Mumbai: बुलढाणा के तीन गांव में अचानक लोग होने लगे गंजे, गंभीर हेयर फॉल की समस्या से दहशत में लोग, जानिए मामला
Mumbai: महाराष्ट्र से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। बुलढाणा जिले की शेगांव तहसील के तीन गांवों बोंडगांव, कालवाड़ और हिंगना, में पिछले एक सप्ताह के दौरान 55 से अधिक लोगों को अचानक बाल झड़ने की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा है।
यह समस्या इतनी गंभीर है कि कुछ ही दिनों में लोग पूरी तरह से गंजे हो जा रहे हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित लोगों की संख्या और बढ़ सकती है। बोंडगांव के सरपंच रमेश्वर ढरकर ने बताया कि यह मामला 2 जनवरी को सामने आया, जब एक ही परिवार की तीन महिलाओं को अचानक बाल झड़ने की समस्या हुई।

उन्हें पास के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने इसे किसी हेयर वॉश प्रोडक्ट का दुष्प्रभाव बताया। लेकिन जब दूसरे घरों में भी ऐसी ही समस्या सामने आई, तो जिला अधिकारियों को सूचित किया गया।
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बाल झड़ने से परेशान गांववाले
बोंडगांव के निवासी दिगंबर इमाले ने कहा, "यह समस्या इतनी गंभीर है कि बाल हल्के से छूने या खींचने पर झड़ जाते हैं। कुछ ही दिनों में कई लोग पूरी तरह गंजे हो गए हैं।" एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि स्थानीय डॉक्टर इस समस्या से हैरान हैं और इलाज के लिए सरकारी अस्पताल जाने की सलाह दे रहे हैं। हालांकि, वहां भी डॉक्टरों ने ऐसी समस्या पहले कभी नहीं देखी और बुधवार तक कोई दवाई उपलब्ध नहीं कराई।
टेस्ट के लिए सैंपल पुणे भेजे गए
सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य अधिकारियों की एक टीम प्रभावित गांवों में भेजी। तहसील स्तर की मेडिकल अधिकारी डॉ. दीपाली भायकर ने बताया, "पानी, बाल और त्वचा के नमूने परीक्षण के लिए पुणे की लैब में भेजे गए हैं। फिलहाल, प्रारंभिक जांच पानी की गुणवत्ता पर केंद्रित है।"
फंगल संक्रमण का संदेह
जिला मेडिकल अधिकारी डॉ. अमोल गीते ने कहा कि बुधवार को 51 नमूने एकत्र किए गए। उन्होंने इसे फंगल संक्रमण होने की संभावना जताई। उन्होंने कहा, "हम एहतियात बरत रहे हैं और प्रभावित लोगों को प्रारंभिक उपचार दे रहे हैं। परीक्षण के नतीजों के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।"
हालांकि, बुलढाणा के जिला कलेक्टर किरण पाटिल ने पानी की गुणवत्ता को समस्या की वजह मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा, "गांवों में लंबे समय से यही पानी इस्तेमाल हो रहा है। हाल के वर्षों में हम टैंकर के जरिए पीने का पानी मंगवाते हैं। नमूनों के नतीजे आने के बाद आगे की योजना बनाई जाएगी।"
डॉ. संजय महाजन, जो क्षेत्र में 24 वर्षों से कार्यरत हैं, ने बताया, "यह संभवतः फंगल संक्रमण है, लेकिन इसके प्रकार का पता परीक्षण के बाद ही चलेगा। गांवों में खारे पानी का इस्तेमाल होता है, और अगर बालों को अच्छे से नहीं सुखाया जाए तो नमी जड़ों में संक्रमण पैदा कर सकती है।"
गांव के पानी का इस्तेमाल किया बंद
उन्होंने कहा कि अधिकतर प्रभावित लोग मजदूर वर्ग के हैं, जो व्यस्तता के कारण स्वच्छता का ध्यान नहीं रख पाते। आमतौर पर ऐसे 3-4 मामले सालाना आते हैं, लेकिन इस बार यह बड़ी संख्या में फैला है। महाजन ने पर्यावरणीय बदलाव जैसे ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ी हुई बारिश का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये बदलाव भूजल की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं और ऐसी समस्याओं की वजह बन सकते हैं।
गांववाले अब चिंतित हैं और स्थानीय पानी का इस्तेमाल बंद कर पास के क्षेत्रों से पानी ला रहे हैं। सभी सरकारी जांच के नतीजों और इस रहस्यमयी बीमारी का हल तलाशने का इंतजार कर रहे हैं।
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