Maharashtra Election: हार के बाद MVA में पड़ने लगी दरार? देने लगे 'एकला चलो' के संकेत!
Maharashtra Election Result 2024: महाराष्ट्र विधानसभा में करारी हार के बाद विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) की चिंता बढ़ गई है। इस चुनाव में उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) विपक्षी गठबंधन में 20 सीटें जीतकर सबसे आगे है। इसके बाद पार्टी की ओर से आने वाले शहरी और स्थानीय निकाय के चुनावों में अकेले चुनाव लड़ने के सिंग्नल मिलने लगी है। शरद पवार की पार्टी भी इस स्थिति के लिए अभी से तैयार नजर आ रही है
एमवीए में शिवसेना (यूबीटी) के अलावा कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी (एससीपी) है। ये दोनों दल विधानसभा चुनावों में उद्धव की पार्टी से भी पीछे रह गए हैं। इन दोनों दलों को क्रमश: 16 और 10 सीटें ही मिली हैं। कांग्रेस की स्ट्राइक रेट इन सबमें सबसे खराब रहा है।

शिवसेना(यूबीटी) में अकेले चुनाव लड़ने के आ रहे हैं विचार!
लोकसभा चुनावों में बड़ी जीत के के बाद विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार की वजह से ये सारे दल असमंजस के दौर से गुजर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शिवसेना (यूबीटी) के शीर्ष नेताओं और नव-निर्वाचित विधायकों और पार्टी के हारे हुए उम्मीदवारों की हुई बैठकों में नेताओं की यही भावना उभरी है कि अकेले चलना ज्यादा अच्छा है।
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महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने कहा,'उनमें से कुछ ने अपनी यह राय दी है कि शिवसेना को 288 विधानसभा सीटों पर खुद को मजबूत करना चाहिए और अगली बार अपने दम पर चुनाव लड़ना चाहिए।'
उन्होंने यह भी कहा कि 'राजनीति में हार होना स्वाभाविक है। हालांकि, यहां जैसा हुआ,उसकी कभी उम्मीद नहीं थी और इसलिए पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से विचार आ रहे हैं।'
बीएमसी चुनाव की सुगबुगाहट की वजह से शिवसेना (यूबीटी) गंभीर!
दरअसल, विधानसभा चुनावों के बाद राज्य में अन्य शहरी निकायों के साथ ही एशिया की सबसे अमीर नगर निकाय बीएमसी के चुनावों की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। कुछ रिपोर्ट हैं कि अगले साल की शुरुआत में यह चुनाव करवाए जा सकते हैं। वैसे भी इस चुनाव में पहले ही करीब तीन साल की देरी हो चुकी है।
उद्धव की पार्टी के लिए लाइफ लाइन है बीएमसी!
बीएमसी शिवसेना (यूबीटी) की सियासत के लिए लाइफ लाइन की तरह है। इस बार का बीएमसी का चुनाव उसके सियासी अस्तित्व के लिए अग्निपरीक्षा साबित होने वाली है। इसलिए पार्टी अभी से इसके गुणा गणित में जुटी हुई नजर आ रही है।
कांग्रेस को उद्धव की पार्टी की प्रतिक्रिया नहीं पसंद!
वहीं, विधानसभा में पूर्व नेता विपक्ष और कांग्रेस के दिग्गज विजय वडेट्टीवार ने कहा कि तीनों दलों ने चुनाव मिलकर लड़ा है। वे बोले,'हम भी ऐसी ही बातें कह सकते हैं।'
स्थानीय इकाई करेगी फैसला- एनसीपी (एसपी)
लेकिन, शरद पवार की एनसीपी (एसपी) ने तो तीनों दलों के विचारों में आ रही दरार पर एक तरह से मुहर ही लगाने की कोशिश कर दी। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता महेश ताप्से ने कहा,'स्थानीय निकायों में हमारी पार्टी स्थानीय इकाई को आजादी देती है कि गठबंधन करे या अकेले लड़े। इसमें जिलावार अंतर होता है।'
महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की पार्टियों का महा विकास अघाड़ी गठबंधन पांच साल पुराना है। यह 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद बना था, जब उद्धव ठाकरे बीजेपी के साथ चुनाव जीतने के बाद अपनी पार्टी का उससे नाता तोड़कर कांग्रेस और एनसीपी से हाथ मिला लिया था।












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