Maharashtra Chunav 2024: किस पार्टी पर भारी पड़ेंगे बागी,कौन है सेफ, अधिक मतदान से किसका खेल बिगड़ना तय?
Maharashtra Election 2024 News: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मतदान के दिन देर से ही सही मतदाताओं ने काफी उत्साह दिखाया है। कम से कम पूरे दिन में मतदान के दौरान वोटरों के रुख से तो ऐसा नही लग रहा था। लेकिन, रात 11.30 बजे तक के आंकड़े के अनुसार 65.1% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। 2019 में राज्य में ईवीएम में डाले गए वोट का प्रतिशत सिर्फ 61.1 था।
इस बार जब नामांकन हो रहा था तब एक समय विभिन्न दलों के बागी उम्मीदवारों की संख्या करीब 150 पहुंच गई थी। बागियों की भरमार ने सत्ताधारी महायुति और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) दोनों ही गठबंधनों की चिंता तभी बढ़ा दी थी। दोनों ओर से तमाम सारी कोशिशें हुईं। आखिरकार प्रमुख दलों को इसमें कुछ सफलता भी मिली और करीब 70 बागियों ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ना तय किया और नामांकन वापसभी ले लिया।

दोनों ही गठबंधनों में बागियों की भरमार
लेकिन, तथ्य यह है कि बुधवार (20 नवंबर, 2024) को महाराष्ट्र विधानसभा के लिए जो वोट डाले गए हैं, उनमें 80 से ज्यादा बागी अंतिम समय तक मुकाबले में डटे रहे हैं। बागियों के इस संकट से दोनों ही प्रमुख गठबंधनों महायुति और महा विकास अघाड़ी (MVA) को जूझना पड़ रहा है।
बीजेपी के उम्मीदवारों के खिलाफ सबसे ज्यादा बागी, दूसरे नंबर पर कांग्रेस
अगर संख्या की बात करें तो बागियों ने सबसे ज्यादा चुनौती महाराष्ट्र की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बीजेपी के सामने खड़ी कर दी है। अकेले 40 बागी प्रत्याशी भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ मैदान में हैं। दूसरे नंबर पर इसकी सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस पार्टी है, जिसे 32 बागियों का सामना करना पड़ रहा है।
बागियों के मामले में शिवसेना सबसे सेफ
अन्य दलों में शिवसेना (यूबीटी) के 8, एनसपी (एससीपी) के 5 और शिवसेना के 1 बागी अंतिम समय तक चुनाव मैदान में डटे पाए गए हैं। इतनी बड़ी तादाद में बागियों के मैदान में डटे रहने का मतलब ये है कि ये जितने भी वोट हासिल करेंगे,अपनी मूल पार्टियों का ही खेल खराब करेंगे। लेकिन, पहले से अधिक मतदान होने की वजह से जीत और हार का अंतर बढ़ने की संभावना पैदा हुई है।
क्या अपने ही बिगाड़ेंगे खेल?
वैसे बागी प्रत्याशी किस दल को कितना नुकसान पहुंचाएंगे, इसको लेकर चुनाव के जानकारों की अलग-अलग राय है। क्योंकि, कुछ मामलों में यह एक सोची-समझी रणनीति भी हो सकती है। मसलन,टीओआई के मुताबिक शिवाजी यूनिवर्सिटी के पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट के पूर्व हेड प्रकाश पवार का कहना है,'हर पार्टी अपने विरोधियों और कुछ मामलों में अपने गठबंधन के सहयोगियों की जीत की संभावनाओं को भी कम करना चाहती है।'
वैसे राजनीतिक दल आखिर-आखिर तक यही भरोसा जताते रहे हैं कि बागियों से कुछ नहीं होगा, मतदाता तो उनके आधिकारिक उम्मीदवार और चुनाव निशान के हिसाब से ही ईवीएम का बटन दबाएंगे। इस तरह की दलील कांग्रेस और बीजेपी दोनों के आधिकारिक प्रवक्ताओं की ओर से मिलती रही है।
सबसे ज्यादा विदर्भ में खेल कर सकते हैं बागी!
बागियों की संख्या जो हमारे सामने आई है, उसका सबसे ज्यादा असर विदर्भ की 62 सीटों पर देखने को मिल सकता है। क्योंकि, कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी लड़ाई सबसे ज्यादा इसी इलाके में है।
यह एक ओबीसी-बहुल इलाका है और यहां मूल-रूप से ओबीसी जातियों का ही प्रभाव है। ऐसे में अगर आधिकारिक उम्मीदवार से अलग जाति के बागियों ने दांव ठोक रखी है तो निश्चित तौर पर वह उस पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिनके खिलाफ उन्होंने चुनाव लड़ना तय किया है। लेकिन, मतदान के आंकड़ों को देखने के बाद लगता है कि राजनीतिक दलों के आधिकारिक उम्मीदवारों ने थोड़ी राहत की सांस जरूर ली होगी।












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