Ladki Bahin Yojana: क्या खत्म हो गया है सरकार के पास बजट? मंत्री छगन भुजबल ने कर दिया बड़ा खुलासा
Ladki Bahin Yojana: महिलाओं की जिस योजना की बदौलत महायुति सरकार को विधानसभा में प्रचंड बहुमत मिला था और सरकार में दोबारा वापसी हुई थी, वो ही योजना अब सरकार के गले की फांस बनती जा रही है।आगामी नगर निकाय चुनावों से पहले, सरकार की महत्वाकांक्षी 'माझी लाडकी बहिन योजना' राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है।
इस योजना को लेकर लगातार फडणवीस सरकार विपक्षी के निशाने पर है। लड़की बहन योजना की किश्त में देरी होने पर इसके लिए बजट समाप्त होने और योजना के जल्द बंद होने के अटकलें भी लगाई जा रही हैं। इन सब अटकालें के बीच अब फडणवीस सरकार के मंत्री छगन भुजबल ने मंगलवार को बड़ा खुलासा कर दिया है। जिसके बाद महाराष्ट्र सरकार बुरी तरह घिर चुकी है।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने बताया कि मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन योजना राज्य की अन्य कल्याणकारी परियोजनाओं के बजट पर भारी दबाव डाल रही है। इस योजना पर सालाना लगभग 35,000 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं, जिससे अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए संसाधनों की कमी हो रही है।
छगन भुजबल ने इस बात पर जोर दिया कि "माझी लाडकी बहिन योजना में सरकार का 35 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च हो रहा है।" उन्होंने आगे कहा कि इसी वजह से दीवाली में 'राशन आनंद योजना' जैसी अन्य योजनाओं के कार्यान्वयन में बाधाएं आ रही हैं।
भुजबल ने यह भी उल्लेख किया कि इस वर्ष भारी बारिश और बाढ़ के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं, जिससे सरकार पर राहत कार्यों का अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ गया है। फिलहाल किसानों को गेहूं, चावल और नकद सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया जारी है।
महाराष्ट्र सरकार इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रही है। एक ओर, वह महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से 'माझी लाडकी बहिन योजना' चला रही है। वहीं दूसरी ओर, उसे प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों और गरीब वर्ग की सहायता भी करनी पड़ रही है।
इस दोहरे दबाव के बीच, राज्य के लिए कुशल वित्तीय प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी योजनाएं भले ही राजनीतिक लाभ पहुंचाएं, लेकिन लंबे समय में ये वित्तीय संतुलन बिगाड़ सकती हैं।
'माझी लाडकी बहिन योजना' का मुख्य लक्ष्य राज्य की 21 से 60 वर्ष की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। हालांकि, हाल ही में बड़ी संख्या में ऐसे लाभार्थियों के नाम सामने आए हैं जो पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करते, जिससे योजना की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि सभी लाभार्थियों की जांच पारदर्शी तरीके से की जाएगी ताकि भविष्य में किसी भी दुरुपयोग की संभावना को कम किया जा सके।












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