Maharashtra Election: इस बार ऐसा क्या हुआ जो चुनावी राजनीति में नहीं दिखता? महायुति के सभी दलों ने दिखाया दम
Maharashtra Election Result 2024: महाराष्ट्र की राजनीति ने पिछले पांच वर्षों में काफी उतार-चढ़ाव देखा है। 2019 में पहले तो विधानसभा चुनावों में जीतने के बावजूद एनडीए की सरकार नहीं बनी। फिर परस्पर-विरोधी विचाधारा वाले नए सियासी समीकरण तैयार किए गए और वह प्रयोग करीब ढाई साल चला। फिर से नया सियासी फॉर्मूला बना और नई सरकार सत्ता में आई। इतने बदलावों और तमाम आरोपों-प्रत्यारोपों और एंटी इंकंबेंसी फैक्टर के बावजूद एक भी कैबिनेट मंत्री चुनाव नहीं हारा।
महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली महायुति सरकार में 28 कैबिनेट मंत्री थे। शिवसेना के कुछ मंत्री पिछले पांच वर्षों में पहले उद्धव ठाकरे और फिर शिंदे दोनों सरकारों की अगुवाई में काम कर चुके हैं। बीजेपी के मंत्री पिछले करीब ढाई साल से सरकार में रहे हैं। उसके कुछ समय बाद एनसीपी के विधायकों को भी मंत्री बनने का मौका मिला। इनमें से कुछ पहले इसी विधानसभा के कार्यकाल में उद्धव सरकार में भी विभिन्न विभागों को संभाल चुके हैं।

महाराष्ट्र में एक भी कैबिनेट मंत्री की नहीं हुई हार, सभी 28 जीते
खासकर शिवसेना और एनसीपी के मंत्रियों पर ज्यादा दबाव था। उनपर एंटी-इंकंबेंसी फैक्टर का प्रेशर भी काम कर रहा था और शिवसेना (यूबीटी) और एसपीपी (शरदचंद्र पवार) की ओर से 'गद्दारी' के भी आरोप लगाए जा रहे थे।
इसे भी पढ़ें- Maharashtra New CM: महाराष्ट्र का किंग कौन? शिंदे, फडणवीस या अजित पवार में कौन होगा डिप्टी CM?
बीजेपी के मंत्रियों पर ढाई साल की एंटी-इंकंबेंसी के साथ-साथ कथित तौर पर शिवसेना और एनसीपी को तोड़ने की साजिश में शामिल होने के भी आरोप लगाए जा रहे थे। लेकिन, महाराष्ट्र के मतदाताओं ने इन सबके बावजूद सभी 28 कैबिनेट मंत्रियों को चुनकर फिर से असेंबली में जाने का मौका दिया है।
महाराष्ट्र में प्रो-इंकंबेंसी फैक्टर ने किया कमाल!
भारत की चुनावी राजनीति के इतिहास में सत्ताधारी दलों की ऐसी कामयाबी का उदाहरण मिलना बहुत ही दुर्लभ है। राजनीतिक विश्लेषक भी महाराष्ट्र के मतदाताओं के जनादेश को देखकर दंग हैं। ऐसे ही एक विशेषज्ञ ने कहा है,'ये एक ऐसी कामयाबी है, जो सभी मौजूदा मंत्रियों को मिली है। आमतौर पर मंत्रियों को एंटी-इंकंबेंसी का नुकसान झेलना पड़ता है, क्योंकि वे सत्ता में रहते हैं और उनसे लोगों की उम्मीदें ज्यादा होती हैं।'
उन्होंने आगे कहा,'छगन भुजबल और धनंजय मुंडे जैसे बड़े मंत्री जीत गए और उसी तरह से तानाजी सावंत, अब्दुल सत्तार, शंभुराजे देसाई, गुलाबराव पाटिल, उदय सावंत और अदिति तटकरे भी। यह ये दिखाता है कि सरकार के प्रति प्रो-इंकंबेंसी है और लोगों ने उन्हें सत्ता में वापसी के लिए वोट दिया है।'
विवादित बयानों वाले मंत्रियों पर भी वोटरों ने जताया भरोसा
चौंकाने वाली बात तो ये है कि ऐसे मंत्री भी चुनाव जीते हैं, जो अपने विवादित बयानों की वजह से सरकार की चुनौती बढ़ाते रहे हैं। इनमें शिवसेना के तानाजी सावंत और अब्दुल सत्तार का नाम लिया जा सकता है। मसलन, सावंत ने कह दिया था कि उनकी एनसीपी नेताओं से कभी नहीं बनी, इसलिए कैबिनेट बैठकों में अजित पवार के साथ बैठने में उन्हें दिक्कत हुई।
इससे पहले भी कुछ मौकों पर वे अपने बयानों की वजह से वे सरकार की फजीहत करवा चुके थे। अब्दुल सत्तार भी इसी तरह से अपने विवादित बयानों की वजह से कई बार सरकार को मुश्किल में डाल चुके हैं। लेकिन, चुनावों में जनता ने उनपर फिर से भरोसा जताया है।
इसे भी पढ़ें- Maharashtra New CM: सरकार गठन,मुख्यमंत्री के शपथग्रहण में देरी से क्या होगा, क्यों राष्ट्रपति शासन जरूरी नहीं?
देश के चुनावी इतिहास में हाल-फिलहाल ऐसा कोई भी चुनाव नहीं दिखता, जहां सभी मंत्रियों की जीत मुकम्मल हुई हो। शायद इसकी वजह ये है कि महाराष्ट्र में सत्ता के पक्ष में जो चुपचाप लहर चल रही थी, उसकी भनक किसी भी चुनावी जानकारों को महसूस नहीं हुई।












Click it and Unblock the Notifications