Maharashtra Lok Sabha Chunav: बीड में फंस गई बीजेपी! पंकजा मुंडे के लिए क्यों बहुत बड़ी चुनौती बनी यह सीट?
Maharashtra Lok Sabha Election: बीजेपी ने इस बार अपने दो बार के सांसद प्रीतम मुंडे की जगह मराठवाड़ा की बीड सीट पर उनकी बड़ी बहन पंकजा मुंडे को मौका दिया है। पंकजा अपनी मुखरता की वजह से अक्सर चर्चा में रहती हैं। लेकिन, इस बार पंकजा के लिए यह सीट आसान नहीं दिख रही है।
2019 में लोकसभा चुनाव के कुछ ही महीने बाद हुए विधानसभा चुनावों में पर्ली सीट पर पंकजा अपने चचेरे भाई और एनसीपी के धनंजय मुंडे से हार गई थीं। इस बार धनंजय, अजित पवार के साथ होने की वजह से उनके समर्थन में भी हैं, लेकिन फिर भी यह सीट भाजपा के लिए चुनौत खड़ी कर रही है।

मराठा आंदोलन ने बिगाड़ा बीड का चुनावी समीकरण
पंकजा पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के दिवंगत दिग्गज नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी हैं। दरअसल, पिछले कुछ महीनों में मराठा आरक्षण आंदोलन और इसके नेता मनोज जारांगे पाटिल के अभियानों की वजह से इस क्षेत्र में मराठा और ओबीसी समाज में एक गहरा मतभेद पैदा हुआ है। पाटिल का आंदोलन हिंसक भी हो गया था।
पंकजा के सामने खड़ी हुई है बड़ी चुनौती
हालांकि, मराठा आंदोलन के नेता ने सीधे-सीधे भाजपा के खिलाफ वोट की अपील तो नहीं की है, लेकिन वह जिसका विरोध करने को कह रहे हैं, उसका इशारा भाजपा की ही ओर है। मराठा समुदाय में पैदा की गई आरक्षण की ललक का खामियाजा इस चुनाव में पंकजा को भुगतना पड़ सकता है।
ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक मराठा समुदाय के बीच सोशल मीडिया पर इस तरह के संदेश प्रसारित हो रहे हैं कि बीड में सांसद से लेकर अधिकतर तरह के पदों पर वंजारी (ओबीसी) समुदाय का कब्जा है। संदेश यही है कि इस इलाके में बहुसंख्यक होने के बाद भी मराठा समुदाय को किस तरह से उपेक्षित रहना पड़ रहा है।
आरक्षण विवाद ने मराठा और गैर-मराठा में किया ध्रुवीकरण
कुछ मैसेज में तो मराठाओं से अपनी ताकत दिखाने के लिए एकजुट होकर बीजेपी के खिलाफ वोटिंग करने को भी कहा जा रहा है। इस तरह के माहौल को देखने से यही लग रहा है कि आरक्षण का मुद्दा यहां मराठा और अन्य समुदायों के बीच ध्रुवीकरण की बड़ी वजह बन गया है।
एक रिटायर्ड स्कूल प्रिंसिपल गोवर्धन राठौड़ ने बताया, '60 वर्षों में मैंने कभी भी मराठा और ओबीसी समुदायों में इस तरह का ध्रुवीकरण कभी नहीं देखा है। इतनी कटुता है कि इन दोनों समुदायों के लोग आपस में एक-दूसरे के साथ सामान्य व्यवहार तक नहीं करना चाहते।' राठौड़ मराठा या वंजारी में से किसी में से नहीं हैं।
मराठा समुदाय की है बड़ी आबादी
बीड में 6 लाख से ज्यादा मराठा आबादी की तुलना में वंजारी समुदाय की जनसंख्या सिर्फ 3.5 लाख के करीब है। क्षेत्र की सियासत को भांपते हुए ही शरद पवार ने एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की ओर से बजरंग सोनवाने को मौका दिया है। वह मराठा समुदाय से आते हैं। पिछले चुनाव में ये प्रीतम मुंडे से 1.68 वोटों से हारे थे, लेकिन तब भी उन्हें 5 लाख मत मिले थे।
मुस्लिम वोट और बढ़ा सकते हैं एनसीपी शरद गुट की ताकत
बीड में 3 लाख मुसलमान भी हैं। पहले बड़ी संख्या में मुस्लिम वोट गोपीनाथ मुंडे के नाम पर भी गिरते थे, लेकिन इस बार भाजपा को हराने के लिए वह पवार गुट का पावर बढ़ा सकते हैं।
बीड में एक मराठा समुदाय के व्यक्ति ने कहा, 'उन्होंने सभी पदों पर कब्जा कर लिया है। बीड के सरकारी टीचरों की नौकरियों में 80% पर ओबीसी समुदाय का कब्जा है। मराठा समुदाय को बहुसंख्यक होने के बावजूद यहां कुछ नहीं मिल रहा है।' कुछ ऐसे भी उदाहरण हैं, जब पंकजा के लिए प्रचार करने निकले बीजेपी-एनसीपी नेताओं को मराठा-बहुल गांवों में घुसने से जबरन रोक दिया गया।
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