Tiger cubs: महाराष्ट्र में बाघ के शावकों के नाम पर क्यों सुलगी राजनीति?

'आदित्य' और 'विक्रम' ये दोनों नाम इस समय दुनिया भर में भारत का नाम और सम्मान बढ़ाने का काम कर रहे हैं। आदित्य एल-1 सूर्य की गतिविधियों की जानकारी देने के लिए अपने गंतव्य की यात्रा निकला हुआ है तो 'विक्रम' लैंडर ने सफलतापूर्वक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरकर और वहां से 'प्रज्ञान' रोवर की मदद से महत्वपूर्ण जानकारियां भेजकर पूरी मानवता की बहुत बड़ी सेवा में जुटा है।

लेकिन, महाराष्ट्र में इन दोनों नामों 'आदित्य' और 'विक्रम' को लेकर जमकर राजनीति हो रही है। मामला इसलिए दिलचस्प है कि यह मुद्दा बाघ के तीन शावकों से जुड़ा हुआ है, जिसको लेकर विपक्षी उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना लाल-पीली हो रही है।

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तीन शावकों के नामकरण प्रक्रिया पर राजनीति
इस विवाद की शुरुआत छत्रपति संभाजीनगर से हुई है। वहां मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री अजित पवार और प्रदेश के वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार को एक कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया था। इस कार्यक्रम में बाघ के तीन शावकों, दो नर और एक मादा का नामकरण होना था।

अजित पवार ने जो चिट निकाला उसको लेकर हो रहा है विवाद
इस मौके पर पहले सीएम शिंदे ने कांच के एक बर्तन से एक चिट निकाला। फिर डिप्टी सीएम अजित पवार को दूसरे कांच के बर्तन से ऐसा ही करने को कहा गया। पवार ने चिट निकालने के बाद मुस्कुराते हुए किसी को दिखाया। कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पीछे से आवाज आई कि 'ये तो आदित्य है'। फिर सुझाव दिया गया कि पवार को एक और कोशिश करनी चाहिए।

श्रावणी, विक्रम और कान्हा तय हुए तीनों शावकों के नाम
दूसरी कोशिश में उन्होंने जो चिट निकाला उसपर 'विक्रम' लिखे होने की बात बताई गई। आखिरकार तीनों शावकों का नाम तय कर दिया गया। मादा का नाम श्रावणी और दोनों नर में से एक का विक्रम और दूसरे का कान्हा रखा गया।

उद्धव की पार्टी ने मुद्दे को आदित्य ठाकरे से जोड़ दिया
लेकिन, विपक्ष ने इस घटना को तूल देने में देरी नहीं की और राज्य सरकार पर निशाना साध दिया। राज्य विधान परिषद में विपक्ष के नेता और उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) के नेता अंबादास दानवे ने इस मसले को फौरन अपनी पार्टी के नेता और उद्धव के बेटे आदित्य ठाकरे से जोड़ दिया।

आदित्य को कोई रोक नहीं सकता- उद्धव की पार्टी
उन्होंने कहा, 'चाहे इस दुनिया से हो या आसमान से, आदित्य (आदित्य ठाकरे की ओर इशारा) को कोई रोक नहीं सकता। यह सरकार तो उनके नाम से भी डरती है।' हालांकि, बाद में सीएम एकनाथ शिंदे ने इस विवाद को तूल न देकर कहा कि 'एक ही बार में दो चिट निकल आए थे.....इसलिए एक चिट को अलग रख दिया गया था। इसमें इससे ज्यादा कुछ भी नहीं है।'

हम किसी आदित्य से नहीं डरते- मुनगंटीवार
वहीं मुनगंटीवार बोले कि 'ऐसी मामूली बातों पर चर्चा नहीं होनी चाहिए....हम किसी आदित्य से नहीं डरते हैं।' दरअसल, महाराष्ट्र की सियासत में पिछले एक साल से कुछ अधिक समय में काफी उलटफेर हो चुका है। जो सत्ता में थे, वह विपक्ष में रहकर संघर्ष कर रहे हैं और जो विपक्ष में थे, वे सत्ता में आ चुके हैं। लेकिन, दो पार्टियां ऐसी भी हैं, जो पिछली सरकार का भी हिस्सा थीं और अभी भी सरकार में शामिल हैं।

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे शिवसेना की अगुवाई कर रहे हैं, जिसकी कमान पहले उद्धव ठाकरे के हाथों में होती थी। वहीं अजित पवार एनसीपी के एक गुट को लेकर अपने चाचा शरद पवार की पार्टी में से निकलकर आए हैं। जबकि, उद्धव ठाकरे 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा के साथ भी उसी तरह की राजनीति कर चुके हैं। यही वजह है कि राज्य में सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों की लड़ाई थोड़ी ज्यादा कड़वी हो चुकी है।

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