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Maharashtra में सत्‍ता के खेल ने फिर चौंकाया, कांग्रेस, AIMIM और BJP साथ आए

BJP-AIMIM-Congress join hands in Achalpur: महाराष्‍ट्र के अचलपुर नगर परिषद के सियासी खेल ने सबको हैरान कर दिया है। जो राजनीतिक दल चुनावी मंचों पर एक-दूसरे को लोकतंत्र का सबसे बड़ा खतरा बताते नहीं थकते, वही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) और कांग्रेस ने मिलकर विभिन्न समितियों के अध्यक्षों का निर्विरोध चुनाव सुनिश्चित किया। शीर्ष नेतृत्व की नाराजगी की नाराजगी के बावजूद ये गठबंधन हुआ है। स्थानीय नेताओं ने बता दिया कि ज़मीनी राजनीति में विचारधाराएं नहीं, कुर्सी सबसे अहम है।

यह घटनाक्रम भाजपा द्वारा हाल ही में किए गए ऐसे ही गठबंधनों के कुछ दिनों बाद सामने आया है। गौरतलब है कि भाजपा ने अकोट के स्थानीय निकाय में असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम और अंबरनाथ में कांग्रेस के साथ तालमेल किया था।

Maharashtra

अचलपुर नगर परिषद परिणाम में किसे मिली कितनी सीटें?

अचलपुर नगर परिषद के 41 सदस्यीय निकाय चुनावों में कांग्रेस ने 15 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा को 9 और एआईएमआईएम को 3 सीटों पर जीत मिली थी। इसके अलावा, निर्दलीयों ने 10, प्रहार जनशक्ति पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने दो-दो सीटें हासिल की थीं।

कांग्रेस, AIMIM और BJP के साथ आने से बदले राजनीतिक समीकरण

इस आपसी तालमेल की बदौलत एआईएमआईएम के एक पार्षद को शिक्षा एवं खेल समिति का अध्यक्ष निर्विरोध चुना गया। इसी तर्ज पर, कांग्रेस के एक सदस्य को जलापूर्ति समिति का अध्यक्ष पद सौंपा गया, जबकि भाजपा के एक पार्षद ने महिला एवं बाल कल्याण समिति की कमान संभाली। इन तीनों पार्टियों के बीच की यह साझेदारी स्थानीय स्तर पर सत्ता समीकरणों को नया आयाम देती है।

भाजपा विधायक ने जताई नाराजगी

हालांकि, इस गठबंधन पर स्थानीय भाजपा विधायक प्रवीण तयाडे ने अपनी नाराजगी व्यक्त की। अचलपुर से विधायक तयाडे ने मीडिया को बताया कि इस तालमेल के लिए उन्हें बिल्कुल भी विश्वास में नहीं लिया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान उन्हें केवल वार्ड संख्या एक की जिम्मेदारी दी गई थी और उनकी भूमिका सीमित थी।

भाजपा और एआईएमआईएम के बीच हुई इस साझेदारी पर पूछे गए सवाल पर तयाडे ने अपनी वैचारिक स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा, "मैं हिंदुत्व विचारधारा वाला विधायक हूं और हमारी पार्टी भी हिंदुत्व की विचारधारा पर काम करती है, इसलिए मैं ऐसा कभी नहीं कर सकता।" हालांकि, उन्होंने यह जोड़ा, "इस मामले में पार्टी के वरिष्ठ नेता जो भी निर्णय लेंगे, हम उसे स्वीकार करेंगे।"

चुनाव के दौरान ही अकोट में हुआ था ये गठबंधन, सीएम ने जताई थी नाराजगी

गौरतलब है कि राज्य में पहले भी ऐसे विवादास्पद गठबंधन हुए हैं। अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में भाजपा ने एआईएमआईएम के साथ हाथ मिलाया था, लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की फटकार के बाद इसे रद्द कर दिया गया था। वहीं, अंबरनाथ नगर परिषद में शिवसेना को सत्ता से दूर रखने के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन हुआ था, जिसके बाद कांग्रेस ने अपने 12 पार्षदों को निलंबित कर दिया था, पर वे बाद में भाजपा में शामिल हो गए।

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