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Maharashtra Politics: कांग्रेस और MVA पर यू-टर्न! अब शरद पवार पर क्यों बिफरे संजय राउत?

Maharashtra Politics: शिवसेना (यूबीटी) नेता और सांसद संजय राउत महा विकास अघाड़ी (MVA) और कांग्रेस को लेकर दिए अपने बयानों पर सफाई देते नजर आ रहे हैं। उन्होंने अपने पहले के बयान पर यह कहकर सफाई दी है कि उनकी पार्टी की इंडिया ब्लॉक या महा विकास अघाड़ी (MVA) को भंग करने जैसी कोई योजना नहीं है।

महाराष्ट्र में बीजेपी के खिलाफ बने कांग्रेस, एनसीपी-एसपी और शिवसेना-यूटीबी के गठबंधन महा विकास अघाड़ी के एक अहम सूत्रधार रहे राउत ने अब दावा किया है कि उनकी पार्टी का स्थानीय निकाय चुनाव अकेले लड़ने का फैसला एक रणनीतिक कदम है, ताकि पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जा सके।

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Maharashtra Politics: इंडिया ब्लॉक या एमवीए को खत्म करने की बात नहीं की- संजय राउत

उद्धव ठाकरे की पार्टी के नेता राउत ने कहा, 'एमवीए विधानसभा चुनावों के लिए और इंडिया ब्लॉक लोकसभा चुनावों के लिए बनाया गया था।' राउत का सफाई वाला यह बयान कांग्रेस नेताओं की ओर से पलटवार के बाद आया है। कांग्रेस के नेता उनकी टिप्पणी पर भड़क गए थे।

राउत अब यह कहने की कोशिश में हैं , 'स्थानीय निकाय चुनाव का मकसद पार्टी कार्यकर्ताओं को मजबूत बनाना और जमीनी स्तर पर संगठन को सशक्त करना है। मैंने या मेरी पार्टी ने कभी भी इन गठबंधनों को भंग करने की बात नहीं की।'उनका कहना है कि पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि 'जलता हुआ मशाल'(पार्टी का चुनाव निशान) जमीनी स्तर के मतदाताओं तक पहुंचे।'

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के बाद से एमवीए दलों में मचा है सियासी घमासान

दरअसल, 2024 के लोकसभा चुनावों में तो महाराष्ट्र में एमवीए या इंडिया ब्लॉक का प्रयोग सफल रहा था और यह राज्य की 48 में से 30 सीटें जीत गया था। लेकिन, 6 महीने बाद ही पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में इनका दांव उलटा पड़ गया।

288 सीटों में से एमवीए मात्र 48 सीटें ही जीत सका और महायुति ने 230 से भी ज्यादा सीटें जीत लीं। इसी नतीजे के बाद से कांग्रेस, एनसीपी (एसपी) और शिवसेना (यूबीटी) के भीतक घमासान मचा हुआ दिखा है।

इस घमासान को शरद पवार की पार्टी यानी एनसीपी (एसपी) के सांसद अमोल कोल्हे ने और ज्यादा उजागर किया है। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में तालमेल के अभाव को गठबंधन के खराब प्रदर्शन के लिए बहुत बड़ा जिम्मेदार बताया है।

Maharashtra Politics: उद्धव की पार्टी के नेता ने शरद पवार पर साधा निशाना

इसी के बाद संजय राउत ने उनकी पार्टी के सुप्रीमो शरद पवार पर ही निशाना साध दिया है। महा विकास अघाड़ी बनाने में राउत और पवार की भूमिका सबसे बड़ी रही है और विधानसभा चुनावों के नतीजे आने से पहले तक उद्धव की पार्टी के यह नेता शरद पवार के सियासी हनुमान की भूमिका में नजर आ रहे थे।

लेकिन, अब उन्हें भी बुजुर्ग पवार के फैसले खटकने शुरू हो गए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बीड और परभणी में शांति बहाली को लेकर उनकी बातचीत के लिए उनकी खिंचाई की है।

राउत ने कहा है, 'सरपंच संतोष देशमुख और सोमनाथ सूर्यवंशी के हत्यारों को बचाकर शांति नहीं आ सकती।' दरअसल, पवार का कहना है कि राज्य में शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी अकेले मुख्यमंत्री की नहीं हो सकती, यह हम सबकी जिम्मेदारी है। जबकि, इससे पहले खुद उद्धव भी अपने बेटे आदित्य ठाकरे के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात करके आ चुके हैं।

Maharashtra Politics: शरद पवार पर क्यों बिफरे संजय राउत?

दरअसल, पूरे पांच साल की बात है। राजनीति में यह कम समय नहीं है। केंद्र और राज्य दोनों ही नई सरकारें हैं और फिलहाल अगले पांच साल तक उन्हें किसी तरह का खतरा होगा, इसकी कोई आशंका नहीं लग रही है। ऐसे में पहले उद्धव का मुख्यमंत्री से मिलकर सियासी गिला-शिकवा दूर करने की कोशिश करना और फिर शरद पवार जैसे दिग्गज का उनको लेकर नजरिया बदलना राजनीतिक गोटियां सेट करने के अपने-अपने तरीके मालूम पड़ रहे हैं।

लेकिन, इन सबके बीच लगता है कि संजय राउत कहीं न कहीं खुद को बहुत उपेक्षित महसूस करने लगे हैं, जिन्हें विधानसभा चुनावों के बाद उनकी पार्टी में भी पहले जितना भाव मिलता नहीं दिख रहा है।

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