Eknath Shinde ने किन शर्तों पर BJP के आगे डाले हथियार? महाराष्ट्र में ऐसी होगी नई सरकार!
Maharashtra New CM: महाराष्ट्र में पांच दिनों से जारी राजनीतिक असमंजस से पर्दा उठ गया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कह दिया है कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का फैसला मंजूर होगा और वह महाराष्ट्र में बीजेपी के मुख्यमंत्री के लिए राजी हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि नई सरकार बनाने में उनकी ओर से कोई अड़चन नहीं है।
शिवसेना प्रमुख का कहना है कि उन्हें मुख्यमंत्री पद में कोई लालसा भी नहीं है। लेकिन,अगर शिंदे यही सारी बातें एक-दो दिन पहले कह देते तो शायद बात अलग होती। लेकिन, जिस तरह से बीच में उनके मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर शिवेसना के नेताओं के बयान आए और फिर शिंदे ने अब जाकर इतनी सारी बातें कही हैं, उससे लगता है कि डील फाइनल होने के बाद ही गतिरोध दूर हो पाया है।

महायुति सरकार के संयोजक बनना चाहते हैं शिंदे-रिपोर्ट
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक सीएम शिंदे चाहते हैं कि मुख्यमंत्री न सही, उन्हें महायुति सरकार का संयोजक बनाया जाए। क्योंकि, महायुति ने उन्हीं के नेतृत्व में यह चुनाव जीता है। उन्होंने अपने प्रेस कांफ्रेंस में उन योजनाओं और फैसलों का विस्तार से जिक्र भी किया है, जो उनकी सरकार के दौरान लिए गए हैं।
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एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत बनेंगे उपमुख्यमंत्री?
शिंदे ने जिस तरह से सीएम पद के लिए अपना नाम सरेंडर किया है, उसके बाद बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस का नाम अगले मुख्यमंत्री के रूप में सामने आना महज औपचारिकता ही रह गई लगती है। रिपोर्ट के मुताबिक एकनाथ शिंदे ने कल्याण से अपने सांसद बेटे श्रीकांत शिंदे को संभावित फडणवीस सरकार में डिप्टी सीएम बनाने की भी मांग की है।
केंद्र में मंत्री और डिप्टी सीएम नहीं बनना चाहते शिंदे-रिपोर्ट
रिपोर्ट में कहा गया है कि बीजेपी ने शिंदे के सामने केंद्र में कैबिनेट मंत्री या प्रदेश में उपमुख्यमंत्री पद का ऑफर दिया था। लेकिन, जानकारी के मुताबिक उन्होंने इन दोनों ही प्रस्तावों को नामंजूर कर दिया है। हालांकि, बीजेपी का उनकी मांगों पर क्या रुख है, यह अभी साफ नहीं है।
संख्या गणित के हिसाब से शिंदे के पास नहीं थे ज्यादा विकल्प
288 सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा के लिए महायुति के कुल 234 उम्मीदवार चुने गए हैं। इनमें बीजेपी के 132, शिवसेना के 57 और एनसीपी के 41 एमएलए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इनमें से अजित पवार की पार्टी की ओर से पहले ही फडणवीस को सीएम के तौर पर समर्थन देने की बातें सामने आ चुकी हैं। ऐसे में शिंदे के सामने ज्यादा विकल्प भी नहीं बचे थे।
शिंदे को सीएम बनाने के लिए हरियाणा, बिहार का उदाहरण दे रही थी शिवसेना
महाराष्ट्र में बीजेपी की अप्रत्याशित सफलता के बाद इस बार पार्टी किसी भी कीमत पर मुख्यमंत्री पद पर समझौता करने के मूड में नहीं थी, इसके संकेत बार-बार मिल रहे थे। आरएसएस की ओर से भी फडणवीस के नाम को आगे बढ़ाया जा रहा था। यही वजह है कि पहले कभी बिहार और कभी हरियाणा का उदाहरण देकर शिंदे को ही सीएम बनाने की पैरवी में लगी शिवसेना को आखिरकार बुधवार को सुर बदलने पड़ गए।
मंगलवार को शिवसेना नेता और सीएम शिंदे के करीबी नरेश महास्के ने न्यूज18 से कहा था,'हरियाणा में बीजेपी अपने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में लड़ी थी और चुनाव जीतने के बाद उन्हें सीएम बनाया गया। इसी तरह महायुति महाराष्ट्र में सीएम एकनाथ शिंदे की अगुवाई में लड़ा है और उन्हें ही फिर से सीएम बनना चाहिए।'
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हम उद्धव नहीं हैं, जो बाहर चले जाएं- शिवसेना
लेकिन, बुधवार को शिंदे के प्रेस कांफ्रेंस से पहले उनकी पार्टी के नेता ने कहा,'हम उद्धव ठाकरे नहीं है, जो अगर सीएम पद नहीं मिले तो बाहर चले जाएं। महायुति के द्वारा जो भी फैसला होगा हम उसे स्वीकार करेंगे और अगर निर्णय होता है तो फडणवीस को अपना नेता मान लेंगे।'












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