Mumbai Local Train: मुंबई लोकल में मौतों का आंकड़ा भयावह, सेंट्रल रेलवे ने कोर्ट में बयां किया सच
Mumbai Local Train: मुंबई लोकल ट्रेन में यात्रा करने वाले लोगों के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। पिछले कुछ सालों में सेंट्रल रेलवे की पटरियों पर 8,273 लोगों की जान गई है। यह जानकारी सेंट्रल ने रेलवे ने उच्च न्यायालय में एक हलफनामे के जरिए दी है।
सेंट्रल और पश्चिम रेलवे की लोकल ट्रेनों में दुर्घटनाओं के कारण हर साल कई यात्रियों की जान चली जाती है। न्यायालय में एक जनहित याचिका पर सुनवाई चल रही थी, जिसमें मांग की गई थी कि रेलवे को यात्रियों की मौत को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए जाएं।

3,151 लोगों की मौत रेलवे ट्रैक पार करते समय हुई
इस हलफनामा में बताया 2021 से मई 2025 तक लोकल ट्रेनों से गिरकर 777 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 3,151 लोगों की मौत रेलवे ट्रैक पार करते समय हुई। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने अगली सुनवाई तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी है।
Zero Death का लक्ष्य, लेकिन हकीकत डरावनी
सेट्रल रेलवे ने अपने हलफनामे में दावा किया है कि 2021 में गठित एक उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के अनुसार, 'ज़ीरो डेथ' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कई उपाय किए गए हैं और कुछ को लागू भी किया गया है। रेलवे ने अपने हलफनामे में कई परियोजनाओं और उन्हें पूरा करने की समय सीमा का भी उल्लेख किया है। साथ ही, न्यायालय को परियोजनाएं पूरी करने में आने वाली बाधाओं के बारे में भी बताया गया है।
साढ़े 7 साल में गई 8,273 जानें
सेंट्रल रेलवे के अनुसार, जनवरी 2018 से मई 2025 के बीच, साढ़े सात वर्षों में 8,273 यात्रियों की मौत हुई है। इनमें से ज्यादातर मौतें ट्रैक पार करते समय और चलती ट्रेन से गिरने के कारण हुईं। हालांकि, रेलवे ने यह भी दावा किया है कि पिछले कुछ वर्षों में मृत्यु दर में कमी आई है।
मुंब्रा रेल हादसे की जांच में क्या हुआ?
वहीं सेट्रल रेलवे (सीआर) ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया है कि मुंब्रा रेल हादसे की जांच के लिए गठित टीम द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट की वर्तमान समय में आंतरिक समीक्षा हो रही है। यह खुलासा 12 जुलाई को सीआर द्वारा यात्री कार्यकर्ता यतिन जाधव द्वारा दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) के जवाब में दायर एक हलफनामे में किया गया था। याद रहे ये दुखद घटना, जो 9 जून, 2025 को हुई थी, में मुंब्रा स्टेशन पर एक मोड़ के पास दो चलती ट्रेनों से गिरने के बाद कई लोगों की जान चली गई थी।
क्यों हो रही रेलवे प्रोजेक्ट पूरा करने में देरी?
मध्य रेलवे ने अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि भूमि अधिग्रहण और अतिक्रमण हटाने जैसी समस्याओं के कारण परियोजना में देरी हो रही है। अतिक्रमण हटाते समय निवासियों के विरोध का भी सामना करना पड़ता है। रेलवे का कहना है कि इन कारणों से होने वाली देरी को रेलवे की निष्क्रियता नहीं समझा जाना चाहिए।












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