Maharashtra Politics: रवींद्र चव्हाण को क्यों बनाया महाराष्ट्र BJP का कार्यकारी अध्यक्ष? पढ़िए 5 वजह
Maharashtra Politics: बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने चार बार के एमएलए रवींद्र चव्हाण को महाराष्ट्र में पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। दरअसल, पार्टी के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सरकार में मंत्री बन चुके हैं और बीजेपी में एक नेता, एक पद की परंपरा रही है। जब मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपनी कैबिनेट में रवींद्र चव्हाण को जगह नहीं दी थी, तभी वनइंडिया ने इसकी संभावना जताई थी कि उन्हें राज्य में पार्टी की कमान सौंपी जा सकती है।
शनिवार को ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने एलान किया था कि 'हमने रवींद्र चव्हाण को महाराष्ट्र प्रदेश बीजेपी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है।' इंडियन एक्सप्रेस ने भाजपा सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि 54 वर्षीय नेता का पूर्ण रूप से प्रदेश अध्यक्ष बनने की दिशा में यह पहला कदम है। पूरे देश में भाजपा में अभी संगठनात्मक चुनाव हो रहे हैं और इसी महीने के अंत तक या अगले महीन की शुरुआत में नड्डा की जगह भी नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव भी होना है।

Maharashtra Politics: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बेहद करीबी नेता हैं रवींद्र चव्हाण
रवींद्र चव्हाण मुंबई की डोंबीवली विधानसभा सीट से लगातार चौथी बार चुने गए हैं। उन्हें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बहुत ही करीबी नेता माना जाता है। इसलिए,जब उन्हें कैबिनेट में शामिल नहीं किया गया था, तभी सभावनाएं पैदा हुई थीं कि उन्हें प्रदेश संगठन में सबसे बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। खासकर चंद्रशेखर बावनकुले के मंत्री बनने के बाद इसकी संभावनाएं काफी बढ़ गई थीं।
Maharashtra Politics: मराठा समुदाय को अच्छा संदेश देने की कोशिश
इस बार के विधानसभा चुनावों और उससे पहले महाराष्ट्र की महायुति सरकार के दौरान मराठा मुद्दा भाजपा की अगुवाई वाले गठबंधन के लिए सबसे बड़ी परेशानी की वजह रहा था। मराठा आंदोलनकारी मनोज जारांगे पाटिल ने महायुति सरकार और विशेष रूप से तत्कालीन उपमुख्यमंत्री फडणवीस की नाक में दम कर रखा था।
माना जा रहा है कि इसी वजह से पार्टी ने संगठन के सबसे महत्वपूर्ण पद पर मराठा नेता को बिठाया है, जो सीएम के करीबी भी हैं। इससे समुदाय में अच्छा संदेश जाने की उम्मीद है।
Maharashtra Politics: रवींद्र चव्हाण की नतीजे देने वाले नेता की छवि
जानकारों की मानें तो अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाने वाली अपनी छवि की वजह से चव्हाण भाजपा के शीर्ष नेताओं की नजरों में आए हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि उन्हें जो डिलिवर करने के लिए कहा जाता है, उसे वह 'बिना सवाल पूछे पूरा करके' देते हैं।
बावनकुले ने भी उनको मिली नई जिम्मेदारी को लेकर कहा है, 'वे पार्टी के एक वफादार और प्रतिबद्ध कार्यकर्ता हैं..उन्हें जो भी काम सौंपा जाता है, वह पूरे लगन से और बिना किसी सवाल के करते हैं। इस वजह से संगठन के साथ-साथ पार्टी के नेता भी उन्हें पसंद करते हैं।'
Maharashtra Politics: राजनीति में चतुर खिलाड़ी बनने की क्षमता
अबतक के राजनीतिक करियर में चव्हाण ने अपनी छवि एक जुझारू और चतुर नेता के तौर पर विकसित की है। उन्हें पता है कि कब विरोधियों पर हमला बोलना है और कब नहीं। पिछले साल दिसंबर में उन्हें पार्टी की सदस्यता अभियान की जिम्मेदारी मिली और उन्होंने 1.5 करोड़ सदस्य बनाकर अपनी क्षमता का परिचय दिया।
एक वरिष्ठ बीजेपी नेता के मुताबिक, 'जब पार्टी सत्ता में है तब संगठनात्मक भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि अब बहुत ही बेहतरीन तालमेल की जरूरत होती है।'
Maharashtra Politics: रवींद्र चव्हाण से बीजेपी को भविष्य में उम्मीदें?
विधानसभा चुनावों के बाद बीएमसी और अन्य स्थानीय निकायों के चुनाव बीजेपी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं। इसमें उनकी भूमिका भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के साथ-साथ महायुति के प्रमुख नेता के तौर पर भी बहुत खास रहने वाली है।
क्योंकि, बीजेपी महाराष्ट्र में सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए पार्टी के बेहतर प्रदर्शन को लेकर उनसे काफी ज्यादा उम्मीदें होंगी। राज्य के 36 जिलों और 355 तालुकाओं में पार्टी संगठन को नई धार देना भी उनका बड़ा उत्तरदायित्व बन चुका है।
चव्हाण 2000 में कल्याण-डोंबीवली नगर निगम में पार्षद रह चुके हैं और स्टैंडिंग कमेट की भी अध्यक्षता कर चुके हैं। वह 2009 से ही डोंबीवली विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।












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