Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Eknath Shinde के चार्टर्ड प्लेन को उड़ाने से पायलट का क्यों इनकार? 45 मिनट तक फंसे रहे, आगे क्या हुआ?

Eknath Shinde Pilot Refusal: 'ड्यूटी खत्म हो गई है, अब मैं उड़ान नहीं भर सकता।' ये शब्द उस पायलट के हैं, जिसने 6 जून को महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के चार्टर्ड विमान को उड़ाने से साफ इनकार कर दिया। ये घटना जलगांव एयरपोर्ट पर उस वक्त हुई, जब शिंदे संत मुक्ताई पालकी यात्रा से लौट रहे थे और मुंबई के लिए निकलने वाले थे।

पायलट के इनकार से प्रशासनिक अफसरों और शिंदे के साथ मौजूद मंत्री गिरीश महाजन और गुलाबराव पाटिल भी असमंजस में आ गए। कई कोशिशों के बावजूद पायलट अपनी बात पर अड़ा रहा। करीब 45 मिनट तक एकनाथ शिंदे जलगांव एयरपोर्ट पर ही फंसे रहे।

Eknath Shinde Chartered Plane

पायलट ने क्यों मना किया उड़ान से?

पायलट ने तर्क दिया कि उसकी ड्यूटी का समय पूरा हो चुका है और अब नियमों के मुताबिक वो विमान नहीं उड़ा सकता। यह सुनकर वहां मौजूद अधिकारी, मंत्री और सुरक्षा दल सकते में आ गए। यह कोई आम यात्री नहीं, बल्कि राज्य के डिप्टी सीएम की फ्लाइट थी।

दरअसल, एक पायलट के ड्यूटी ऑवर्स को लेकर कड़े नियम होते हैं। डीजीसीए के नियमों के अनुसार, कोई भी पायलट 8 से 13 घंटे से ज्यादा ड्यूटी नहीं कर सकता। इसमें केवल उड़ान का समय नहीं, बल्कि ब्रिफिंग, डिब्रीफिंग, तैयारी और बाकी प्रक्रियाएं भी शामिल होती हैं। कहा जा रहा है कि अभियान के दिन पायलट पहले ही 12 घंटे की ड्यूटी कर चुका था, ऐसे में बिना पर्याप्त आराम किए आगे उड़ान भरना नियमों के खिलाफ होता। यही वजह थी कि पायलट ने सुरक्षा और नियमों का हवाला देकर इनकार कर दिया।

कैसे सुलझा मामला?

करीब 45 मिनट तक मंत्री गिरीश महाजन और गुलाबराव पाटिल ने एयरलाइन कंपनी और पायलट से बात की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक डॉक्टर को बुलाकर पायलट की मेडिकल जांच करवाई गई, ताकि तय किया जा सके कि वह आगे उड़ान भरने के लिए सक्षम है या नहीं। एयरलाइन कंपनी से अनुमति और डॉक्टर की हरी झंडी के बाद अंततः पायलट उड़ान भरने को तैयार हुआ और चार्टर्ड फ्लाइट मुंबई रवाना हो गई।

गिरीश महाजन बोले, 'सिर्फ एक छोटी सी टेक्निकल दिक्कत थी'

मीडिया से बातचीत में महाजन ने बताया, 'पायलट को स्वास्थ्य और ड्यूटी टाइमिंग को लेकर कुछ समस्या थी। हमने कंपनी से बात की, और उन्होंने स्थिति को सुलझाया।'

शिंदे ने दिखाई इंसानियत की मिसाल

वहीं, फ्लाइट में बैठने से पहले शिंदे की नजर एयरपोर्ट पर परेशान खड़ी शीतल बोर्डे नाम की एक महिला पर पड़ी। वो एक किडनी पेशेंट थी और उसकी फ्लाइट मिस हो चुकी थी। जब मंत्री महाजन ने यह जानकारी दी, तो शिंदे ने उसे और उसके पति को अपने चार्टर्ड प्लेन में बैठा लिया। यात्रा के दौरान शिंदे ने महिला से उसके इलाज की जानकारी ली और मुंबई एयरपोर्ट पर एम्बुलेंस और सर्जरी का इंतजाम भी करवा दिया।

कानून और मानवता, दोनों का बैलेंस बना

जहां एक ओर पायलट ने सख्ती से नियमों का पालन करते हुए उड़ान से इनकार किया, वहीं शिंदे ने इंसानियत की मिसाल पेश की। पूरी घटना बताती है कि कैसे तकनीकी जिम्मेदारियों और मानवीय संवेदनाओं के बीच सामंजस्य बनाना आज भी संभव है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+