है कि आने वाले दिनों में इसे लागू करने की प्रक्रिया विकसित की जाएगी। बेस्ट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'राज्य सरकार के शुरुआती आदेश को डिपो मैनेजरों को दे दिया गया है। हम एक प्रक्रिया विकसित करेंगे कि किस तरह से वैक्सीन सर्टिफिकेट की जांच की जा सकती है।' टैक्सी यूनियन का कहना है कि उन्होंने ड्राइवरों से कहा है कि वह 'नो वैक्सिनेशन, नो राइड' की तख्ती लगाएं, लेकिन ड्राइवरों के लिए वैक्सिनेशन सर्टिफिकेट चेक करना असंभव है। मुंबई टैक्सीमेन यूनियन के नेता अल काद्रोस ने कहा, 'लॉकडाउन के दौरान ड्राइवरों को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। सभी यात्रियों का सर्टिफिकेट जांचना असंभव है, क्योंकि इससे उनका नुकसान और बढ़ेगा। टैक्सी ड्राइवर कोरोना वायरस के सभी प्रोटोकॉल का पालन करेंगे।'(तस्वीरें- सांकेतिक)












Click it and Unblock the Notifications