जम्मू कश्मीर चुनाव में उद्धव ठाकरे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी को जानें कितने वोट मिले?
Jammu and Kashmir Election Result 2024: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 से पहले राज्य के दो दिग्गज नेताओं की स्थानीय पार्टियों ने सबको चौकाते हुए जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारे थे।
अजीत पवार की एनसीपी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी, अपने पारंपरिक गढ़ से मीलों दूर अपना दबदबा बताने के लिए बड़ी हनक के साथ जम्मू-कश्मीर के चुनावी मैदान में उतरीं। आइए जानते हैं आखिर दोनों पार्टियों को जम्मू और कश्मीर में कितने फीसदी वोट मिले?

महाराष्ट्र की दोनों स्थानीय पार्टियों को जम्मू-कश्मीर में चुनौतीपूर्ण माहौल का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में अजीत पवार की एनसीपी को मात्र 0.04 प्रतिशत वोट मिले वहीं उद्धव ठाकरे गुट वाली शिवसेना (यूबीटी) 0.05 प्रतिशत वोटों के साथ थोड़ा आगे रही।
महाराष्ट्र में अपने गठबंधन से अलग चुनाव लड़ने का यह कदम उत्तरी राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में एक साहसिक कदम भले रहा हो लेकिन दोनों ही नेता का ये प्रयास फ्लाप अटेम्ट साबित हुआ।
अजित पवार ने उतारे थे 19 उम्मीदवार
अजीत पवार की एनसीपी ने अपने राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाने के प्रयास में 19 सीटों पर चुनाव लड़ा। महाराष्ट्र में भाजपा के साथ गठबंधन रखने वाली पार्टी ने जम्मू-कश्मीर में अपना चुनावी रास्ता अलग करने का फैसला किया। एडवोकेट मोहम्मद अल्ताफ, हनीफ खान और निसार अहमद जैसे उम्मीदवारों ने विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में एनसीपी का प्रतिनिधित्व किया, जिससे पार्टी के विविध प्रतिनिधित्व का पता चलता है।
याद रहे पार्टी ने पहले त्राल, पुलवामा और राजपुरा विधानसभा क्षेत्रों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की थी, जिसमें मोहम्मद यूसुफ हजाम, इश्तियाक अहमद शेख और अरुण कुमार रैना को नामित किया गया था।
उद्धव ठाकरे की शिवसेना
वहीं दूसरी ओर उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने अपने उम्मीदवार उतारकर जम्मू-कश्मीर में अपना पैर पसारना चाहा था । शिवसेना यूबीटी के नेता आनंद दुबे ने अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद पहली बार हो रहे चुनाव में 20 सीटों पर चुनाव लड़ने की पार्टी की मंशा व्यक्त की थी। हालांकि चुनाव परिणाम में एनसीपी की तुलना में ठाकरे की शिवसेना के वोट शेयर में मामूली बढ़ोत्तरी दिखी।
जम्मू-कश्मीर में नेशनल-कांग्रेस और कांग्रेस गठबंधन की हुई जीत
बता दें जम्मू और कश्मीर के चुनाव परिणाम कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन के पक्ष में रहे, जिसने छोटे दलों के प्रयासों को काफी हद तक प्रभावित किया। वहीं भाजपा 29 सीटों पर जीत हासिल कर मजबूम स्थिति में उभर कर आई वहीं फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व ने उनकी पार्टी को 41 सीटों पर बढ़त दिलाई। कांग्रेस 6 सीटें हासिल करने में सफल रही, जबकि महबूबा मुफ्ती की पार्टी और स्वतंत्र उम्मीदवारों ने क्रमशः 4 और 7 सीटें हासिल कीं।












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