महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का ऐतिहासिक फैसला, 850 उद्योगों को अब 'व्हाइट कैटेगरी' में किया गया शामिल
मुंबई। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) ने राज्य में छोटे, कुटीर और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने 850 औद्योगिक गतिविधियों को 'व्हाइट कैटेगरी' (व्यावहारिक रूप से गैर-प्रदूषणकारी कैटेगरी) में शामिल किया है। 2 जनवरी को जारी प्रेस नोट के मुताबिक, यह फैसला पर्यावरणीय मंजूरियों को सरल बनाने और सूक्ष्म व लघु उद्यमों के लिए कारोबार की शुरुआत को आसान बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।

यह देश में किसी भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा व्हाइट कैटेगरी में किया गया अब तक का सबसे बड़ा इनक्लुजन है। इस कदम के साथ महाराष्ट्र ऐसा पहला राज्य बन गया है, जहां इतनी बड़ी संख्या में औद्योगिक गतिविधियों को गैर-प्रदूषणकारी श्रेणी में रखा गया है।
पर्यावरणीय अनुमति से राहत, फीस भी नहीं
MPCB के अनुसार, यह निर्णय राज्य सरकार की Ease of Doing Business नीति और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। व्हाइट कैटेगरी में आने वाले उद्योगों को पर्यावरणीय सहमति (Consent) लेने की आवश्यकता नहीं होगी और उन्हें किसी प्रकार की पर्यावरणीय फीस भी नहीं देनी पड़ेगी।
गौरतलब है कि पहले CPCB ने राष्ट्रीय स्तर पर 54 औद्योगिक गतिविधियों को व्हाइट कैटेगरी में अधिसूचित किया था। इसके बाद MPCB ने इस सूची में 222 गतिविधियां जोड़ी थीं। ताज़ा फैसले के बाद महाराष्ट्र में व्हाइट कैटेगरी के अंतर्गत औद्योगिक गतिविधियों की कुल संख्या बढ़कर 850 हो गई है।
ऑनलाइन सिस्टम से तुरंत मंजूरी
अधिकारियों के मुताबिक, इन इकाइयों के पंजीकरण के लिए अब केवल एक पेज का आवेदन पर्याप्त होगा। ऑनलाइन सिस्टम के जरिए तत्काल स्वीकृति दी जाएगी और संचालन शुरू करने के लिए स्थायी अनुमति मिलेगी। इससे पर्यावरणीय मंजूरियों के लिए लंबा इंतज़ार खत्म होगा।
घरेलू और लघु उद्योगों की लंबी सूची शामिल
विस्तारित सूची में कई घरेलू और छोटे-पैमाने की गतिविधियां शामिल हैं, जिनमें हैंडमेड ज्वेलरी निर्माण, पर्यावरण-अनुकूल अगरबत्ती और धूप निर्माण, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक असेंबली यूनिट्स, बुक बाइंडिंग, सीमेंट पाइप मोल्डिंग, बिना रासायनिक प्रोसेसिंग के लेदर और फुटवियर निर्माण, पापड़ निर्माण इकाइयां, आटा चक्की, मसाला ब्लेंडिंग यूनिट्स और ड्राई स्पाइस प्रोसेसिंग सेंटर शामिल हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी गति
MPCB का कहना है कि यह फैसला शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों के उद्यमियों के लिए फायदेमंद साबित होगा, खासकर उन लोगों के लिए जो घरेलू स्तर पर कारोबार करते हैं। बोर्ड को उम्मीद है कि इससे कुटीर और लघु उद्योगों को नई गति मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
MPCB के चेयरमैन सिद्धेश कदम ने कहा कि 850 उद्योगों को व्हाइट कैटेगरी में शामिल करने से ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार मिलेगी और छोटे कारोबारियों के लिए काम शुरू करना आसान होगा।
वहीं, मेंबर सेक्रेटरी देवेंद्र सिंह (IAS) ने बताया कि बोर्ड ने मंजूरी की समय-सीमा घटाने और डिजिटल प्रक्रियाओं को सरल बनाने को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि एकल आवेदन के जरिए स्थायी अनुमति मिलने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और छोटे उद्यमों का औपचारिकीकरण होगा।
MPCB ने यह पूरी सूची CPCB के साथ साझा की है, जिस पर केंद्रीय बोर्ड ने MPCB के पर्यावरण-अनुकूल और उद्योग-समर्थक दृष्टिकोण पर संतोष जताया है।












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