महाराष्ट्र: कोबरा की मदद से 37 करोड़ पाने के लिए रची गहरी साजिश, अमेरिका से आए अधिकारी तब हुआ राज का पर्दाफाश
अहमदनगर, 26 अक्टूबर। अमेरिकी बीमा कंपनी के जांच अधिकारी 50 लाख डॉलर (37.5 करोड़) के क्लेम की पड़ताल करने महाराष्ट्र में अहमदनगर जिले के गांव में पहुंचे। दरअसल अमेरिका में 20 साल रहकर भारत लौटे एक शख्स प्रभाकर भीमाजी वाघचौरे की मृत्यु के बाद 50 लाख डॉलर की बीमा राशि पाने का दावा उसके परिजनों की तरफ से किया गया था। बीमा कंपनी यह पता लगाने महाराष्ट्र आई थी कि प्रभाकर वाघचौरे की मौत कैसे हुई? पुलिस से पता चला कि कोबरा के काटने से उसकी जान गई। लाश की शिनाख्त भतीजे और गांव के ही एक आदमी ने की थी। परिजनों ने इसके बाद अंतिम संस्कार कर दिया था। बीमा अधिकारी इससे संतुष्ट नहीं हुए और वो पुलिस की मदद से और गहराई से मामले की जांच में जुटे। उनका शक सही निकला। प्रभाकर वाघचौरे जिंदा मिला। फिर मृतक कौन था जिसको कोबरा से कटवाया गया था? प्रभाकर वाघचौरे कैसे खुद को मृतक साबित करने में कामयाब हुआ? जांच में पूरी कहानी परत दर परत खुलती चली गई जिसे जानकर पुलिस भी हैरान रह गई।

वाघचौरे के पड़ोसी से मिला पहला सुराग
अमेरिकी बीमा कंपनी के अधिकारी ने अहमदनगर पुलिस प्रशासन से प्रभाकर भीमाजी वाघचौरे की मृत्यु के बारे में पूरी जानकारी मांगी। पुलिस के मुताबिक, अमेरिका में 20 साल रहने के बाद 54 वर्षीय वाघचौरे इसी साल जनवरी में अहमदनगर के राजुर गांव लौटा था। 12 अप्रैल को राजुर पुलिस थाने में वाघचौरे की अस्पताल में मौत होने की सूचना दी गई। पुलिस अस्पताल पहुंची तो वहां प्रवीण नाम के शख्स ने खुद को वाघचौरे का भतीजा बताया। उसने वाघचौरे की लाश की शिनाख्त की। राजुर गांव के ही निवासी हर्षद ने भी वाघचौरे की लाश होने की पुष्टि की। मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया कि सांप के काटने से उसकी मौत हुई है। पुलिस ने भतीजे प्रवीण को वाघचौरे की लाश सौंप दी थी जिसके बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया था।

जांच में प्रवीण के भी मृत होने की बात सामने आई
बीमा अधिकारी के अनुरोध पर पुलिस फिर से इस मामले की गहराई से छानबीन में जुटी और राजुर गांव पहुंची। वहां प्रभाकर वाघचौरे के पड़ोसी को यह मालूम नहीं था कि उसकी मौत हो चुकी है। पड़ोसी महिला ने पुलिस को बताया कि सांप काटने से उसकी मौत हुई ऐसी कोई जानकारी नहीं है लेकिन अप्रैल में वाघचौरे के घर के आगे एक दिन एंबुलेंस आई थी। पुलिस ने वाघचौरे की लाश की शिनाख्त करने वाले हर्षद और प्रवीण की तलाश शुरू की। हर्षद मिल गया जिसने पुलिस को बताया कि कोरोना से प्रवीण की मौत हो गई है। इसके बाद पुलिस का शक और गहराया। उसने वाघचौरे की कॉल रिकॉर्ड्स को खंगालना शुरू किया तो चौंकाने वाली बात पता चली कि वह जिंदा है और अपने नए घर में रह रहा है।

तो फिर जिसको सांप ने काटा था, वो कौन था?
पुलिस ने जीवित प्रभाकर वाघचौरे और उसके चार साथियों को गिरफ्तार कर लिया और इस मामले में 37.5 करोड़ की बीमा राशि पाने के लिए जो मर्डर प्लान सामने आया, वो पुलिस को भी चकरा देने वाला था। जिसको सांप ने काटा था, उसका पता भी पुलिस ने लगा लिया। उसका नाम नवनाथ यशवंत था। 50 वर्षीय नवनाथ उसी इलाके में रहता था और उसको सांप ने काटा नहीं था, सांप से उसे कटवाया गया था। पूरी साजिश अमेरिका रिटर्न्ड प्रभाकर वाघचौरे ने बहुत प्लानिंग कर रची थी। इसमें उसने गांव के ही चार लोगों को अपने साथ मिलाया था और उन सबको 35 लाख रुपए देने का वादा किया था।

भतीजा प्रवीण कोई और नहीं, वाघचौरे ही था
वाघचौरे ने अपनी मौत की साजिश में सबसे पहले गांव के ही संदीप तालेकार और प्रशांत चौधरी का सहयोग लिया। इन दोनों ने वाघचौरे के चेहरे से मिलते जुलते शख्स नवनाथ यशवंत को खोजा जो उसी इलाके में रहता था और पुलिस के मुताबिक, उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं थी। इसके बाद हर्षद और सपेरा हरीश को भी साजिश में शामिल किया गया। 12 अप्रैल को नवनाथ यशवंत को जबरन ये लोग एकांत में ले गए जहां सपेरे ने उसके अंगूठे में सांप से डसवा दिया। नवनाथ की मौत हो गई तो लाश को पहले वाघचौरे के घर लाया गया और फिर वहां एंबुलेंस बुलाकर अस्पताल लेकर गए। इसी एंबुलेंस को पड़ोसी महिला ने देखा था। वाघचौरे ने अस्पताल में अपना नाम प्रवीण बताया था। पुलिस को भी घटना की सूचना भतीजा प्रवीण बनकर वाघचौरे ने ही दी थी। मृत नवनाथ को वाघचौरे साबित करने की कोशिश की गई और इसमें आरोपी सफल भी हो गए। नवनाथ की लाश को ले जाकर इन सबने फूंक दिया। फिर वाघचौरे ने डेथ सर्टिफिकेट लगाकर परिजनों के नाम से 37.5 करोड़ की बीमा राशि का दावा अमेरिका के इंश्योरेंस कंपनी के पास भेज दिया।

अमेरिकी बीमा कंपनी को क्यों हुआ दावे पर शक?
इस बारे में अहमदनगर एसपी मनोज पाटिल ने कहा कि अमेरिका की इंश्योरेंस फर्म के पास जब वाघचौरे की मौत पर 50 मिलियन डॉलर की बीमा राशि पाने का दावा पहुंचा तो उसे शक हुआ। इससे पहले भी वाघचौरे ने इंश्योरेंस कंपनी के साथ 2017 में धोखा किया था। उसने पत्नी का फर्जी डेथ सर्टिफिकेट बनवाकर बीमा राशि का दावा किया था। जांच में उसकी पत्नी जीवित मिली थी। जब वाघचौरे की मौत का दावा बीमा कंपनी के पास पहुंचा तो इस धोखेबाज पर यकीन करना मुश्किल था। इंश्योरेंस कंपनी ने एक जांच अधिकारी को अहमदनगर भेजा। अगर ऐसा न किया होता तो कोबरा से डसवाकर नवनाथ की हत्या की राज का पर्दाफाश नहीं हो पा पाता।

पुलिस की गिरफ्त में सभी आरोपी
मुख्य आरोपी प्रभाकर वाघचौरे को पुलिस ने उसके नए आवास से गिरफ्त में लिया। इसके बाद उसके साथी संदीप, प्रशांत, हर्षद और सपेरे हरीश को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि प्रभाकर वाघचौरे 20 सालों से अमेरिका में रह रहा था इसलिए गांव के लोग उसको ठीक से पहचानते नहीं थे। जब वह गांव लौटा तो उसने इसी बात का फायदा उठाया। लोग उसको जानते नहीं थे, इसका लाभ लेकर उसने नवनाथ यशवंत को कोबरा से कटवाकर मार डाला और सबके सामने उसको वाघचौरे की लाश साबित भी कर दिया। लेकिन अपराध करते समय वह यह नहीं सोच पाया कि अमेरिकी बीमा कंपनी जांच करते-करते उसके घर तक पहुंच जाएगी।












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