Maharashtra Elections: महाराष्ट्र में क्यों हारा INDIA bloc? कांग्रेस की ये 5 गलतियां पड़ी भारी
Big mistakes of Congress in Maharashtra elections: महाराष्ट्र में कांग्रेस और महा विकास अघाड़ी (MVA) के साथ सिर्फ 6 महीने में ही क्या हो गया कि जीत की बुलंदियों पर पहुंचाने वाली जनता ने ही धूल चटाने में भी देरी नहीं की। लोकसभा चुनावों में कांग्रेस वहां सबसे बड़ी पार्टी और एमवीए सबसे बड़ा गठबंधन बनकर उभरा था। लेकिन,विधानसभा चुनावों में इन दोनों को उन्हीं वोटरों ने सियासी तौर पर रसातल में पहुंचाने का काम किया है।
कांग्रेस इंडिया ब्लॉक या एमवीए गठबंधन में खुद को बड़ा भाई मानकर चल रही थी और वह सबसे ज्यादा सीटों पर चुनाव भी लड़ रही थी, इसलिए वह गठबंधन की इस करारी हार की जिम्मेदारी लेने से नहीं मुकर सकती। अगर लोकसभा चुनावों के बाद से कांग्रेस और उसके नेताओं की रणनीतियों को देखें तो उनसे कम से कम पांच ऐसी बड़ी गलतियां हुई हैं, जिसे उनकी इस ऐतिहासिक हार का जिम्मेदार माना जा सकता है।

1) जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास
लोकसभा चुनावों में कांग्रेस देश में 543 में से 99 और महाराष्ट्र में 48 में 13 सीटें क्या जीती, फिर उसके कदम जमीन पर पड़ने मानो बंद ही हो गए। एक तरफ बीजेपी की अगुवाई वाला एनडीए या महायुति अपनी गलतियों से सीख लेकर, उसे ठीक करने में जुट गया। लेकिन, कांग्रेस पर आत्मविश्वसास का ऐसा भूत सवार हुआ, जिसने जमीनी गंभीरता पर गौर करने का मौका ही नहीं मिला।
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पूरे चुनाव अभियान के दौरान पार्टी का रवैया बहुत ही लापरवाही वाला नजर आया। गुटबाजी जारी रही। टिकट बंटवारे में देरी हुई और सत्तापक्ष के चुनावी दांव को काटने की कोई मजबूत रणनीति भी नहीं बना सकी।
2) बीजेपी के मुकाबले ठोस नैरेटिव का अभाव
बीजेपी और महायुति ने लोकसभा चुनावों के बाद से ही मतदाताओं के उस वर्ग की नाराजगी दूर करने की कोशिशें शुरू कर दीं, जिनकी वजह से उनका गेम बिगड़ गया था। लेकिन, कांग्रेस पार्टी उसके खिलाफ कोई ठोस नैरेटिव नहीं बना सकी। वह लोकसभा चुनावों वाले 'भाजपा संविधान बदल देगी, आरक्षण खत्म कर देगी'रटने के भी भरोसे रह गई।
इसके उलट बीजेपी और महायुति ने कल्याणकारी योजनाओं का दांव चला, विकास की बात की, हिंदुत्व वोट बैंक को एकजुट करने पर काम किया और राष्ट्रवाद के मुद्दे को फिर से जगाने की सफल कोशिश की।
3) वीर सावरकर का अपमान
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने सहयोगियों उद्धव ठाकरे (शिवसेना-यूबीटी) और शरद पवार (एनसीपी-एससीपी) दोनों की चेतावनियों के बावजदू वीर विनायक दामोदर सावरकर को निशाना बनाने की अपनी आदत नहीं छोड़ी। अब कांग्रेस के सहयोगियों को भी महसूस हो रहा है कि कांग्रेस नेता की इस गलती से एमवीए को नुकसान हुआ है और बीजेपी को 'एक हैं तो सेफ हैं' और 'बटेंगे तो कटेंगे' वाले नारे से मजबूती मिली है।
4) जाति जनगणना और संविधान वाला का राग नाकाम
राहुल गांधी की जाति जनगणना वाला दांव विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और एमवीए को बहुत ही उल्टा पड़ गया। उन्होंने 'आरक्षण खत्म करने' को लेकर अमेरिका में जो कुछ कहा था, उसका बीजेपी ने भरपूर फायदा उठाया। वह जनता को यह समझाने में सफल रही कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो वह आरक्षण खत्म कर देगी।
पूरे चुनाव अभियान के दौरान कांग्रेस और अघाड़ी के नेता बीजेपी के इस नैरेटिव की काट नहीं तलाश पाए। अब तो इंडिया ब्लॉक के सहयोगियों को डर है कि कहीं दिल्ली, बंगाल और अन्य राज्यों में भी उन्हें इसकी वजह से नुकसान न हो जाए। यूपी के विधानसभा उपचुनावों में भी भाजपा का यह नैरेटिव सफल होता नजर आया है।
इसी तरह से राहुल गांधी यह समझने में पूरी तरह से नाकाम रहे कि 'संविधान बचाओ'वाले उनके अभियान को अब कोई भाव नहीं दे रहा है। इसका प्रमाण ये है कि उन्होंने नागपुर और कोल्हापुर में दो संविधान सभा आयोजित करवाए और दोनों ही जगहों में कांग्रेस बुरी तरह से पराजित हुई।
कुछ करीब सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि संविधान वाले मुद्दे पर राहुल को कांग्रेस में उनके कुछ बेहद करीबियों ने भी आगाह किया कि यह नैरेटिव काम नहीं करने वाला, लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी और अपनी राग अलापते चले गए।
5) पीएम मोदी के खिलाफ अभियान
राहुल गांधी और कांग्रेस लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर क्रोनी कैपिटलिज्म में शामिल होने का आरोप लगाते आ रहे हैं। कांग्रेस के कई सहयोगी बार-बार उन्हें चेतावनी देते आए हैं कि इससे लेने के देने पड़ सकते हैं!लेकिन, राहुल गांधी किसी की सुनने को तैयार नहीं हुए।
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उद्योगपति गौतम अडानी के बहाने उन्होंने हमेशा से ही पीएम मोदी को टारेगट किया है। कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने गुजरात बनाम महाराष्ट्र करने की भी बेहद खतरनाक गलती की। लेकिन, मतदाताओं के सामने इनकी एक न चली और आखिरकार कांग्रेस को महाराष्ट्र में अपने इतिहास का सबसे बुरा प्रदर्शन देखना पड़ गया।












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