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Maharashtra New CM: एकनाथ शिंदे नहीं माने तो महाराष्‍ट्र सीएम बनने के लिए देवेंद्र फडणवीस कर सकते हैं ये खेला

Maharashtra New CM: महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव में बंपर जीत हा‍सिल करने वाले महायुति गठबंधन में मुख्‍यमंत्री की कुर्सी को लेकर जंग छिड़ी हुई है। महाराष्‍ट्र चुनाव में सर्वाधिक सीटें जीतने वाली भाजपा की आरे से देवेंद्र फडणवीस मुख्‍यमंत्री मुख्‍यमंत्री बनना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर महायुति गठबंधन में शामिल शिवसेना चाहती है कि एकनाथ शिंदे को दोबारा महाराष्‍ट्र का मुख्‍यमंत्री बनाया जाए।

महायुति में मुख्‍यमंत्री मुख्‍यमंत्री पर निर्णय ना हो पाने के कारण चुनाव परिणाम आने के तीन दिन बाद भी चुनाव में बंपर जीत हासिल करने वाले महायुति गठबंधन ने अभी तक राज्‍यपाल के सामने नई सरकार बनाने का दावा पेश नहीं कर पाया है। जबकि 23 नवंबर को चुनाव परणिाम आने के बाद दावा किया जा रहा था नई सरकार का शपथ ग्रहण सोमवार को हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

Devendra Fadnavis

कुल मिलाकर इस बार भी महाराष्‍ट्र में वो ही हालात हैं जैसा कि 2019 विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि एकनाथ शिंदे नहीं माने और पिछली बार जैसे उद्धव ठाकरे की तरह सीएम पद की जिद पर अड़े रहे तो क्‍या भाजपा और देवेंद्र फडणवीस झुक जाएंगे या कोई और कोई बड़ा दांव चलेंगे? जिसके लिए देवेंद्र फडणवीस जानें जाते रहे हैं!

बता दें महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति गठबंधन में शामिल भाजपा ने सर्वाधिक 132 सीटों पर जीत हासिल की है और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 57 सीटों पर जीत हासिल की है। वहीं महायुति गठबंधन में शामिल अजित पवार की पार्टी ने 41 सीटों पर जीत हासिल की है।

गौरतलब है कि 288 सीटों वाले महाराष्‍ट्र में सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 145 सीटों का है। भाजपा के पास कुल 132 सीटें हैं, यानी सरकार बनाने के मैजिक नंबर से भाजपा महज 13 सीटों से दूर है। याद रहे पिछले 2019 के चुनाव में भाजपा और शिवसेना के एनडीए गठबंधन ने मिलकर 149 सीटों पर जीत हासिल की थी जिसमें भाजपा के पास 105 और उद्धव ठाकरे की शिवसेना के पास 57 सीटें थी।

यानी 2019 में भाजपा महाराष्‍ट्र में सरकार बनाने के लिए शिवसेना पर पूरी तरह से निर्भर थी। जिस कारण सीएम पद को लेकर उद्धव ठाकरे की 50-50 का फॉर्मूले की डिमांड भाजपा ने नहीं मानी तो ठाकरे ने एनडीए से गठबंधन तोड़कर विपक्षी कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी से हाथ मिला लिया था और महाविकास अघाड़ी गठबंधन की सरकार बना कर सीएम बनने का अरमान पूरा कर लिया था

शिंदे नहीं माने तो फडणवीस कर सकते हैं ये खेला

लेकिन 2023 में सरकार बनाने के आंकड़े से महज 13 सीट दूर भाजपा के नेतृत्‍व वाले महायुति गठबंधन में एकनाथ शिंदे की शिवसेना के अलावा अजित पवार की एनसीपी भी शामिल है जिसने 41 सीटों पर जीत हासिल की है। ऐसे में एकनाथ शिंदे और उनकी शिवसेना सीएम पद की जिद से पीछे नहीं हटते हैं तो देवेंद्र फडणवीस सीएम की कुर्सी पर बैठने के लिए रास्‍ता चुन सकते हैं। फडणवीस अजित पवार की एनसीपी के साथ सरकार का गठन आसानी से कर सकती है और सीएम की कुर्सी पर बैठ सकते हैं।

याद रहे 2019 में जब जीत के बावजूद ठाकरे की जिद के कारण सरकार बनाने का संकट आया था तब रातों रात अजित पवार को तोड़कर फडणवीस ने सरकार बनाने का दावा पेश कर सबको हैरान कर दिया था हालांकि फ्लोर टेस्‍ट में शरद पवार के दांव के कारण भाजपा फेल हो गई थी लेकिन एमवीए की सरकार के गठन के बाद ढाई साल बाद देवेंद्र फडणवीस ही थे जिन्‍होंने बदला लेते हुए एकनाथ शिंदे को तोड़ कर उद्धव ठाकरे नेतृत्‍व वाली सरकार को गिरा दी थी और एकनाथ शिंदे को सीएम पद दान में देकर महायुति सरकार का गठन किया था और खुद का डिमोशन कर उपमुख्‍यमंत्री बने थे।

इतना ही नहीं 2023 में शरद पवार के भतीजे अजित पवार और उनके समर्थक विधायकों को तोड़कर भाजपा के नेतृत्‍व वाले महायुति में शामिल करने का कमाल देवेंद्र फडणवीस ने ही किया था। वहीं 2023 के चुनाव में भाजपा और महायुति गठबंधन ने जो शानदार जीत हासिल की है उसका श्रेय फडणवीस को ही जाता है ऐसे में राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी देवेंद्र फडणवीस इस बार मुख्‍यमंत्री पद को लेकर झुकना असंभव है।

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