Mumbai BMC Election 2026: बीएमसी की जंग: ठाकरे बंधु बनाम फडणवीस-शिंदे का विकास मॉडल, किसकी होगी जीत?
BMC Election 2026: महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिकाओं, जिनमें देश की सबसे प्रतिष्ठित बृहद मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) भी शामिल है, के लिए बड़े नागरिक चुनाव 15 जनवरी को होने जा रहे हैं। पिछले साल विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन की शानदार जीत के बाद, यह चुनाव राज्य की राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। मतदान गुरुवार को होगा और मतगणना शुक्रवार को की जाएगी।

बीएमसी चुनाव मैदान में 1,700 उम्मीदवार
मुंबई में 227 वार्डों के लिए मतदान होगा, जहां लगभग 1,700 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। बीएमसी चुनावों में कुल 1,03,44,315 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 55,16,707 पुरुष, 48,26,509 महिलाएं और 1,099 अन्य मतदाता शामिल हैं।
शिवसेना का बदला हुआ राजनीतिक परिदृश्य
अविभाजित शिवसेना कभी बीएमसी की सबसे मजबूत शक्ति थी। पिछली बार उसने भाजपा के साथ गठबंधन में 84 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा को 82 सीटें मिली थीं। हालांकि, 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं।
ठाकरे बंधु: खोई विरासत को बचाने की लड़ाई
राज और उद्धव ठाकरे के लिए यह चुनाव केवल स्थानीय निकाय का नहीं, बल्कि राजनीतिक अस्तित्व और ठाकरे विरासत को बचाने की लड़ाई है। यह चुनाव यह भी तय करेगा कि मुंबई और महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे उपनाम का प्रभाव अभी कायम है या नहीं।
MNS का सफर और सीमित प्रभाव
राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने 2009 के बीएमसी चुनावों में 19 सीटें जीतकर प्रभावशाली शुरुआत की थी। हालांकि, इसके बाद विधानसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा है।
शिवसेना (यूबीटी) को विभाजन का नुकसान
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को पार्टी विभाजन का सबसे बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। पिछले विधानसभा चुनावों में 288 सीटों वाले सदन में पार्टी को केवल 20 सीटें मिलीं। ऐसे में दोनों ठाकरे भाइयों का साथ आना 'अंतिम दांव' के रूप में देखा जा रहा है।
'मराठी मानुष' बनाम विकास का नैरेटिव
ठाकरे बंधुओं ने चुनाव को 'मराठी मानुष' बनाम भाजपा-शिवसेना के कथित कॉर्पोरेट गठजोड़ की लड़ाई के रूप में पेश किया है। उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर नकारात्मक राजनीति और मराठी समाज को बांटने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि "अगर हम बंटेंगे, तो खत्म हो जाएंगे," और मराठी लोगों से एकजुट रहने की अपील की।
राज ठाकरे का तीखा संदेश
राज ठाकरे ने इसे मराठी मानुष के लिए "आखिरी चुनाव" बताते हुए मतदाताओं से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने मतदान प्रक्रिया पर नजर रखने, बूथ लेवल एजेंटों को सतर्क रहने और फर्जी वोटिंग रोकने की बात कही।
उद्धव का भाजपा पर हमला और बालासाहेब की विरासत
उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर 'अदानीकरण' और मुंबई की पहचान बदलने का आरोप लगाया। उन्होंने बालासाहेब ठाकरे की विरासत का हवाला देते हुए कहा कि अब 'फूट के अभिशाप' को दफन करने का समय आ गया है।
महायुति का विकास मॉडल
भाजपा, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे विकास पर जनमत संग्रह बताया। मुंबई मेट्रो, कोस्टल रोड और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाएं उनके प्रचार का केंद्र हैं।
फडणवीस का जवाब: मराठी और विकास साथ-साथ
फडणवीस ने स्पष्ट किया कि मराठी भाषा और मराठी लोगों का विकास उनकी सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने विपक्ष पर भाषाई आधार पर समाज को बांटने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने रोजगार और आवास के जरिए मराठी लोगों को मुंबई में स्थायित्व दिया है।
शिंदे का भरोसा: भगवा की जीत तय
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि मराठी गौरव कभी खतरे में नहीं रहा है और न रहेगा। उन्होंने दावा किया कि महायुति बीएमसी में सत्ता हासिल करेगी।
एनसीपी और कांग्रेस: सीमित प्रभाव, उलझे गठबंधन
एनसीपी और कांग्रेस भी चुनाव मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला महायुति और ठाकरे बंधुओं के बीच माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि अजित पवार की एनसीपी पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में शरद पवार की एनसीपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है।
अन्य प्रमुख नगर निगमों में भी मतदान
मुंबई के अलावा ठाणे, नवी मुंबई, नासिक, पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, नागपुर, छत्रपति संभाजीनगर सहित कई बड़े शहरों में भी गुरुवार को मतदान होगा।
गठबंधनों की अग्निपरीक्षा
राज्य में बहुदलीय राजनीति के इस दौर में ये नगर निकाय चुनाव भविष्य के राजनीतिक गठबंधनों की दिशा तय करेंगे। क्या ठाकरे अपने अघाड़ी सहयोगियों से दूरी बनाएंगे, और क्या महायुति चुनाव परिणामों के बाद भी एकजुट रहेगी-इन सभी सवालों के जवाब मतपेटियों में बंद हैं।












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