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हिंदी पर हंगामा, मराठी स्कूलों में छाया सन्नाटा! मुंबई में बंद होने की कगार पर 34 स्कूल, वजह कर देगी हैरान

Mumbai Marathi medium schools: एक तरफ महाराष्ट्र में नई शिक्षा नीति के तहत हिंदी को अनिवार्य किए जाने पर सड़कों से सदन तक मराठी अस्मिता की दुहाई दी जा रही है, तो दूसरी तरफ मुंबई के मराठी माध्यम स्कूलों में दाखिले घटते जा रहे हैं। भाषा पर 'संकट' का शोर तेज है, लेकिन उन्हीं मराठी स्कूलों के दरवाजे चुपचाप बंद होने की कगार पर हैं - सवाल यह है कि असली खतरा बाहर से है या भीतर की उदासीनता से?

गौरतलब है कि मुंबई में चौंतीस मराठी माध्यम के निजी सहायता प्राप्त स्कूल बंद होने की कगार पर हैं। राज्य शिक्षा विभाग के 20:1 छात्र-शिक्षक अनुपात नियम और वर्षों से लगातार गिरते नामांकन के कारण यह संकट उत्पन्न हुआ है, जिससे इन स्कूलों का अस्तित्व खतरे में है।

Mumbai Marathi medium schools

एक कक्षा में महज 10 छात्र कर रहे पढ़ाई

महामुंबई शिक्षण संस्था के अध्यक्ष सदानंद रावराणे ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की। मीडिया से बात करते हुए उन्‍होंने कहा, "कई मराठी माध्यम के स्कूलों में प्राथमिक कक्षाओं में कुल छात्रों की संख्या मात्र 50 है। इसका मतलब है कि पांच कक्षाओं में औसतन प्रति कक्षा केवल 10 छात्र हैं।"

20:1 नियम से मराठी स्‍कूल पर छाया संकट

2024 के सरकारी प्रस्ताव के तहत 20:1 छात्र-शिक्षक अनुपात अनिवार्य है, लेकिन कम नामांकन के कारण स्कूल इस मानक को पूरा नहीं कर पा रहे। रावराणे के अनुसार, स्कूलों ने शिक्षकों की आवश्यकता भेजी, पर शिक्षा विभाग ने मंजूरियां नामंजूर कर दीं। पश्चिमी उपनगरों के 34 स्कूल सबसे ज्यादा प्रभावित

बंद होने की कगार पर खड़े सभी 34 स्कूल पश्चिमी उपनगरों में स्थित निजी सहायता प्राप्त संस्थान हैं। इन स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा विभाग द्वारा की जाती है। फ्री प्रेस जरनल रिपोर्ट के अनुसार एक स्कूल के अध्यक्ष ने बताया कि उनके यहां चार अलग-अलग कक्षाओं के लिए केवल दो शिक्षक हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब शिक्षकों जैसी बुनियादी जरूरत के लिए संघर्ष करना पड़े, तो शिक्षा की गुणवत्ता और बुनियादी ढांचे को कैसे बनाए रखा जा सकता है?

Mumbai Marathi medium schools

गिरता नामांकन और बढ़ता दबाव

मराठी अभ्यास केंद्र के सदस्य सुशील शेजुल ने कहा कि फिलहाल उन्हीं स्कूलों ने शिक्षकों की मांग भेजी है, जहां तत्काल जरूरत है। जैसे-जैसे शिक्षक सेवानिवृत्त होंगे या पद रिक्त होंगे, अन्य स्कूल भी इसी संकट का सामना करेंगे।
उन्होंने बताया कि पिछले साल 84 मराठी स्कूल बंद हो चुके हैं, जिससे स्थिति की गंभीरता साफ झलकती है।

सरकार पर निष्क्रियता का लगाया आरोप

मराठी अभ्यास केंद्र लंबे समय से इस मुद्दे को उठा रहा है और विरोध प्रदर्शन भी कर चुका है। शेजुल ने कहा कि सरकार को बार-बार पत्र लिखे गए, बैठकें की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब जब नागरिक निकाय में निर्वाचित प्रतिनिधि मौजूद हैं, तो वे इस मुद्दे को गंभीरता से उठाएंगे। साथ ही, स्कूल बंद होने के कारणों की जांच और समाधान के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग भी की गई है।

यदि ये स्कूल बंद हो गए तो...

रावराणे ने चेतावनी दी कि यदि ये स्कूल बंद हो गए तो आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में प्रवेश पाना बेहद कठिन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि एक बार स्कूल बंद हो जाने के बाद उन्हें पुनर्जीवित करना लगभग असंभव होगा। इसके साथ ही मराठी भाषा, संस्कृति और इतिहास पर भी गहरा असर पड़ेगा।

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