लोकसभा चुनाव: बारामती में भाभी सुनेत्रा पवार से मुकाबले को सुप्रिया सुले ने बताई किसकी चाल?
Baramati Lok Sabha Election 2024: एनसीपी शरदचंद्र पवार की सांसद सुप्रिया सुले ने दावा किया है कि बारामाती लोकसभा सीट पर उनके और उनकी भाभी सुनेत्रा पवार के बीच जो चुनावी मुकाबला हो रहा है, वह एनसीपी संस्थापक शरद पवार को राजनीतिक रूप से खत्म करने की बीजेपी की चाल है।
रविवार को सुप्रिया सुले ने दावा कि लोकसभा चुनावों की वजह से उनके परिवार में जो एक आंतरिक द्वंद्व की स्थिति पैदा हुई है, उससे सुनेत्र पवार के प्रति उनका सम्मान कम नहीं होगा, क्योंकि वो 'उनके बड़े भाई की पत्नी हैं और मां की जैसी हैं।'

बारामती में पवार बनाम पवार
एनसीपी ने शनिवार को बारामती की सीट से राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को उम्मीदवार बनाया है, जिससे पवार परिवार की गढ़ मानी जाने वाली इस सीट का मुकाबला बेहद हाई-प्रोफाइल हो गया है। यहां शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले अपने पिता की पार्टी की उम्मीदवार के तौर पर चौथी बार चुनाव मैदान में हैं।
बड़ी भाभी को मां के समान माना जाता है- सुप्रिया सुले
पिछले साल महाराष्ट्र में शरद पवार के भतीजे अजित पवार राजनीतिक तौर पर एनसीपी के विधायकों और सांसदों के साथ उनसे अलग हो गए थे और उन्हीं की पार्टी को असली एनसीपी होने की मान्यता भी मिली है। शरद पवार का गुट अभी विपक्षी महा विकास अघाड़ी के साथ है, जबकि अजित पवार की एनसीपी महायुति गठबंधन के साथ सरकार में है।
पवार साहेब को खत्म करने की चाल- सुप्रिया सुले
सुप्रिया सुले का कहना है कि सुनेत्रा पवार उनके 'बड़े भाई की पत्नी हैं और बड़ी भाभी को मां के समान माना जाता है।' 54 वर्षीय सुले ने आरोप लगाया कि 60 साल की सुनेत्रा पवार का नामांकन विकास के लिए नहीं है, बल्कि 'यह सिर्फ पवार साहेब को खत्म करने की चाल है।'
उनका आरोप है कि बीजेपी महाराष्ट्र में 'गंदी राजनीति' में शामिल है। उन्होंने कहा कि,'जो बीत गया सो बीत गया, लेकिन मेरे लिए मेरी भाभी जिन्हें हम मराठी में वहिनी कहते हैं, मां के स्थान पर रहेंगी और उनके प्रति मेरा सम्मान पहले की तरह रहेगा।'
बारामती 1960 के दशक से है पवार परिवार का गढ़
महाराष्ट्र के पुणे जिले की बारामती लोकसभा सीट में 6 विधानसभाएं हैं और यह 1960 के दशक से शरद पवार का गढ़ रहा है। अजित पवार 1991 से बारामती के एमएलए हैं और 2019 में उन्हें यहां जितनी बड़ी जीत मिली थी, वह राज्य के चुनावी इतिहास में सबसे बड़ी जीत में से शामिल है।
पहले सुले की जीत सुनिश्चित करते थे अजित पवार
बारामती विधानसभा के विधायक होने के नाते पिछले तीन लोकसभा चुनावों से अजित पवार ने अपनी बहन सुप्रिया सुले की जीत सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई है। लेकिन, इस बार उनकी पत्नी ही यहां से सुले के खिलाफ मैदान में उतर गई हैं। अब 83 वर्षीय बुजुर्ग पवार को अपनी सियासी प्रतिष्ठा बचाने की जिम्मेदारी फिर से खुद के कंधों पर आ गई है और उन्होंने क्षेत्र का दौरान करना भी शुरू कर दिया है।
बारामती में तीसरे चरण में 7 मई को मतदान होगा। यह सीट इस बार चाचा-भतीजे की मुंछ की लड़ाई की गवाह बनने जा रही है। राज्य में लोकसभा की 48 सीटें हैं, जहां 19 अप्रैल से लेकर 20 मई तक पांच चरणों में चुनाव होंगे और 4 जून को वोटों की गिनती की जाएगी। (इनपुट-पीटीआई)












Click it and Unblock the Notifications