Maharashtra Elections: विदर्भ क्षेत्र में कांग्रेस-बीजेपी में अबकी बार कौन किस पर भारी?
Maharashtra Chunav 2024: महाराष्ट्र का विदर्भ इलाका न सिर्फ विधानसभा चुनावों के बाद अगली सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, बल्कि अगले मुख्यमंत्री तय करने में भी इस क्षेत्र का रोल बहुत अहम हो सकता है। परंपरागत तौर पर विदर्भ कांग्रेस का गढ़ होता था। लेकिन, 2014 से बीजेपी ने यहां अपना दबदबा बना लिया। लेकिन, इस साल के लोकसभा चुनाव में फिर लगा कि कांग्रेस ने भाजपा से अपनी बादशाहत वापस छीन ली है।
ऐसे में इस बार विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से विदर्भ की भूमिका पर चुनावी पंडितों की नजर बने रहना स्वाभाविक है। खासकर कांग्रेस के लिए इस बार चुनौती बढ़ी हुई है, क्योंकि लोकसभा चुनावों में उसे यहां बड़ी सफलता मिली है और महा विकास अघाड़ी में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने का उसका मंसूबा यहीं से पूरा हो सकता है।

विदर्भ में लगभग 40 सीटों पर कांग्रेस-बीजेपी में टक्कर
महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों में से 62 विदर्भ में हैं, जिनमें से इस बार करीब 40 सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला नजर आ रहा है। 2019 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने यहां करीब 30 सीटों पर कांग्रेस को पछाड़ दिया था और वह इसके करीब आधे पर ही सिमट गई थी।
2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और एमवीए को मिली जबर्दस्त बढ़त
लेकिन, 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस समेत एमवीए ने यहां की 10 में से 7 सीटें जीत लीं और बीजेपी की गाड़ी 3 पर ही अटक गई। अगर उसे विधानसभा सीटों में बढ़त के हिसाब से देखें तो विपक्षी गठबंधन लगभग 42 सीटों पर आगे रहा था। इस बार हो रहे विधानसभा चुनाव में यह देखना है कि क्या एमवीए अपना प्रदर्शन दोहरा पाता है या फिर बीजेपी धमाकेदार वापसी करने जा रही है।
विदर्भ से ही चुनाव मैदान में हैं भाजपा और कांग्रेस के कई दिग्गज
यह भी तथ्य है कि महाराष्ट्र में बीजेपी और कांग्रेस के कई बड़े नेता विदर्भ क्षेत्र से ही ताल्लुक रखते हैं। बीजेपी में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और राज्य के मौजूदा उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस विदर्भ से ही चुनाव लड़ते हैं।
वहीं भाजपा से कांग्रेस में आकर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बन चुके नाना पटोले भी यहीं से ताल्लुक रखते हैं। वह खुद यहीं की साकोली सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। पटोले राहुल गांधी के करीबी हैं, इस वजह से वही हैं, जिन्हें उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) से भी टक्कर लेते हुए देखा जाता है।
विदर्भ क्षेत्र राजनीतिक विचारधाराओं का भी केंद्र
विदर्भ भाजपा और कांग्रेस के दिग्गजों का ही गढ़ नहीं है, बल्कि यहीं के नागपुर में बीजेपी के वैचारिक संरक्षक आरएसएस का मुख्यालय भी है। महात्मा गांधी का सेवाग्राम भी वर्धा में है और डॉ बीआर अंबेडकर की दीक्षाभूमि भी इसी क्षेत्र में है।
कांग्रेस का एमवीए की बड़ी जीत का दावा
कांग्रेस पार्टी का दावा है कि विदर्भ क्षेत्र में एमवीए इस चुनाव में लोकसभा से भी बेहतर प्रदर्शन करेगा। ईटी से बातचीत करते हुए नाना पटोले ने दावा किया, 'विदर्भ क्षेत्र में कांग्रेस और एमवीए ऐसे नतीजे लाएंगे जो यहां लोकसभा चुनाव में हमारे प्रदर्शन से भी अच्छे होंगे। लोग भ्रष्ट महायुति सरकार से त्रस्त हैं। लोग मोदी और शाह दोनों से नाराज भी हैं, खासकर जिस तरह से कई बड़े प्रोजेक्ट गुजरात ले जाए गए। इस बार लोग इन्हें उखाड़ फेकेंगे।'
लोकसभा चुनावों के बाद बदल चुके हैं राजनीतिक हालात
राजनीतिक पंडितों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि लोकसभा चुनावों के नतीजे देखने के बाद यहां भाजपा नेतृत्व ने जिस तरह से वापसी की कोशिशों के लिए कड़ी मेहनत की है, वह क्या रंग लाती है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और एमवीए के पक्ष में भाजपा के खिलाफ संविधान बदलने और आरक्षण खत्म करने वाले 'चुनावी शिगूफे' का दांव चल गया था।
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लेकिन, अबकी बार कांग्रेस महायुति सरकार के खिलाफ बीते करीब ढाई वर्षों की एंटी-इंकंबेंसी और किसानों के मुद्दे, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मामलों को लेकर बैठी है। लेकिन, बीजेपी को उम्मीद है कि इस बार आरएसएस ने उसके लिए जो जमीन तैयार की है, उससे उसकी वापसी तय है। इसके अलावा मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना जैसे कल्याकारी कार्यक्रमों से भी उसे पूरा भरोसा है।












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